विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन
टोंक (हुक्मनामा समाचार)। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश डॉ. रूबीना परवीन अंसारी ने बताया कि मंगलवार को विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन ग्राम पंचायत बमोर व मेहन्दवास में किया गया। विधिक जागरूकता शिविर में पैनल अधिवक्ता राजेश सिसोदिया ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक वर्ष 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस विभिन्न मुद्दों यथा बहिष्कार, बेरोजग़ारी, गरीबी को कम करने हेतु प्रेरित करने व सामाजिक एकता को बढ़ावा देने हेतु मानाया जाता है। सामाजिक न्याय का अर्थ भी यह है कि लिंग, आयु, धर्म व संस्कृति की भावना से ऊपर उठकर एक समान समाज की स्थापना करना है। उन्होने स्पष्ट किया कि रोटी, कपड़ा, मकान, सुरक्षा, चिकित्सा, अशिक्षा, गरीबी, तिरस्कार एवं बेकारी व बरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों से मुक्ति पाने के प्रयासों को बढ़ावा देने की ज़रूरत को पहचानने के लिये प्रत्येक वर्ष सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है। पीएलवी चन्द्रकला शर्मा ने श्रमिकों को बताया कि श्रमिक समाज की एक बहुमूल्य कड़ी है जिनकी उपेक्षा से व्यक्ति के जीवन से जुड़े बहुत से महत्वपूर्ण कार्य संपन्न नहीं हो सकतें है, किन्तु समाज की इस कडी पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता इसलिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहने चाहिए ताकि श्रमिकों को उनके अधिकारों एवं मिलनें वाले लाभों से अवगत करवाया जा सके एवं वह अपने अधिकारों का उपभोग करते हुए एक सशक्त एवं सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। असंगठित क्षेत्रों के श्रमिक, खनन क्षेत्रों में रोजगार जनित बीमारियों जैसे सिलीकोसिस, एसबेस्टोसिस, टी.बी. आदि से पीडि़त श्रमिकों के ईलाज के लिए रिहेब द्वारा श्रमिकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है, ताकि वह अपनी बीमारियों का उपचार करवा सके। श्रमिकों को श्रम विभाग द्वारा जारी किये जाने वाले श्रमिक कार्ड के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई, ताकि वह अपने जीवन को राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राजस्थान सरकार की मंशानुसार सुदृढ़ एवं समृद्ध बना सकें।