प्रतिभागियों को पारम्परिक कलाओं का दिया जाएगा प्रशिक्षण
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ध्रुवपद, कथक, पेंटिंग, बांसुरी और कैलीग्राफी जैसी पारम्परिक कलाएं शामिल
- पहली बार प्राचीन आराईश (फ्रेस्को) एवं जयपुर ब्लू पॉटरी भी सिखाई जाएगी
सिटी पैलेस में कल होगा सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ
जयपुर। सिटी पैलेस जयपुर में कल, गुरूवार से सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ होने जा रहा है। शिविर का उद्घाटन सिटी पैलेस परिसर में दोपहर 12.30 बजे से होगा। एक माह तक चलने वाले इस शिविर में प्रतिभागियों को ध्रुवपद, कथक, पेंटिंग, बांसुरी और कैलीग्राफी जैसी पारम्परिक कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त पहली बार प्राचीन आराईश (फ्रेस्को) एवं जयपुर ब्लू पॉटरी का प्रशिक्षण भी शुरू किया जा रहा है। यह शिविर महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय, 'रंगरीत' संस्था एवं सरस्वती कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहा है।
संग्रहालय के अध्यक्ष, महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने बताया कि युवाओं और नवांकुरों को हमारी विशाल और समृद्ध पारम्परिक कलाओं की बारिकियों से रू-ब-रू कराने के उद्देश्य से यह सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर आयोजित हो रहा है। शिविर में गत 25 वर्षों से विभिन्न कलाओं को सिखाया जा रहा है। इस बार विद्यार्थियों का परिचय कराने हेतु प्राचीन आराईश (फ्रेस्को) एवं जयपुर ब्लू पॉटरी कलाओं को पहली बार शुरू किया जा रहा है।
इस शिविर में चित्रकार श्री रामू रामदेव, श्री हेमंत रामदेव, श्री बाबूलाल मारोटिया और श्री बद्रीनारायण मारोटिया द्वारा 'पारम्परिक चित्रकला' का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं 'ध्रुवपद' डॉ. मधुभट्ट तैलंग; 'कथक एवं लोकनृत्य' डॉ. ज्योति भारती गोस्वामी; 'बांसुरी' श्री आर.डी. गौड़; व कैलीग्राफी का श्री अशोक वर्धन के निर्देशन में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी प्रकार, डॉ. नाथूलाल वर्मा 'आराईश (फ्रेस्को)' और श्री गोपाल सैनी 'जयपुर ब्लू पॉटरी' का प्रशिक्षण देंगे।