वासना आंखों के रास्ते मन में प्रवेश करती है , संत राम
धौलपुर । प्रदेश के वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन अकादमी के अध्यक्ष राम सिंह राव धौलपुर जिले के दौरे पर है। राज्य मंत्री राव बाड़ी उपखंड के ग्राम खानपुर में आमजन को रामकथा सुना रहे है। गुरुवार को राम कथा का प्रसंग सुनाते हुए संत राम ने कहा की चित्रकूट से राम ऋषि अत्रि और सती अनुसुइया के आश्रम गए वहां सती अनुसुइया ने सीता जी को स्त्री धर्म की शिक्षा दी स्त्री धर्म की शिक्षा देते हुए सती अनुसूया ने सीता जी को बताया की पतिव्रता तीन श्रेणी की होती है सबसे उत्तम अपने पति के अलावा जग में किसी को भी पुरुष मानने को तैयार नहीं वह समझती है कि मेरा पति ही पुरुष है। मध्यम प्रकार की पतिव्रता अपने पति के अलावा बड़ों को पिता बराबर वालों को भाई तथा उम्र से छोटों को पुत्र स्वरुप में देखती है। तीसरी श्रेणी की निकृष्ट पतिव्रता अपने कुल धर्म की मर्यादा के लिए इच्छा न होने के विपरीत भी पतिव्रत धर्म से बनी रहती है। ऋषि अत्रि और सती अनुईसूया के आश्रम से राम जी ऋषि श्रभंग, सुतीक्ष्ण एवं अगस्त से मिलने पहुंचे । मिलने के पश्चात ऋषि अगस्त्य से रामजी प्रश्न करते हैं कि यह इतनी बड़ा हड्डियों का पहाड़ किसका है। तब ऋषि अगस्त बताते हैं कि यह ऋषि मुनियों की हड्डियां हैं। तब राम जी संकल्प करते हैं कि वह शीघ्र ही सभी राक्षसो को समाप्त करेंगे। पंचवटी में आकर राम जी एक सुंदर कुटिया का निर्माण करते है। अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपनी लीला प्रारंभ करते हैं तथा वास्तविक सीता को अग्नि तत्व में समाहित करते हैं । रावण की बहन शूर्पणखा का आगमन होता है जो राम से विवाह करने की इच्छा जागृत करती है । लेकिन राम जी उसकी ओर दृष्टि भी नहीं डालते। संत राम बापू ने बताया कि सबसे पहले दोष का आगमन दृष्टि से होता है शूर्पणखा वासना का दूसरा नाम है इसीलिए वासना से बचने के लिए राम जी अपनी पूरी दृष्टि सीता जी की तरफ रखते हैं। इसी प्रकार कृष्ण जन्म में जब पूतना आई तब कहीं वासना उनके कृष्ण के भीतर प्रवेश ना कर पाए इसलिए उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली थी। रामजी शूर्पणखा को लक्ष्मण जी से मिलने के लिए कहते हैं ।लक्ष्मण कहते हैं कि मैं दास हूं वह स्वामी है अंततोगत्वा शूर्पणखा अपना वास्तविक स्वरूप दिखाती है। तब लक्ष्मण जी उसके नाक और कान काट देते हैं खर दूषण राम जी से युद्ध करने के लिए आते हैं तथा मारे जाते हैं। शूर्पणखा अपनी व्यथा और खर दूषण के मारे जाने का समाचार रावण को सुनाती है। रावण मामा मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर तथा स्वयं साधु का वेश धारण कर दंडक वन में जाता है। स्वर्ण मृग को देखकर छाया देवी सीता राम जी से मृग पकड़ने का आग्रह करती है मायावी मारीच मारा जाता है तथा मायावी मारीच राम जी की आवाज में लक्ष्मण जी को पुकारता है तब सीताजी राम जी को विपदा में जानकर मदद के लिए लक्ष्मण को कहती हैं । लक्ष्मण सीता जी को समझाते हैं लेकिन कुछ कड़वे बोल सुनकर लक्ष्मण रेखा खींचकर वन में जाते हैं। मायावी रावण पीछे से सीता जी का हरण कर लेता है इस दौरान सीता जी को ले जाते हुए गिद्ध राज से रावण का युद्ध होता है राम लक्ष्मण सीता को खोजते हुए वहां पहुंचते हैं तथा गिद्ध राज को वह गति प्रदान करते हैं जो उन्होंने अपने पिता को भी नहीं की। राम जी गिद्ध राज का अंतिम संस्कार करते हैं। यह श्रीराम के पक्षी प्रेम को दर्शाता है शबरी के बेर खाते हैं और कहते हैं कि मेरा संबंध जात पात से नहीं केवल भक्ति से है। शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश देते हैं तथा ऋषिमुख पर्वत पर हनुमान जी की सहायता से सुग्रीव से मिलकर मित्रता करते हैं यह जीव और ब्रह्म की मैत्री है।