Dark Mode
RCDF में एमडी की कुर्सी खाली, शक्तियों के इस्तेमाल पर उठे सवाल

RCDF में एमडी की कुर्सी खाली, शक्तियों के इस्तेमाल पर उठे सवाल

1 सितंबर से एमडी का पद रिक्त, वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों को लेकर बढ़ी हलचल; आचार संहिता के बीच अतिरिक्त जिम्मेदारियों और आदेशों ने खड़े किए सवाल


जयपुर। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) में इन दिनों प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। फेडरेशन में 1 सितंबर से प्रबंध निदेशक (MD) का पद रिक्त चल रहा है। इसी बीच एमडी की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर गतिविधियां बढ़ने से फेडरेशन के भीतर इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास तौर पर आचार संहिता लागू होने के दौरान हुए प्रशासनिक फेरबदल ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। जानकारी के अनुसार हाल ही में फेडरेशन में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए वित्तीय सलाहकार को उनके मौजूदा पद के कार्यों के साथ महाप्रबंधक (कार्मिक एवं प्रशासन) अनुभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। बताया जा रहा है कि यह आदेश प्रमुख शासन सचिव, गोपालन विभाग एवं प्रशासक की मंजूरी के बाद जारी हुआ। आदेश महाप्रबंधक (विपणन) की ओर से जारी किए जाने की बात सामने आ रही है।

एमडी के अधिकारों को लेकर उठ रहा सवाल
फेडरेशन से जुड़े जानकारों का कहना है कि एमडी का पद रिक्त होने की स्थिति में उनकी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर नियमों की स्पष्टता महत्वपूर्ण हो जाती है। जानकारों के अनुसार फेडरेशन के बायलॉज में बिना औपचारिक रूप से चार्ज दिए ‘Delegation of Powers’ के जरिए एमडी के अधिकारों के इस्तेमाल का प्रावधान नहीं होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि एमडी की अनुपस्थिति में किन अधिकारियों को कौन-कौन से वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हैं और इन अधिकारों का इस्तेमाल किस आधार पर किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित नियमों, बायलॉज और जारी आदेशों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

आदेश जारी करने वाले अधिकारी पर ही आरोप, जांच भी चर्चा में
मामले में एक और पहलू महाप्रबंधक (विपणन) की भूमिका को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार महाप्रबंधक (विपणन) पर पूर्व में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच वित्तीय सलाहकार के स्तर पर लंबित होने की बात भी सामने आ रही है।यदि एक ही अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच किसी ऐसे अधिकारी के पास लंबित हो, जिसे उसी प्रशासनिक व्यवस्था में अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, तो हितों के टकराव यानी Conflict of Interest को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि आरोपों की वास्तविक स्थिति और जांच की वर्तमान स्थिति संबंधित दस्तावेजों एवं आधिकारिक रिकॉर्ड से ही पुष्ट हो सकती है।

किसके पास हैं एमडी की शक्तियां?
RCDF के जानकारों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि एमडी की अनुपस्थिति में उनकी शक्तियों का इस्तेमाल किस प्रावधान के तहत किया जा रहा है। जानकारों का दावा है कि प्रमुख शासन सचिव के पास भी स्वत: एमडी की शक्तियां आने का प्रावधान नहीं है और प्रशासक की भूमिका मुख्य रूप से बोर्ड के निर्णयों से संबंधित बताई जाती है। ऐसे में यदि एमडी का पद रिक्त है तो प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णयों के लिए सक्षम प्राधिकारी कौन है, यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण हो जाता है। फेडरेशन की स्वायत्त प्रकृति को देखते हुए भी अधिकारों के इस्तेमाल की वैधानिक और प्रक्रियात्मक स्थिति को लेकर पारदर्शिता जरूरी मानी जा रही है।

आचार संहिता के बीच दो लेखा सलाहकारों की नियुक्ति की चर्चा
इसी बीच आचार संहिता के दौरान फेडरेशन में दो लेखा सलाहकारों की नियुक्ति को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। खास बात यह बताई जा रही है कि इन दोनों सलाहकारों को पूर्व एमडी द्वारा भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के चलते पहले हटाया जा चुका था। हालांकि इन आरोपों और पूर्व में की गई कार्रवाई की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। RCDF में एक के बाद एक सामने आ रही इन प्रशासनिक गतिविधियों के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एमडी के रिक्त पद की स्थिति में वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल का स्पष्ट आधार क्या है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अतिरिक्त जिम्मेदारियां देने, आदेश जारी करने और नई नियुक्तियों के संबंध में कौन से नियम और सक्षम प्राधिकारी लागू होते हैं। इन सभी मामलों में संबंधित आदेशों, बायलॉज और जांच रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

Comment / Reply From

You May Also Like

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!