भगवान महावीर ने पाठशाला में धर्म की शिक्षा ग्रहण की
वैर. क्षेत्र के सिरस गांव स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर में चल रही अंजनशलाका एवं प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन शुक्रवार को भगवान महावीर ने पाठशाला में धर्म की शिक्षा ग्रहण की। अन्य बच्चों के साथ कक्षा में बैठकर प्रभु ने नवकार मंत्र सीखा। दोपहर बाद दो बजे जैनाचार्य मरूधर रत्न रत्नाकर सूरीश्वर महाराज की निश्रा में वीर प्रभु की बारात निकाली गई। बैण्डबाजे के साथ बारात मंदिर से अयोध्या नगरी पहुंची। जहां मौजूद श्रावक-श्राविकाओं ने बारातियों का अभिनंदन किया।
महोत्सव प्रचार-प्रसार समिति प्रभारी राजेश जैन ने बताया कि सुबह 10 बजे जैन अलर्ट ग्रुप ऑफ इण्डिया सैटेलाइट अहमदाबाद शाखा के घोषवादन की धुनों पर नाचते-गाते श्रद्धालु भगवान को लेकर मंदिर पहुंचे। जहां प्रियंवदा दासी बनी नीलम आकाश बोकड़िया ने राजा सिद्धार्थ को पुत्ररत्न होने की जानकारी दी तो राजा खुशी से झूम उठे। इस दौरान भगवान की कुण्डली भी बनाई गई। बाद में भगवान की बुआ ने नामकरण कर ऋषभ नाम दिया और प्रभु को अपनी ओर से वस्त्र पहनाए। इस दौरान अयोध्या नगरी बना पाण्डाल महावीर के जयकारों से गूंज उठा तथा श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। विधि कारकों ने विधान कराए तथा प्रभु के परिजन बने रमेश कुमार, मोहन लाल आदि परिवारजनों ने भगवान को झूले में झुलाकर दुलार किया। इधर भगवान के नामकरण के भरतपुर, करौली, हिण्डौन, महवा, खेड़लीगंज, बयाना, वैर, जयपुर, गंगापुर, सिरोही, कठूमर एवं गुजरात आदि से काफी संख्या में पहुंचे जैन श्रावक-श्राविकाएं साक्षी बने। इस दौरान शनिवार को निकलने वाले वरघोड़ा में विभिन्न झांकियों की बोलियां भी लगाई गईं। इससे पहले बुधवार देर शाम मंदिर के सामने बनी अयोध्या नगरी में आयोजित भजन संध्या में शिवगंज सिरोही के संगीतकार कमलेश जैन एवं पार्टी ने भजनों की प्रस्तुति दे समां बांध दिया। रात 10 बजे तक श्रद्धालुओं ने भजन संध्या का आनंद लिया। इस दौरान स्वामी वात्सल्य के लाभार्थी रहे परिवार का बहुमान किया गया।