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चुनावी साल में लुट रहा माल है

चुनावी साल में लुट रहा माल है

चुनावी साल है। लुट रहा हर तरफ माल ही माल है। हर तरफ जाल है , यही चुनावी ढ़ाल है। आजकल सरकारें पिटारे पर पिटारा खोल रही हैं। वोटर को तौल रही है । वोटर्स की भाषा बोल रही हैं। भेद वोटर्स के लिए खोल रही हैं। दर-दर, घर-घर सरकारें डोल रही हैं। पिटारा खोलकर डुगडुगी पर डुगडुगी बजाई जा रही है। ले लो। ले जाओ। ले ही जाओ। आइए आइए मेहरबान ! आइए आइए कद्रदान। आइए आइए वोटरों। आपका स्वागत है। सब आपके लिए ही तो है। सब आपका ही है। हमारा है ही क्या यहाँ। हम क्या साथ लाए थे, क्या साथ ले जाएंगे। आइए, आइए मेहरबान, आइए कद्रदान। आपका भारी भरकम स्वागत है। आपके स्वागत में हम सभी राजनीतिक दल लोटपोट हैं। फ्री का हॉटसॉट है।
आइए वोटर्स, आइए आइए। खाली हाथ बिल्कुल भी मत जाइए। कुछ न कुछ लेकर ही जाइए। सब फ्री है।खाइए, लुटाइए। सब आपका ही है। माल पर आपका ही हक है। क्या आपको इस फ्री-बीज पर कोई शक है ? ये तो आपका ही 'लक' है। सब माल 'टका-टक' है। सब 'झका-झक' है। हम तो आपकी सेवार्थ ही सब माल-ताल आपके लिए सड़क पर गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले बिछाएं हैं। आपको खुली छूट है। फ्री-बीज ही असली फ्रूट है, जहाँ खुली लूट है। बाकी सब सरासर झूठ है।
फ्रिज, टीवी, मोबाइल, लैपटॉप, स्कूटी-वकूटी, राशन-फाशन, आटा,तैल-चावल,गेहूँ, दाल, ब्रेड, चद्दर, तौलिया, रसोई गैस, गैस स्टोव। आइए आइए और जी भरकर ले जाइए। पांच साल में यह छूट मिलती है।इसलिए जी भर के ले जाइए। लेकिन वोट के घूंट सिर्फ़ और सिर्फ हमारी पार्टी को ही पिलाइए। हम मूरख ,खल ,कामी। हम भरते हैं इस बात की खूब हामी। पांच साल से हम तो आप वोटर्स को भूल ही गये थे। यह हमारी बहुत बड़ी भूल थी। भूल के क्षेत्र में यह हमारी भूल नहीं यह काफी बड़ा 'ब्लंडर' था। हम आपको भुलाकर 'परम् भारी ब्लंडर(गलता) कर बैठे। न जाने क्यों पांच साल भूल गए और चलता कर बैठे। लेकिन हमें पांच साल बाद भी आपकी याद है, इसलिए बांट रहे 'फ्री-बीज की खाद हैं।
हमने अब आप वोटर्स के लिए 'पिटारा' खोल दिया है। सब आपके नाम बोल दिया है। यह 'पिटारा' आपके लिए ही है, किसी और के लिए नहीं। आइए आइए। अब हम आपको 'मोटा माल(फ्री-बीज)' देंगे। यह हमारी और से आपको सुपर परम् ऑफर है। अभी आप फ्री में सामान ले जाइए। हम आपको नौकरी देंगे। वादों पर वादों की लस्सी पिलायेंगे। रोजमर्रा काम में आने वाली सब चीजें आपको उपलब्ध करायेंगे। यह हमारा(राजनीतिक दलों का) दायित्व है, और हम हमारा दायित्व बखूबी समझते हैं। हम सेवा के इच्छुक हैं। घोर परम् इच्छुक।सुपर परम् घोर मोस्ट इच्छुक। हम राहत पर राहत फेंकेंगे। जनता को राहत फेंकना हम राजनीतिक दलों का धर्म है। चुनावी समय आया,हमने की गलती अब तक, आप वोटर्स को भुलाया !
यदि आप जनता का किसी चीज ,किसी मुद्दे को लेकर कोई ग्रिवांस(दुख,तकलीफ,कष्ट, परेशानी) है तो हम समिति खड़ी कर देंगे। हम समिति के माध्यम से आप जनता के अधिकारों के लिए सदैव प्रतिबद्ध और कृतसंकल्पित हैं। हम समिति को सारी जिम्मेदारी सौंपेंगे कि वह आप जनता के हितों के मद्देनजर काम करें। हमें कतई नहीं देखे, सिर्फ़ और सिर्फ़ जनता को देखे।जनता के हितों को देंखें। तभी तो जनता हमारे हितों को देखेगी। हम अहसान नहीं चाहते। इस हाथ दें,उस हाथ लें। आइए आइए मेहरबान। आइए आइए सब फ्री है। फ्री फ्री फ्री। सामान फ्री। समिति फ्री। घोषणा का जाल फ्री। हरेक माल फ्री। फ्री फ्री फ्री। एक सामान के साथ तीन फ्री। बाइ वन गेट थ्री फ्री। आप सामान ले जाइए। सिर्फ़ वोट इधर फेंकिए और जो चाहिए उस सामान को लपकिए। वोट को इधर पटको और खटाक से कोई भी सामान को तुरंत ही झटको। चुनावी साल है, बिक रहा माल है, वोट देने से क्या उतर रही खाल है ? नहीं ये कोई राजनीतिक चाल है, चुनावी साल में सरकार का पिटारा फैल रहा डाल-डाल ,पात-पात है। राहत के लिए उठ रहे कदम है, भेष चाहे लग रहा आपको ये छद्म(झूठा) है, लेकिन हर पांच साल बाद सरकार का फ्री-बीज पिटारा असली धर्म और कर्म है जो पहुंच रहा इन दिनों चरम है। धंधा फ्री-बीज का जायज है। अजी ! वोटों के लिए यही तो असली कवायद है।

-सुनील कुमार महला

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