ब्रिक्स समिट में मोदी-सिसी की मुलाकात, दोनों देशों के रिश्तों पर हुई बात
नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हुई। बैठक में भारत और मिस्र के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
राष्ट्रपति अल-सिसी शुक्रवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे थे। रविवार को सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह में शामिल हुए नेताओं का स्वागत किया। इसके बाद विभिन्न नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत का सिलसिला भी जारी रहा।
दिन की शुरुआत ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ सामूहिक 'फैमिली फोटो' से हुई। इस दौरान आउटरीच के लिए आमंत्रित प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी मौजूद रहे। इससे पहले शनिवार शाम प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में आयोजित डिनर में भी राष्ट्रपति अल-सिसी सहित कई देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
भारत और मिस्र के बीच राजनयिक संबंध लंबे समय से कायम हैं। दोनों देशों ने 18 अगस्त 1947 को राजदूत स्तर पर राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। इसके बाद से दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्क लगातार मजबूत हुए हैं।
मिस्र जनवरी 2024 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना था। उसके साथ इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी उस समय समूह के पूर्ण सदस्य बने थे। वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई शामिल हैं।
वहीं ब्रिक्स के सहयोगी देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। समूह के विस्तार से ब्रिक्स की वैश्विक पहुंच और प्रतिनिधित्व पहले की तुलना में व्यापक हुआ है।
सम्मेलन के दौरान 11 ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं ने सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को मंजूरी दी। इसमें भारत की अध्यक्षता और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच एवं ब्रिक्स प्लस डायलॉग सत्र के आयोजन की सराहना की गई।
घोषणापत्र में कहा गया कि भारत की अध्यक्षता ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत करने के लिए नई गति प्रदान की है। ब्रिक्स नेताओं ने आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन, समावेशिता और आम सहमति की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता की थीम 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' रखी गई है। यह प्रधानमंत्री मोदी के 'मानवता सर्वोपरि' दृष्टिकोण से जुड़े जन-केंद्रित विचार को भी दर्शाती है।