मच्छरों के काटने से हर साल लाखों लोगों की होती है मौत
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में साल 2022 में मलेरिया के 25 करोड़ से ज्यादा
मामले सामने आए थे, जिनमें 7 लाख लोगों की इस बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। मलेरिया से हर 51
सेकंड में जा रही एक की जान। अंतर्राष्ट्रीय दिवसों की श्रृंखला में एक दिवस मच्छर दिवस के नाम से भी
जाना जाता है। इस दिवस के नाम से लोग चौंकते है मगर बिहारी सतसई का यह दोहा, देखन में छोटन लगे
घाव करे गंभीर मच्छर दिवस पर सटीक बैठता है। मच्छर के डंक से जो लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित
हुए है वे इससे भलीभांति परिचित है। वैसे मच्छर के नाम से बच्चे से बुजुर्ग तक हर आदमी जानता है
क्योंकि इसके शिकार एक घर में नहीं अपितु घर घर में मिल जायेंगे। विश्व मच्छर दिवस प्रतिवर्ष 20
अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस चिकित्सक सर रोनाल्ड रॉस की स्मृति में मनाया जाता है। सर
रोनाल्ड ने वर्ष 1897 में यह खोज की थी कि ‘मनुष्य में मलेरिया के संचरण के लिए मादा मच्छर उत्तरदायी
है। यह दिवस जन साधारण को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। यह दिन लोगों को मच्छरों से होने
वाली बीमारियों और उनसे कैसे बचा जाए के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।
यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर की 40 प्रतिशत तक की जनसंख्या उन क्षेत्रों में रहती है, जहां
मलेरिया होने का खतरा सबसे अधिक है। मानसून का मौसम मच्छरों को पैदा करने के मौसम के रूप में
जाना जाता है। इस वजह से मानसून के मौसम में हर साल मच्छर से होने वाली बीमारियों के सबसे अधिक
मामले सामने आते हैं। यह मानसून का मौसम है। इन दिनों मच्छर बहुत अधिक मात्रा में पनपते है।
मानसून के दिनों में हर साल मच्छरों के प्रकोप के कारण बड़ी संख्या में लोग डेंगू, मलेरिया और
चिकनगुनिया का शिकार बनते हैं। मच्छर के काटने से होने वाली अलग-अलग बीमारियों से हर साल लाखों
लोगों की जान चली जाती है। बरसात के दिनों में जगह-जगह पानी भर जाने और तापमान में गिरावट होने
से हर तरफ मच्छर पनपने लगते हैं। अन्य बीमारी ने किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाया उससे कहीं
अधिक एक छोटे से मच्छर ने पहुंचाया है। एक छोटा सा मच्छर एक बार में व्यक्ति का 0.1 मिलीमीटर तक
खून चूस लेता है। इससे निपटने के कई अभियानों को चलाए जाने के बाद भी हर साल सैकड़ों नहीं बल्कि
हजारों मलेरिया और डेंगू के केस सामने आते रहते हैं सरकार के मच्छरों से निपटने के तमाम अभियानों के
बाद भी मच्छरजनित बीमारियों के मामले हर साल सामने आ रहे हैं। इन्हें हम साधारण समझते है मगर है
ये स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक। विभिन्न बीमारियों के जनक है मच्छर जिनसे जान भी जा सकती
है।
मादा एनोफेलीज कूलिसिफासीस मलेरिया का प्रमुख रोग वाहक है, जो कि आमतौर पर मनुष्यों के साथ-
साथ मवेशियों को भी काटता है। एनोफेलीज (मलेरिया की रोगवाहक) वर्षा जल और इकट्ठा हुए जल
(पोखर), गड्ढे, कम जल युक्त नदी, सिंचाई माध्यम (चौनल), रिसाव, धान के खेत, कुंए, तालाब के किनारे,
रेतीले किनारे के साथ धीमी धाराओं में प्रजनन करती है। एनोफेलीज मच्छर सबसे ज्यादा शाम और सुबह
के बीच काटता है। मादा एडीज एजिप्ट मनुष्य में डेंगू, चिकनगुनिया, जीका और पीला बुखार संचारित
करती है। मादा एडीज सबसे अधिक दिन के समय काटती है तथा काटने का चरम समय संध्या से पहले
शाम या सुबह के दौरान होता है। एडीज एजिप्ट मच्छर किसी भी प्रकार के मानव निर्मित कंटेनरों या पानी
की थोड़ी सी मात्रा से युक्त भंडारण करने वाले कंटेनरों में प्रजनन करती है। एडीज एजिप्ट के अंडे एक वर्ष से
अधिक समय तक बिना पानी के जीवित रह सकते हैं। एडीज एजिप्ट सामान्यत चार सौ मीटर की औसत
पर उड़ती है, लेकिन यह एक स्थान से दूसरे स्थान तक मनुष्य के माध्यम से अकस्मात स्थानांतरित होती
है। मादा मच्छरों के लिए केवल रक्त आहार और जानवरों को काटने की आवश्यकता होती है, जबकि पुरुष
मच्छर काटते नहीं है, लेकिन वे फूलों के मकरंद या अन्य उपयुक्त शर्करा स्रोत को खाते हैं।
मच्छरों से होने वाली बीमारियों से अपना और अपने परिवार का बचाव करना है तो अपने आस-पास न सिर्फ
अपने घर बल्कि पूरे इलाके में साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें। घर में या घर के बाहर जलभराव न होने दें
और अगर घर के आस-पास खुली नालियां हैं तो उन्हें तत्काल रूप से बंद करा दें। जागरूकता से ही हम
मच्छरों से अपना बचाव कर सकते है।