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फिर बोतल से बाहर आया मानेसर का जिन्न

फिर बोतल से बाहर आया मानेसर का जिन्न

राजस्थान विधानसभा के चुनाव ज्यों ज्यों नज़दीक आते जा रहे है त्यों त्यों प्रदेश की सियासत
नित नए रूप में गरमाती जा रही है। लगता है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किसी भी हालत में
अपने विरोधी सचिन पायलेट को आगे झेलने को तैयार नहीं है। कहते है गहलोत की जादूगरी
अपरम्पार है। गहलोत चाहते है पायलेट जैसे तैसे कांग्रेस छोड़ दे ताकि वे निर्विरोध रूप से प्रदेश
का नेतृत्व करें। यही कारण है की उन्होंने एक बार फिर मानेसर के जिन्न को छेड़ दिया है और
खुलासा किया है की 2020 में मानेसर जाने वाले उनकी पार्टी के विधायकों को अमित शाह,
धर्मेंद्र प्रधान और गजेंद्र सिंह से ली गई करोड़ों की धनराशि लौटानी चाहिए। गहलोत ने आरोप
लगाया है भाजपा नेता तीन राज्यों में सरकार गिरा चुके हैं, मैंने अपने विधायकों से कहा कि
अमित शाह से 10-15 करोड़ लेने वाले हमारे विधायक पैसा वापस लौटाएं। अगर मिले पैसों में
दो करोड़ रुपये खर्च भी कर दिए हों, तो मैं AICC से दिलवा दूंगा। गहलोत का यह सीधा हमला
सचिन पायलेट पर था जो आजकल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लगातार गहलोत को घेरते रहे है।
कांग्रेस के विधायकों ने 2020 में सचिन पायलट की अगुवाई में गहलोत सरकार के खिलाफ
बगावत की थी। उस दौरान स्थिति कुछ ऐसी बन गई थी कि लग रहा था गहलोत की सरकार
किस भी वक्त गिर सकती है। हालांकि बाद में प्रियंका गाँधी वाड्रा और अहमद पटेल के
हस्तक्षेप के बाद राज्य में चल रहे राजनीतिक गतिरोध को दूर कर लिया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दावे ने सियासी
तूफ़ान ला दिया है। गहलोत ने दावा किया है कि जब उनकी सरकार पर संकट आया था, तब
वसुंधरा राजे ने संकटमोचक की भूमिका निभाई थी। आरोप प्रत्यारोपों के बीच इस दावे को
वसुंधरा राजे ने खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश बताया और कहा गहलोत 2023 में
होने वाली हार से भयभीत होकर झूठ बोल रहे हैं। राजे ने कहा, रिश्वत लेना और देना दोनों
अपराध हैं, यदि उनके विधायकों ने पैसा लिया तो एफआईआर दर्ज करवाएं। भाजपा के प्रदेश
अध्यक्ष सीपी जोशी ने भी अशोक गहलोत के खिलाफ हमला बोला है। उन्होंने कहा- 'राजस्थान
सरकार पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। सरकार के मंत्री, विधायकों पर भ्रष्टाचार के गंभीर
आरोप हैं। इन आरोपों से बचने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए गहलोत फिजूल की
बयानबाजी कर रहे हैं। कुर्सी की लड़ाई चल रही है और मुख्यमंत्री अपने आप को बचाने का
प्रयास कर रहे हैं।

सियासी उठापटक के बीच मंत्रियों और विधायकों ने चौक चौराहों पर अपनी नाराजगी के तीखे
तेवरों से कांग्रेस सियासत को हिलाकर रख दिया है। जैसे जैसे विधानसभा चुनावों की तिथि
नज़दीक आती जा रही है वैसे वैसे राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस में घमासान थमने के बजाय
बढ़ता ही जा रहा है। हालाँकि विधान सभा चुनावों में अभी छह सात माह शेष है मगर हायतौबा
अभी से मच गई है। दूसरी तरह मुख्यमंत्री गहलोत अपनी सरकार की ओर से लगाए गए
महंगाई राहत शिविरों से मिल रही रिस्पांस से खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। गहलोत का दावा
है उनकी जन कल्याणकारी नीतियों और कार्यक्रमों की बदौलत अगले चुनाव में सरकार को
रिपीट होने से कोई नहीं रोक पायेगा। राजस्थान की कांग्रेस सरकार अगले विधानसभा चुनाव में
रिपीट होगी या नहीं इस पर कांग्रेसी नेताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है। परस्पर दावे प्रतिदावे
किये जा रहे है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट में खींचतान चल रही है। 2018 में जब कांग्रेस की
सत्ता में वापसी हुई थी तो उस वक्त कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट थे। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि
गांधी परिवार मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्हें सौपेगा। लेकिन उस वक्त आलाकमान ने अशोक गहलोत की
वरिष्ठता और अनुभव को ध्यान में रखकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था। जबकि सचिन पायलट को उप
मुख्यमंत्री बनाया था। लेकिन दो साल के अंदर ही साल 2020 में सचिन पायलट ने बगावती तेवर दिखाने
लगे थे। उसके बाद गांधी परिवार के दखल के बाद मामला शांत हुआ था। लेकिन इस खींचतान में सचिन
पायलट को उप मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। पायलट ने एक बार फिर जंग छेड़ दी है। अब वो आरपार
की लड़ाई के मूढ़ में है। सियासी खींचतान के बीच सचिन पायलट कह चुके हैं कि वह कांग्रेस के सिपाही है।
कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पायलट कांग्रेस में रहकर ही गहलोत पर हमला
करते रहेंगे।

-बाल मुकुन्द ओझा

 

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