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पुस्तकालय सामाजिक परिवर्तन के सशक्त माध्यम : उपराष्ट्रपति

पुस्तकालय सामाजिक परिवर्तन के सशक्त माध्यम : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों के संग्रहालय नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले और सामाजिक परिवर्तन के सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने यह विचार नई दिल्ली के किंग्सवे कैंप में स्थित ऐतिहासिक गांधी आश्रम में हरिजन सेवक संघ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उपराष्ट्रपति आज गांधी आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने महादेव देसाई पुस्तकालय के विस्तार का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने आश्रम परिसर में स्थित कस्तूरबा संग्रहालय का भी दौरा किया, जहां महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी 1930 और 1940 के दशक में दिल्ली आने पर रुके थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आश्रम में महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी के सादे जीवन को देखकर गहरी भावनात्मक अनुभूति होती है, जो त्याग, सेवा और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि महादेव देसाई पुस्तकालय का विस्तार केवल एक भौतिक संरचना का विस्तार नहीं है, बल्कि यह उस विचार का पुनः सुदृढ़ीकरण है कि ज्ञान ही समाज को आगे बढ़ाने की सबसे मजबूत शक्ति है। पुस्तकालय विचारों को जागृत करते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं। महात्मा गांधी के जीवन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय किसानों की गरीबी से साक्षात्कार के बाद गांधीजी ने पाश्चात्य परिधान त्यागकर केवल धोती धारण करने का संकल्प लिया। यह परिवर्तन जनसामान्य से जुड़ने और उनके उत्थान के लिए आजीवन समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी ने भारत के कच्चे माल को विदेश भेजकर तैयार माल के रूप में वापस बेचने की नीति का विरोध किया और स्वदेशी को बढ़ावा दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा स्थापित हरिजन सेवक संघ ने शिक्षा, जागरूकता और सेवा के माध्यम से छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। किसी व्यक्ति की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके चरित्र से होती है। पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन के जीवन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हरिजन सेवक संघ ने उनकी शिक्षा और जीवन यात्रा को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विश्वास जताया कि संघ आगे भी ऐसे अनेक व्यक्तित्व तैयार करेगा, जो समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा बनेंगे। उपराष्ट्रपति ने समाज और व्यक्ति के परस्पर संबंध पर जोर देते हुए कहा कि समाज व्यक्ति को गढ़ता है और व्यक्ति का दायित्व है कि वह समाज को लौटाए। उन्होंने समाज सेवा को नैतिक कर्तव्य के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण का माध्यम बताया। कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने प्रो. डॉ. शंकर कुमार सान्याल द्वारा लिखित पुस्तक “एज ऑफ एनलाइटनमेंट: महात्मा गांधीज़ विजन” का विमोचन किया तथा महात्मा गांधी, ठक्कर बापा और विनोबा भावे को पुष्पांजलि अर्पित की।इस अवसर पर हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष प्रो. डॉ. शंकर कुमार सान्याल, पूर्व सांसद एवं उपाध्यक्ष नरेश यादव, केवीआईसी के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मी दास सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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