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जमवारामगढ़ में धूमधाम से मनाया गया  महाशिवरात्री पर्व।

जमवारामगढ़ में धूमधाम से मनाया गया  महाशिवरात्री पर्व।

पूर्व विधायक जगदीश मीणा ने टोडेश्वर महादेव के दर्शन कर लगाई ढोक, मांगी प्रदेश में अमन चैन की दुआ।

 
जमवारामगढ़  .  श्री राधे गोविन्देव मंदिर नांगलतुलसीदास सहित समस्त जमवरामगढ़ उपखंड क्षेत्र में शनिवार को महाशिवरात्रि उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। विधायक गोपाल मीणा एवं पूर्व विधायक जगदीश मीणा ने टोडेश्वर महादेव के दर्शन कर लगाई ढोक मांगी प्रदेश में अमन चैन की दुआ। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नव विवाहित महिलाओ ने बाबा भोलेनाथ को  दुग्ध मिश्रित जल से भरी हुई जेघड़ चढ़ाई व महिलाएं झुंड के झुंड में मंगल गीत गातीं हुईं आकर मंदिर में विराजमान शिव परिवार के समस्त देवी देवताओं सहित बाबा भोले नाथ को गंगा जल व पंचामृत स्नान कराकर  बिल्वपत्र, आंकड़ा, धतूरा,बेर, सोगरी, गाजर, दूब, शमि पत्र, भांग, कर्पूर, दूध, चावल, चंदन, भस्म, रुद्राक्ष आदि सामग्री अर्पित कर के अपने खुशहाल दाम्पत्य जीवन के साथ परिवार में सुख, शान्ति, वैभव, यश, कीर्ति व धन दोलत के साथ सभी प्रकार की मंगल कामनाएं करते हुए भोले बाबा का पूजन किया। 
 
 इस मौके पर चिरंजीव दास महाराज ने बताया कि अलग-अलग ग्रंथों में महाशिवरात्रि की अलग-अलग मान्यता मानी गई है। कहा जाता है कि शुरुआत में भगवान शिव का केवल निराकार रूप था। भारतीय ग्रंथों के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर आधी रात को भगवान शिव निराकार से साकार रूप में आए थे। मान्यता के अनुसार भगवान शिव इस दिन अपने विशालकाय स्वरूप अग्निलिंग में प्रकट हुए थे। ऐसी मान्यता हैं की इसी दिन भगवान शिव करोड़ो सूर्यो के समान तेजस्व वाले लिंगरूप में प्रकट हुए थे।
शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि जब देवता और राक्षस अमृत की खोज में समुद्र मंथन कर रहे थे तब मंथन से विष निकला था और स्वयं भगवान शिव ने विष पी कर उसे अपने कंठ में रोक लिया था। जिस वजह से उनका शरीर नीला पड़ गया था और उनको “नीलकंठ” भी कहा जाता है। विष पीकर उन्होंने सृष्टि और देवतागण दोनों को बचा लिया था। उस दिन को महाशिवरात्रि उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
      ऐसा भी वृतांत आता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान् शिव ने देवी पार्वती से विवाह किया था।
      चिरंजीव दास महाराज ने बताया कि शिव पुराण के अनुसार बाबा भोले नाथ को चढ़ाई जानें वालीं हर सामग्रियों का अलग-अलग महत्व है।
जैसे-जल से रुद्राभिषेक करने पर वृष्टि होती है। कुशा जल से अभिषेक करने पर रोग व दु:ख से छुटकारा मिलता है।दही से अभिषेक करने पर पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
 मधुयुक्त जल से अभिषेक करने पर धनवृद्धि होती है।
तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 इत्र मिले जल से अभिषेक करने से रोग नष्ट होते हैं। दूध से अभिषेक करने से पुत्र प्राप्ति होगी। प्रमेह रोग की शांति तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गंगा जल से अभिषेक करने से ज्वर ठीक हो जाता है। दूध-शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है। घी से अभिषेक करने से वंश विस्तार होता है। सरसों के तेल से अभिषेक करने से रोग तथा शत्रुओं का नाश होता है।
       इसके अलावा
शिवलिंग पर कच्चे चावल चढ़ाने से धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
तिल चढ़ाने से समस्त पापों का नाश होता है।शिवलिंग पर जौ चढ़ाने से लंबे समय से चली रही परेशानी दूर होती है।
 शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से सुयोग्य पुत्र की प्राप्ति होती है।
 शिवलिंग पर जल चढ़ाने से परिवार के किसी सदस्य का तेज बुखार कम हो जाने की मान्यता है। शिवलिंग पर दूध में चीनी मिलाकर चढ़ाने से बच्चों का मस्तिष्क तेज होता है।
 शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।
 शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ाने से मनुष्य को भौतिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। शिवलिंग पर शहद अर्पित करना करने से टीबी या मधुमेह की समस्या में राहत मिलती है। शिवलिंग पर गाय के दूध से बना शुद्ध देसी घी चढ़ाने से शारीरिक दुर्बलता से मुक्ति मिलती है।  शिवलिंग पर आक के फूल चढ़ाने से सांसारिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिवलिंग पर शमी के पेड़ के पत्तों को चढ़ाने से सभी तरह के दु:खों से मुक्ति प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर विधायक गोपाल मीणा, पूर्व विधायक जगदीश मीणा, प्रधान रामफूल गुर्जर, जिला पार्षद प्रतिनिधि कल्याण सहाय मीणा,
पंचायत समिति सदस्य तुलसी कमलेश मीणा,पंचायत समिति सदस्य नानगी देवी नारायण लाल मीणा, नायला सरपंच प्रह्लाद सैनी, लालाराम सैनी बूज, बूज सरपंच सीमा करण सिंघल, महाशक्ति जन कल्याण संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा, सुरज्ञान दौराता, सुरज्ञान फागणा, भामाशाह एवं समाजसेवी प्रीतम शर्मा,
पंचायत समिति सदस्य शांति देवी सैनी बूज, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि रामजीलाल सैनी उर्फ भगत चाय वाला बूज, इंद्रगढ़ सरपंच समता रामजीलाल गुर्जर,
खरकड़ा सरपंच सुनीता कुमावत, 
मंडल अध्यक्ष छीतरमल कुमावत,
तरूण पंचोली, विजया शर्मा,  रेवती नंदन गुर्जर,कैलाश प्रजापत, पुष्पा गुर्जर,लक्ष्मी गुर्जर,टीना जाटावत,आसा, काजल, भुवनेश्वरी,सपना जाटावत,देवीका,किरण योगी एवं मुसकान जाटावत ने भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर मंगल कामना की।

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