भारत की सांस्कृतिक पुनर्स्थापना का ‘महाकुंभ’
योगी आदित्यनाथ ने जब पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला तो सियासी गलियारे में ‘कांटो भरा ताज’ कहा गया। यह काफी हद तक सही भी था। प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर हो चुकी थी। भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के दलदल में प्रदेश गहरे तक धंस चुका था। अपराधियों, माफियाओं से जुड़ी खबरें ही अखबारों की सुर्खियां बनती थी। हताशा और निराशा का आलम यह था कि निवेशक राज्य से बाहर जा रहे थे। विकास और कारोबारी रैंकिंग में प्रदेश का प्रदर्शन गिरता जा रहा था। इन विषम परिस्थितियों में मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे पहले पुलिस मुख्यालय का दौरा कर योगी आदित्यनाथ ने दूरगामी संदेश दिए। साफ था कि कानून व्यवस्था योगी की सर्वोच्च प्राथमिकता थी। अपने पहले कार्यकाल में सूबे की सरकार इसी पर अमल करती दिखी भी। अपने दूसरे कार्यकाल में उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का उद्घोष करते समय प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने यूपी फॉर यूपी, यूपी फॉर इंडिया और यूपी फॉर ग्लोबल का विजन दिया था। अब जबकि संगम किनारे महाकुम्भ के आरंभ होने में महज चंद दिन रह गए हैं तो योगी द्वारा कहे गए इन शब्द समूहों की व्यापक व्याख्या अनिवार्य है।