भगवन हरिहर और भगवन सूर्यनारायण का महाभिषेक
सीकर। भगवान विष्णु ने अपनी महिमा में केवल भक्ति की छूट दी। इससे शंकरजी बहुत प्रसन्न हुए। शंकरजी ने अपना आधा शरीर उन्हें माना। हर्षनाथ ग्रुप के सदस्यों ने हर्ष पर्वत पर पैदल चढ़ाई करके श्रावण के अंतिम सोमवार एवम सोमप्रदोष पर हर्ष पर्वत पर भगवन हरिहर और भगवन सूर्यनारायण का महाभिषेक पूरी विधि विधान के साथ किया। आचार्य प्रदीप शास्त्री, आचार्य कुलदीप शास्त्री अवन आचार्य उमेश आचार्य ने भगवान भोलेनाथ का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद, शर्करा, पंचामृत, गंगाजल, फलों के रस इत्यादि से विधि विधान से करवाया। ग्रुप के सदस्य डॉ मुकेश शर्मा ने बताया सावन के अंतिम सोमप्रदोष पर हर्ष पर बहुत ही मनोहर दृश्य देखने को मिला । सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओ का सुबह से ही ताता लगा हुआ देखने को मिला आए हुए सभी भक्तो ने भोलेनाथ को रिझाने के लिए सम्पूर्ण शिव परिवार सहित भगवन सूर्य नारायण अव्व्म भगवन सालिग्राम का अभिषेक बिल्व पत्र, आक पुष्प, दुर्वा दल, गुलाब पुष्प अर्पित किया। भगवन हरिहर की पूजा विशेष फलदाई होती है सभी मनोकामनाएं जल्द पूरी होती है देवों के देव महादेव श्री शिव को कल्याणकारी देवता के रूप में सर्वत्र पूजा जाता है श्रावण माह में भगवन शिव के साथ भगवन नारायण की पूजा अभिषेक अनेक मनोरथ को पूर्ण करने वाली है अत: जो आत्मसिद्धि चाहता है उसे भगवन हरिहर की विधिवत पूजा करनी चाहिए जानकारी आचार्य प्रदीप शास्त्री ने दी।