शराब घोटाला केजरीवाल के गले की फांस बना
आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सदस्य संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद शराब घोटाले की आंच दिल्ली के
मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल तक पहुँचने लगी है। भाजपा की माने तो इस प्रकरण के सूत्रधार केजरीवाल
की गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है। ईडी ने संजय सिंह के दिल्ली वाले घर में बुधवार सुबह 7 बजे से छापा
मारा था। यहां से कई दस्तावेज जब्त किए गए। आबकारी नीति केस की चार्जशीट में संजय सिंह का भी
नाम है। इस केस में मनीष सिसोदिया फरवरी से ही जेल में हैं। संजय सिंह के गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के
मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर
हमला बोला है. अरविंद केजरीवाल ने अपने X हैंडल से पोस्ट किया, संजय सिंह की गिरफ्तारी बिल्कुल गैर
कानूनी है। ये मोदी जी की बौखलाहट दर्शाता है। चुनाव तक ये कई और विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करेंगे।
सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया के बाद केजरीवाल के विश्वस्त सहयोगी संजय सिंह की शराब घोटाले में
गिरफ्तारी के सियासी हलकों में कई अर्थ और अनर्थ निकाले जा रहे है। ईडी की चार्जशीट में संजय सिंह पर
82 लाख रुपये का चंदा लेने का जिक्र है। इसको लेकर ही ईडी ने बुधवार को उनके घर पर छापा मारा था।
भाजपा का आरोप है की गिरफ़्तारी का वे पार्टियां और नेता विरोध कर रहे है जिनके खिलाफ पहले ही
भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरूपयोग और अनियमितताओं के गंभीर आरोप है। इन नेताओं के खिलाफ विभिन्न
न्यायालयों में मुकदमें विचाराधीन है। ये नेता या तो जेल में बंद है अथवा जमानत पर बाहर है। । इंडिया
एलाइंस की घटक पार्टियां जोर शोर से मोदी सरकार पर सरकारी एजेंसियों के दुरूपयोग का आरोप लगा रही
है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जिन पार्टियों ने खुलमखुला केजरीवाल की पार्टी और सिसोदिया का समर्थन
किया है उनमें कम्युनिष्ट पार्टियों सहित अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल के बाप
बेटे लालू और तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, केसीआर की भारत राष्ट्र समिति, हेमंत
सोरेन की झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, शिवसेना उद्धव गुट, जेडी यू आदि शामिल है। दिल्ली कांग्रेस पार्टी के
प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि उनकी पार्टी का जो स्टैंड पहले था, वही इस
मामले में आज भी है। दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। लेकिन केंद्र
सरकार को अपनी जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। विस्तार से चर्चा करें तो
लालू चारा घोटाले में सजायाप्ता है। तेजस्वी पर बेनामी सम्पति के मामले चल रहे है। अखिलेश पर गुंडों
और बदमाशों के संरक्षण के आरोप है। ममता की पार्टी के कई मंत्री और नेता जेल में है। शिवसेना नेता
संजय राउत जेल जा चुके है और जमानत पर है। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेताओं पर सत्ता के दुरूपयोग के
अनेक प्रकरण विचाराधीन है। केसीआर की बेटी शराब घोटाले की एक आरोपी है। एनसीपी के दो पूर्व मंत्री
जेल में है या जमानत पर है। कहने का मतलब है संजय सिंह और आम आदमी पार्टी के समर्थन में वे
राजनीतिक पार्टियां आगे आयी है जो खुद कहीं न कहीं सेंट्रल एजेंसियों के राडार पर है और जिनके नेताओं
पर भ्रष्टाचार सहित सत्ता के दुरूपयोग और आर्थिक अनियमितताओं के आरोप है। खुद आम आदमी पार्टी
के कई नेता या तो जेल में है या जमानत पर छुटे हुए है। आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक दवाब में की गई
कार्रवाई बताते हुए सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है। वहीँ ईडी का दावा है कि उनके पास संजय सिंह के खिलाफ
पुख्ता सबूत हैं और वे जाँच में सहयोग नहीं कर रहे है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सिसोदिया ने उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना शराब नीति में बदलाव किया।
आरोप है कि इससे शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचा। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इससे मिले
कमीशन का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में किया। नई शराब नीति में तमाम
खामियों के बाद चार महीन के भीतर ही नई शराब नीति को वापस ले लिया गया था। दिल्ली के
उपराज्यपाल वीके सक्सेना की तरफ से सीबीआई से इस मामले की जांच कराने की सिफारिश की गई थ।
इसके बाद ही इस पॉलिसी को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद ईडी ने धन शोधन रोकथाम कानून
(PMLA Act)के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू की।
उल्लेखनीय है अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सक्रिय रहे अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में
आने का फैसला लिया था। उन्होंने दो अक्टूबर 2012 को आम आदमी पार्टी का गठन किया गया था।
राजनीति में सुचिता का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के दिल्ली और पंजाब में सत्ता में आने के बाद
कई नेता और मंत्री भ्रष्टाचार सहित अनेक प्रकरणों में फंसने के बाद जेल में बंद है या जमानत पर है।