नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने 'सैंधव'से किया तेलुगु डेब्यू
मकर संक्रांति के अवसर पर साउथ की चार फिल्में रिलीज हो रही हैं। उनमें से एक फिल्म 'सैंधव' है, जो 13 जनवरी को रिलीज हुई। 'सैंधव' फिल्म से नवाजुद्दीन सिद्दीकी तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू कर रहे हैं। उन्होंने अपना डायलॉग खुद डब किया है। 99 दिनों के शूटिंग शेड्यूल में नवाजुद्दीन ने 25 से 30 दिन शूट किया है। फिल्म मेकिंग के बारे में खास बातचीत में राइटर-डायरेक्टर शैलेश कोलानु बताते हैं-
'सैंधव' का क्या मतलब होता है?
महाभारत में कौरव पक्ष का एक बड़ा शक्तिशाली वॉरियर सैंधव था। उसे वरदान मिला था कि वो एक दिन के लिए पांडवों को रोक सकता है। उसने चक्रव्यूह के समय एक दिन के लिए पांडवों को रोका था। महाभारत में ये निगेटिव कैरेक्टर है। अब तेलुगु में प्रचलित है कि जब कोई अच्छा कर रहा होता है, उस दौरान कोई बीच में पड़ता है, तब उसे कहते हैं कि सैंधव की तरह बीच में बार-बार क्यों आ रहा है। महाभारत में सैंधव अच्छाई को रोकता है, लेकिन 'सैंधव' फिल्म में हीरो पावरफुल है। वो बुराई को रोकता है। इसे ध्यान में रखते हुए मुझे लगा कि 'सैंधव' टाइटल अच्छा रहेगा।
'सैंधव' की क्या कहानी है?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक ऐसी बीमारी है, जो इंडिया में काफी बड़ी प्रॉब्लम है। साल में लगभग तीन-चार हजार बच्चों को ये बीमारी हो रही है। इस बीमारी में एक इंजेक्शन लगाया जाता है, जिसकी कीमत 17 करोड़ रुपए है। आजकल बहुत सारे सोशल कैंपेन चलाए जाते हैं। इस मेडिसिन को USA से इंपोर्ट करते हैं। इस मूवी की कहानी एक फादर की है, जो अपनी बेटी को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी बीमारी से बचाना चाहता है। एक पिता अपनी बेटी के इलाज के लिए 17 करोड़ हासिल करने के लिए किस हद तक जाता है, उसकी इस राह में विलेन कैसे रोड़ा बनते हैं, यही फिल्म की कहानी है।
फिल्म में नार्थ-साउथ की बड़ी स्टार कास्ट है
कहानी की जर्नी में दिखाया गया है कि हीरो वेंकटेश दग्गुबाती से कैसे विलेन नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मुकेश ऋषि, जिशु सेनगुप्ता आदि टकराते हैं। इन सबको हीरो कैसे रोकता है- यही कहानी का मेन प्लॉट है। फिल्म में तीन हीरोइन- श्रद्धा श्रीनाथ, रूहानी शर्मा, एंड्रिया जेरेमिया हैं, जो महत्वपूर्ण रोल प्ले कर रही हैं। सुपरस्टार आर्य कैमियो रोल प्ले कर रहे हैं। इस तरह साउथ और नॉर्थ को मिलाकर बड़ी स्टार कास्ट है। फिल्म में हर एक्टर के अपने-अपने कैरेक्टर का बहुत महत्व है। हम लोगों ने मूवी में अच्छा पॉइंट डिस्कस किया है कि 17 करोड़ के इंजेक्शन के लिए हमारे देश में क्या प्रॉब्लम है। इसका क्या समाधान हो सकता है। इस फिल्म के जरिए हम ये मैसेज ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।
फिल्म में नवाज ने तेलुगु में अपनी आवाज खुद डब की है
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने तेलुगु में अपनी आवाज खुद डब की है। उन्होंने पूरी डबिंग मात्र तीन दिन में कम्प्लीट की। ये डबिंग मुंबई में स्थिति अंधेरी के एक स्टूडियो में हुई। फिल्म की शूटिंग काकीनाडा, हैदराबाद, वाइजैग, श्रीलंका आदि जगहों पर हुई थी। इन जगहों पर कुल 99 दिनों तक शूटिंग की गई। इसमें नवाज का 25 से 30 दिनों का काम था। इसके अलावा उन्होंने तीन दिन डबिंग के लिए दिए थे। श्रीलंका में लगभग एक महीने शूटिंग की गई। वाइजैग और काकीनाडा मिलाकर 20 दिन शूट हुआ। हैदराबाद में भी 20 दिन शूट किया गया बाकी जगहों पर चार-चार दिनों तक शूट किया गया।