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कैंसर / कर्क रोग के बड़े कारण : डॉ. लियाकत अली मंसूरी

कैंसर / कर्क रोग के बड़े कारण : डॉ. लियाकत अली मंसूरी

 

बदलते युग में प्राकृतिक हर्बल यूनानी चिकित्सा का प्रयोग करें 


आज के युग में या तो हर कोई अपना मुनाफा देख रहा है या ख़ुद स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो रहा हैं । इस आधुनिक युग में कुछ घरों को छोड़ कर दहलीज पर कैंसर दस्तक दे रहा हैं । आईए आपको बताते हैं कि कैंसर किन किन कारणों से दस्तक दे रहा हैं _

 


(1) पेस्टीसाइड्स __फल सब्जियों में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ सी लगी हुईं हैं जिसमें किसानों के साथ साथ सरकार ज्यादा जिम्मेदार हैं । फलों व सब्जियों में कीटनाशकों की बढ़ोतरी से कैंसर ज्यादा बढ़ने लगा हैं । इसलिए फल सब्जियों को घर लाने के बाद गुनगुने पानी से धोने के बाद ही इस्तेमाल करें । जड़ वाली सब्जियां और बीन्स ज्यादा इस्तेमाल करें । इनमें पेस्टीसाइड्स न्यूनतम होते हैं ।
ज्यादा फल सब्जियों की खपत करने में ज्यादा पेस्टीसाइड्स का प्रयोग किया जा रहा हैं जिससे गले, पेट के कैंसर बढ़ रहें हैं । लाल गोश्त के सेवन से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ रहा हैं ।


(2) विकिरणें __जहां इन्सान प्राकृतिक विकिरणों का भार उठा रहा हैं वहीं वोह चिकित्सीय विकिरणों का भार उठाने के लिए भी मजबूर हैं । प्राकृतिक यूरेनियम से रेडॉन गैस भूमंडल में फेल कर कैंसर को बढ़ा रहा हैं वहीं परमाणु हथियारों के परीक्षण से एवं रेडियो थैरेपी के रूप में एक्सरे , सी टी स्कैन, एमआरआई जैसी जांचों से कैंसर को ख़ूब बढ़त मिल रही हैं । इन्हें अति जरूरत पर करवाएं ।
साथ ही आज के युग में अति आवश्यक मोबाइल के टॉवर और मोबाइल जिससे भयानक किरणों (4 G - 5G ) को अपनी ओर खींच कर कैंसर प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रहा हैं । मोबाइल को अपने शरीर से दूर रखने का प्रयास करें और सोते समय मोबाइल को खुद से दूर रखें ।


(3) मिलावटी दूध __आज का मानव मुनाफेखोर के प्रति अधिक रुझान लेने लगा है कहते हैं ना कि _" पैसा खुदा तो नहीं, मगर खुदा से कम भी नहीं है "। मनुष्य इस कहावत को चरितार्थ करता जा रहा हैं । दूध हॉकर्स ने इंसानियत की सारी हदें पार करके मुनाफे के लिए उसे सामने वाले के स्वास्थ्य से बेमतलब सा बनता जा रहा हैं , उसे तो बस मुनाफा चाहिए । अधिक पैसों के लिए अधिक मिलावटी दूध जिसे कैमिकल से बना कर लोगों के साथ खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है । कृपया मिलावटी दूध के प्रति सजक रहें ।


(4) जंक फूड या फास्ट फूड __जीवन की दौड़ में जल्दी बाज़ी नहीं करें , घर की बनी चीज़ों का इस्तेमाल ही करें । केक, चिप्स, कुरकुरे, पिज़्ज़ा, बर्गर, ये प्रोसेस्ड फूड्स हैं जो फेट और शुगर से भरे होते हैं, इनमें सिलिकन , क्लोरीन और कार्सीनोजेन नाम का पदार्थ बहुत ज्यादा होता हैं जो शरीर में कैंसर पैदा करने में सक्षम हैं । इससे मोटापा , उच्च रक्त चाप, हाईपर कोलेस्ट्रोलेमीया तो बढ़ता ही हैं साथ ही कोलोरेक्टल, श्वास तन्त्र, होंठ, मुंह, जीभ, नाक, गला, वोकल कॉर्ड, प्रोस्टेड, पैंक्रियाज, लीवर और श्वास नली के कैंसर का खतरा भी बढ़ रहा हैं । आहार की वस्तुओं को अधिक व्यवसायिक बनाने में अधिक पेस्टीसाइड्स के प्रयोग करने से स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा हैं ।
ज्यादा कार्बोहाइड्रेड के उपयोग से कैंसर बढ़ने का अवसर मिलता है क्योंकि सफ़ेद आटे में अधिक ग्लाइसेमिक दर पाई जाती हैं साथ ही इसमें शुगर और इन्सुलिन का स्तर ज्यादा पाया जाता हैं । इनसे कैंसर फैलने मे विशेष आधार या सहारा मिलता है क्योंकि कैंसर कोशिकाएं मिठास या शुगर पर ज्यादा फीड / पनपता हैं इसलिये सफ़ेद आटा बन्द कर दीजिए जैसे कि _गेंहू, चावल का आटा । इसकी जगह ज्वार, बाजरा, मक्का , बेसन और जौ का आटा अधिक प्रयोग करें ।


