खेलों से सकारात्मक प्रतिस्पर्धा सीखें - मनुदेव सिनसिनी
नदबई . गांव कबई में रात्रिकालीन क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन भारतीय खाद्य निगम के सलाहकार सदस्य मनुदेव सिनसिनी के मुख्य आथित्य में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर ग्राम कबई के युवाओं में काफी उत्साह दिखा। गांव के युवाओं ने कहा की क्षेत्र में इस तरह का विशाल रात्रिकालीन क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन करने के लिए उन्होंने बड़े स्तर पर तैयारियां की है और दूर दूर से क्रिकेट टीम इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आ रही हैं।
इस अवसर पर अध्यापक तेज सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि मनुदेव सिनसिनी भरतपुर के युवाओं के लिए एक आदर्श हैं जो समाज की सेवा के लिए निर्भीक और निडर होकर बड़ी बेबाकी से अपने कर्म के रास्ते पर प्रगतिशील हैं। उनके सबके साथ मिलकर चलने और छोटे से छोटे व्यक्ति को सम्मान देने के गुण के कारण एक बार जो व्यक्ति उनसे मिल लेता है वह निश्चित ही उनके विचारों का कायल होकर उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता।
युवा नेता संजय में कहा कि युवाओं में भाई मनुदेव सिनसिनी की सादगी और विचारों का बहुत क्रेज है। आज हर कोई उनके नक्शे कदम पर चलकर समाज हित में कुछ करने की प्रेरणा ले रहा है। उनके विचारों और कार्यों ने समाज को एक नई दशा और दिशा दी है।इसलिए युवा उन्हे देखने और सुनने हेतु हर जगह आमंत्रित करते हैं।वह युवाओं की पहली पसंद हैं।
मुख्य अतिथि मनुदेव सिनसिनी ने कहा कि हमे खेलो से सकारात्मक प्रतिस्पर्धा सीखने की जरूरत है। हम अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल एक दूसरे को अच्छा कार्य करने से रोकने में नही बल्कि उससे बेहतर करने में लगाएं। जिस दिन समाज के हर व्यक्ति में यह भाव आ जायेगा उस दिन देश, समाज और हर व्यक्ति का विकास निश्चित है। मनुदेव सिनसिनी ने कहा आज खेलो में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं, रोजगार और धन उपार्जन के रास्ते हैं। कोई भी युवा अपने जीवन में जिस लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है वह अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और लगन से प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें हर व्यक्ति की मदद कर आनंद की अनुभूति होती है। उनके जीवन का उद्देश्य धन कमाना नहीं बल्कि समाज और देश की निश्वार्थ सेवा करना और समाज के विकास में अपना योगदान देना है।
उन्होंने कहा कि सपने वह नही होते जो हम सोते हुए देखते हैं बल्कि सपने वह होते हैं जो हमे सोने ना दें और दिन रात मेहनत करने की याद दिलाते रहें।
उन्होंने कहा कि समाज से बढ़कर कुछ नही। हम जीवन भर समाज से लेते ही लेते हैं लेकिन हमारे जीवन में हमे समाज को कुछ देने की भावना भी होनी चाहिए। समाज हित में छोटा छोटा योगदान करके हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।