मोटे अनाज की खेती पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
फतेहपुर शेखावाटी, (रोशन जमीर)। कृषि विज्ञान केंद्र और मिलेट्स विकास निदेशालय जयपुर भारत सरकार के सयुंक्त तत्वधान में मंगलवार को मोटे अनाज की खेती व् मूल्य संवर्धन विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे जिलेभर से 40 किसानों ने भाग लिया। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ आर के दुलड़ ने बताया कि मिलेट्स पोषणीय आधार पर अन्य खाद्यान्नों की अपेक्षा में बेहतर माने जाते हैं। इनके उपयोग से कुपोषण मोटापा डायबिटीज, मधुमेह आदि से बचाव में सहायता प्राप्त होती है। डॉ दुलड़ ने कहा कि बाजरा उत्पादन में राजस्थान का देश में प्रथम स्थान है। भारत में बाजरा के क्षेत्रफल में राजस्थान की 57 एवं उत्पादन में 42 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में पहले भोजन मिलेट्स आधारित था, लेकिन हरित क्रांति के दौर में गेहूं और चावल पर जोर दिया गया, उस समय इसकी जरूरत थी ताकि लोगों को भरपेट भोजन मिल सके। बाजरा और ज्वार की खेती के प्रोहत्सान,उत्पादन में वृद्धि, घरेलू खपत को बढ़ावा देने एवं मूल्य संवर्धन के लिए मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन की शुरुआत की गई। भारत सरकार के मिलेट्स विकास निदेशालय, जयपुर से पधारे प्रो ओम प्रकाश खेदड़ ने भारत सरकार द्वारा मिलेट्स उत्पादन, मूल्य संवर्धन और उपभोग को प्रोत्साहन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ लालाराम ने बाजरे कि उन्नत खेती के बारे में और डॉ जीतेन्द्र कुमार ने बाजरे की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट व बीमारियों के प्रभावी नियंत्रण के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में डॉ लालाराम ने मिलेट्स विकास निदेशालय, जयपुर द्वारा क्षेत्र के किसानों के लिए मोटे अनाज पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने हेतु धन्यवाद दिया गया।