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निम्बाहेड़ा : मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में महर्षि दधीचि जन्मोत्सव मनाया

निम्बाहेड़ा : मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में महर्षि दधीचि जन्मोत्सव मनाया

निम्बाहेड़ा। भारतीय सनातन धर्म पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि दधीचि जयंती भाद्रपद शुक्ल पक्ष अष्टमी के रोज मनाई जाती है इस बार यह रविवार 31 अगस्त 2025 को मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में मनाई गई। कार्यक्रम संयोजक एवं आयोजक कन्हैया लाल भट्ट राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त एवं पूर्वका राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल, भारतवर्षीय दाहिमा दाधीच ब्राह्मण महासभा ने कार्यक्रम में पधारे हुए सभी का स्वागत अभिनंदन करते हुए बताया कि ऑस्ट्रेलिया में सभी इंग्लिश बोलते हैं पर हमें अपनी संस्कृति एवं संस्कार को भूलना नहीं चाहिए जहां तक हो सके आपस में हम अपनी भाषा में ही बात करें एवं महर्षि दधीचि के बारे में प्रकाश डाला । उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार ऋषि मुनियों की दानशीलता की कई कथाएं प्रचलित है । इसमें महर्षि दधीचि की कथा प्रमुख है। महर्षि दधीचि भगवान शिव के परम भक्त थे । ऋषि दधीचि की कथा अनुसार ब्रह्मदेव ने व्रतासूर को मारने के लिए वज्र बनाने के लिए देवराज इंद्र को तपोबली महर्षि दधीचि के पास उनकी हड्डियां मांगने के लिए भेजा था । उन्होंने महर्षि दधीचि से तीनों लोको के कल्याण हेतु वजन बनाने के लिए उनकी अस्थियां दान में मांगी। महर्षि दधीचि ने संसार के कल्याण के लिए अपना शरीर दान कर दिया। महर्षि दधीचि की हड्डियों से वज्र बना और वृत्तासुर मारा गया इस तरह से महान ऋषि के अतुलनीय त्याग से देवराज इंद्र बचे और तीनों लोक सुखी हो गए। कार्यक्रम में महर्षि दधीचि के जीवन का पूरा वृतांत बताया साथ ही कन्हैयालाल भट्ट ने सभी विदेश में रहने वाले भारतीययों अपने समाज जनों को अपने बच्चों में भारतीय संस्कृति के बारे में और ऋषि मुनियों के बारे में बताया जाना चाहिए। जिससे उनके आदर्शों पर चलकर महान बन सके। और कहा कि हमें दाधीच होने पर गर्व है की भारत का सर्वाच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र दिया जाता है उसके अंदर अशोक चक्र के चारों ओर महर्षि दधीचि के वज्र का लोगो बना हुआ है यह हमारे दाधीच समाज लिए बहुत बड़ी बात है । कार्यक्रम के प्रारंभ महर्षि दधीचि का हवन पूजन किया गया, महिलाओं एवं बच्चियों के द्वारा गीत संगीत एवं नृत्य का बहुत ही मनमोहक आयोजन किया गया, तत्पश्चात सभी ने मिलकर महर्षि दधीचि की आरती की गई उसके बाद सभी ने भोजन प्रसादी ग्रहण की। कार्यक्रम में महिलाओं के द्वारा मंगल पाठ का आयोजन किया गया जो सभी ने सराहा। कार्यक्रम में हीरालाल शर्मा, अरुण व्यास, आशुतोष भट्ट ,अनंत शर्मा, नितिन व नीरज एवं विक्रम व मुकुल शर्मा एवं रवि शर्मा ने ओजस्वी भाषण में महर्षि दधीचि के जीवन के बारे में बताया । महिलाओं में मंजू भट्ट, सुगना शर्मा, रिचा शर्मा, निमिषा शर्मा, प्रियंका व्यास, अंकित त्रिपाठी, श्रीलेखा, कमलेश शर्मा एवं नेहा शर्मा ने अपने विचार रखें। साथ ही आशुतोष भट्ट अनंत शर्मा रवि शर्मा ने कहां की अब हर साल जयंती और बहुत बड़े स्तर मनाए जाने का प्रयास करेंगे जिससे ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए अपनी संस्कृति के बारे में आने वाली पीढ़ियां जान सके महापुरुषों भारत के ऋषियों के बारे में जान सके हमें अपने आप पर गर्व होगा कि हमने अपनी भारतीय संस्कृति एवं संस्कार का विदेश में बहुत अच्छी तरीके से पालन कर रहे हैं हमारे बच्चे आने वाली पीढ़ी उनके बारे में जान सके इसके साथ ही पार्थ शर्मा एवं अदिति शर्मा ने अपने शुभकामना संदेश हमें ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए भी अपनी संस्कृति पर गर्व है एवं इस कार्यक्रम के माध्यम से आने वाली पीढ़ी में संस्कार एवं दानशीलता के गुन को समझ करके अपने जीवन में उतर सकेंगे यह भेज कर सफलता की कामना की। दधीचि जयंती उत्सव कार्यक्रम का संचालन रवि शर्मा एवं अनंत शर्मा ने किया कार्यक्रम में पधारे हुए सभी का आभार प्रदर्शन आशुतोष भट्ट एवं रिचा शर्मा ने किया। साथ ही इस अवसर पर सभी ने यह संकल्प लिया कि हम विदेश में रहते हुए सभी आपस में एक दूसरे के भाई है। दुख सुख के साथी हैं। और निस्वार्थ भाव से एक दूसरे की सेवा त्याग दानशीलता एवं समर्पण की भावना रखते हुए प्रतिवर्ष महर्षि दधीचि जयंती बहुत ही हर्षाल्लास से मनाएंगे।

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