जयपुर के त्रिपोलिया बाजार में भीषण आग, 20+ दुकानें चपेट में
जयपुर। शहर के परकोटा इलाके के व्यस्त त्रिपोलिया बाजार में गुरुवार सुबह भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। मणिहारों का कटला स्थित सेठी कॉम्प्लेक्स में करीब 7 बजे शुरू हुई आग देखते ही देखते आसपास की 20 से ज्यादा दुकानों और गोदामों तक पहुंच गई। कपड़ों, प्लास्टिक के सामान और चूड़ियों का स्टॉक होने के कारण आग तेजी से फैलती गई।
आग लगने की सूचना मिलते ही माणक चौक थाने की पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। अलग-अलग फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं। रिपोर्टों के मुताबिक बाद में करीब 25 से 30 दमकल गाड़ियां आग बुझाने के अभियान में लगीं।
शुरुआती जानकारी में आग दूसरी मंजिल पर कपड़ों की दुकान के बाहर कार्टन में रखे सामान से शुरू होने की बात सामने आई है। वहीं पुलिस की प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग की संभावित वजह बताया गया है। हालांकि, आग लगने की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सेठी कॉम्प्लेक्स में कई दुकानों और गोदामों में कपड़े, प्लास्टिक और चूड़ियों समेत ज्वलनशील सामान रखा हुआ था। इसके अलावा बाजार की तंग गलियों ने दमकलकर्मियों के लिए चुनौती बढ़ा दी। आग से निकलने वाला घना धुआं दूर तक दिखाई दिया और आसपास के इलाके में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
आग के दौरान एहतियात के तौर पर इलाके की बिजली आपूर्ति बंद की गई। बड़ी संख्या में व्यापारी और स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। कई दुकानदारों ने अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की।
हादसे के बाद फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ रिपोर्टों में परिसर में लगे अग्निशमन उपकरणों के काम नहीं करने की बात कही गई है। माणक चौक थाना अधिकारी राकेश ख्यालिया के मुताबिक, आग के कारणों की प्रारंभिक जांच की जा रही है और संबंधित दुकानों के फायर एनओसी की भी जांच की जाएगी।
स्थानीय व्यापारियों ने परिसर में कथित तौर पर चल रहे रेस्टोरेंट और निर्माण गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। व्यापारियों के आरोपों के मुताबिक, ऊपरी हिस्से में रेस्टोरेंट से जुड़ा निर्माण कराया जा रहा था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
घटना को लेकर किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने नगर निगम और फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल उठाए। वहीं हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने भी फायर एनओसी और पुराने निर्माण से जुड़े मामलों की जांच की मांग की। दोनों नेताओं के बयान उनके राजनीतिक दावे और आरोप हैं, जिन पर संबंधित प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी।