मोदी अंधविरोध में चक्करघिन्नी हो रहे विपक्षी नेता
लगता है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ताच्युत करने की
सुपारी ले ली है। मोदी भी पलटवार करते हुए यह कहने से नहीं चूक रहे है की कुछ लोगों ने
मेरी छवि खराब करने के लिए सुपारी दी हुई है। नीतीश देशभर में मोदी के खिलाफ वातावरण
बनाने के लिए चक्करघिन्नी हो रहे है। अब उनका ध्यान बिहार के विकास की तरफ कम और
मोदी की खिलाफत की और ज्यादा है। कल तक भाजपा और मोदी के साथ गलबहियां का रिश्ता
रखने वाले नीतीश का मोदी के खिलाफ अंधविरोध राजनीतिक समीक्षकों की समझ से बाहर है।
नीतीश विपक्ष के उन सभी मुख्यमंत्रियों और नेताओं से मिल रहे है जो एक दूसरे के खिलाफ है
मगर मोदी के विरोध में अपना राजपाट लुटाने को तैयार है। वो हर समय लालू के बेटे तेजस्वी
को साये की तरह अपने साथ रख रहे है जो बिहार के डिप्टी सीएम का पद सुशोभित कर रहे है।
नीतीश अपनी ताकत बढ़ने के हर तौर तरीकों को आज़मा रहे है वो चाहे जायज हो या
नाजायज। नीतीश एक डीएम की हत्या के दोषी बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह को जेल से
रिहा करवा कर बिहार में अपनी ताकत बढ़ाने में लगे है। उधर लालू यादव चाहते है नीतीश को
पीएम का सर्वसम्मत उम्मीदवार बनाकर अपने बेटे तेजस्वी के लिए बिहार के गद्दी सुरक्षित की
जाए। बताया जाता है राहुल गाँधी मोदी हटाने के लिए बंगाल, यूपी, दिल्ली, पंजाब सहित कुछ
प्रदेशों में कांग्रेस की बलि देने को तैयार हो गए है। ममता, अखिलेश और केसीआर जैसे नेता
चाहते है मोदी को हटाने के लिए कांग्रेस को उनके प्रदेशों से पीछे हटना पड़ेगा तभी व्यापक
एकता का मार्ग प्रशस्त होगा। दूसरी तरफ शरद पवार ने अडानी और मोदी विरोध के कुछ
मुद्दों पर अपनी असहमति जता कर विपक्षी एकता के मार्ग में कांटे बो दिए है । यह तो आने
वाला समय ही बता पायेगा की मोदी के अंधविरोध की यह सियासत सफल होती है या नहीं।
कांग्रेसी नेता राहुल गाँधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल, बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी,
यूपी सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव, तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर का मोदी के प्रति अंधविरोध
तो समझ में आने वाला है क्योंकि इनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ मोदी की एजेंसियां
भ्रष्टाचार की जाँच कर रही है। कई नेता जेल के सींकचों में बंद है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री
उद्धव ठाकरे के हाथ से मोदी ने सत्ता छीन ली इसलिए उनका विरोध भी समझ में आने वाला
है। इस कड़ी में एक नया नाम सतपाल मलिक का जुड़ गया है जो मोदी को हटाने के लिए
खुलेआम जुटे है।
बहरहाल नीतीश ने लालू यादव से हाथ मिलाने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में अपने कदम बढ़ा
दिए है। नीतीश ने दिल्ली, कोलकत्ता और लखनऊ आदि स्थानों के दौरे कर राहुल गाँधी सहित
कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, ममता , अखिलेश
,वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, डी राजा, आप सांसद संजय सिंह और सुधींद्र कुलकर्णी सरीखे
नेताओं से मुलाकात कर विपक्षी एकता को धार देने की अपनी चर्चित मुहिम तेज कर दी है।
नीतीश ने घोषणा की है 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पराजित करने के लिए विपक्ष
की सभी पार्टियों को एक झंडे के नीचे लाया जायेगा। इसके लिए सभी संभव प्रयास शुरू कर
दिए है। One Against One के फार्मूले पर बहुत जल्द ही मुहर लगाने वाले हैं। दूसरी और
एनसीपी नेता शरद पवार ने भी कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात कर विपक्षी एकता पर बल दिया है।
इसी बीच यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मोदी के खिलाफ मोर्चा
बनाने पर जोर देते हुए कांग्रेस से क्षेत्रीय पार्टियों को समर्थन देने को कहा है। राजनीतिक
समीक्षकों का कहना है हालांकि लोकसभा चुनाव अभी दूर है मगर भाजपा के खिलाफ विपक्षी
एकता की खिचड़ी फिर पकने लगी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी एकता की धुरी
बने है। नीतीश ने 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। 2019 में
लोकसभा चुनाव में हार से हताश विपक्ष को नीतीश कुमार साधने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।
आरजेडी जहां नीतीश को पीएम मैटेरियल बता रही है वहीं, पीएम कैंडिडेट की रेस से नीतीश खुद
को अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
-बाल मुकुन्द ओझा