(5) अंग्रेज़ी दवाईयां __आज के दौर में इंसान अंग्रेज़ी दवाईयां का सेवन बहुत ज्यादा कर रहा हैं । या तो यूं कहें कि चलते चलते गोली गटकना आसान है , या आजकल आसानी से मिल जाने वाली निशुल्क दवा वितरण या इसे जानबूझ कर स्वीकार किया जा रहा हैं । इन दवाओं को ज्यादा इस्तेमाल करने से लीवर , गुर्दे खराब तो हो रहें हैं । और इनसे शरीर में हार्मोनल बदलाऊ आने से कहीं बीमारियों को आमंत्रण भी कर ही रहें है साथ में कम उम्र के बच्चें जल्दी यौवनावस्था की और बढ़ रहें हैं। अधिक सेक्स स्टेरॉइड हार्मोन्स देने से महिलाओं में स्तन , एंडोमेट्रियम और अंडाशय में कैंसर की बढ़त दिखाई दे रही हैं । इसी तरह पुरुषों में अधिक टेस्टोस्टेरॉन सेक्स हारमोन देने से प्रोस्टेड कैंसर देखने में आ रहा हैं । इन सबको देखते हुए अंग्रेज़ी दवाओं का प्रयोग लगभग बन्द कर देना चाहिए केवल इन्हें इमरजेंसी में ही उपयोग करें । इसके अलावा आप हर्बल यूनानी चिकित्सा का भरपूर इस्तेमाल करें जिसका कोई साईड इफेक्ट नहीं है।


(6) तम्बाकू से बनी चीजें __कैंसर का सबसे बड़ा एकल कारण हैं । तम्बाकू मे बीड़ी, सिगरेट, गुटखे, लाल दंत मंजन आते हैं । यह प्रवृत्ति पुरुषों के साथ साथ महिलाओं में भी कम नहीं हैं । भारत देश में इसके लिए कोई ठोस कानून नहीं है तम्बाकू मे निकोटीन के कारण कैंसर पैदा करने वाले 300 कार्सिनोजेन पाए जाते हैं । इससे सिर , मुंह और गर्दन के कैंसर ज्यादा होते हैं । तम्बाकू से सबसे ज्यादा मृत्यु होती हैं ।


(7) संक्रमण __हेपेटाइटिस बी और सी, दीर्घ कालिक संक्रमण के कारण होती हैं । इसमें यकृत की गम्भीर क्षति होती हैं जो लीवर सिरोसिस के बाद यह कैंसर मे बदल जाता हैं ।
मानव पैपिलोमा वायरस ( HPV ) ये आमतौर से महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा में कैंसर का खतरा बढ़ाता है । ये कैंसर नहीं है लेकिन इसके संक्रमण के कारण कैंसर हो सकता हैं । हेलिको बैक्टर पायलोरी ( HBV ) यह भी संक्रामक रोग है । इसमे ये लक्षण देखें जाते हैं_ पेट में दर्द, मतली,, पेट में सूजन, अल्सर । इसे टीकाकरण से रोका जा सकता है। ऐसे रोगियों में पेट का कैंसर देखा जा सकता हैं ।


( 8 ) शराब सेवन __शराब की एक बूंद भी सुरक्षित नहीं हैं । इससे मुंह, गले, इसोफैगस, लीवर, वॉइस बॉक्स, कोलो रेक्टल और स्तनों में कैंसर को बढ़ावा मिलता है ।


(9) प्रदूषण __ तम्बाकू, कोयला, बायोमास के अलावा वायु प्रदूषण के कारण भी लोग फेफड़ों के कैंसर के चपेट में आ रहें हैं । वायु प्रदूषण से 4 प्रतिशत कैंसर देखें गए हैं यानि हर दूसरा मरीज़ ऐसा भी है जो धूम्रपान नहीं करता है । लेकिन उसे केंसर है ।


( 10 ) आनुवांशिकता __यदि किसी मरीज़ मे पीढ़ी दर पीढ़ी केंसर चला आ रहा है तो इसकी जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए ताकि उनकी पार्श्वभूमी को समझते हुए ईलाज कर सकें । इस तरह आनुवांशिकता के कारण कैंसर 4 प्रतिशत तक देखा जा रहा हैं । आनुवंशिक केंसर की बी आर सी ए रक्त जॉच के दौरान जानकारी मिल जाती हैं ऐसे में अगली पीढ़ी को कैंसर से कुछ हद तक बचाया जा सकता हैं । इसलिए ऐसे मरीजों को डॉक्टर्स से सलाह लेनी चाहिए ।


(11) भस्में व कुश्ता _ लोग सेक्सुअल ताकत बढ़ाने या अन्य वजह से भस्मों व कुश्ताओं का अधिक प्रयोग कर लेने से हड्डियों के अन्दर अस्थि मज्जा ( bone marrow ) का क्षय होता हैं इसकी वजह से उसके अन्दर केंसर की संभावना बढ़ जाती हैं । इन्हें बिना चिकित्सक की सलाह से सेवन नहीं करें ।

 

डॉ. लियाकत अली मंसूरी
(न्यूरो यूनानी एवं हिजामा विशेषज्ञ )
गवर्नमेंट यूनानी सिटी डिस्पेंसरी
देवली,टोंक ( राजस्थान)
MO 9414326317

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