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तन मन को ताकत देती है शारीरिक गतिविधियां

तन मन को ताकत देती है शारीरिक गतिविधियां

-बाल मुकुन्द ओझा
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने की कोशिशें एक बार फिर परवान पर है। विभिन्न शोध रिपोर्टों में साफतौर पर इंगित किया गया है कि आजकल की भागदौड़ भरी और व्यस्त लाइफस्टाइल ने बच्चे से बुजुर्ग तक को समय से पूर्व ही शारीरिक रूप से अपंग करके रख दिया है। यदि हम चेतावनियों के बावजूद नहीं सुधरे तो स्वस्थ जीवन जीना भूलना होगा। आजकल लोग विशेषकर युवा कई-कई घंटे एक ही जगह पर बैठकर काम करते हुए बिता देते हैं, जिसका असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। कोरोना के बाद वर्क फ्रॉम होम का प्रचलन बढ़ गया है। ऐसे में एक ही स्थान पर बैठकर काम करने से जहाँ शरीर में जड़ता आती है वहीं मानसिक बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। शारीरिक गतिविधियां फिट और हेल्दी रहने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना फिजिकल एक्टिविटी के लिए समय निकालें और अपनी सेहत का ख्याल रखें। फिजिकल एक्टिविटी, जैसे कि एक्सरसाइज, योग और वॉक न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि हमारे मानसिक और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। जब आप शारीरिक रूप से एक्टिव रहते हैं, तो शरीर की ऊर्जा बढ़ती है। जिसे "हैप्पी हार्मोन" भी कहा जाता है। यह हार्मोन हमें खुश और संतुष्ट महसूस कराता है, जिससे तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।
देश में 54 प्रतिशत लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने में कोई रुचि नहीं है और 10 फीसदी से कम लोग मनोरंजन के तौर पर शारीरिक गतिविधियां करते हैं। आईसीएमआर डेटा में इस बात का खुलासा हुआ है। आजकल आर्थराइटिस जैसी जोड़ों की बीमारियां उम्र तक सीमित नहीं रह गई हैं बल्कि शारीरिक रूप से काम न करना भी इस बीमारी के बोझ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों बताते हैं कि 54.4 फीसदी लोगों की शारीरिक गतिविधियां करने में रुचि नहीं है। इस सरकारी एजेंसी द्वारा की गई स्टडी के अनुसार लोग यात्रा और मनोरंजन से जुड़ी शारीरिक गतिविधियों के मुकाबले काम में ज्यादा समय बिताते हैं। आलसी जीवनशैली, कसरत न करना या प्रोफेशनल की देखरेख के बिना कसरत करने से युवाओं के जोड़ों के लिगामेंट में दिक्कतें होने लगती हैं। चिकित्सकों का कहना है फिजिकली एक्टिव रहना, न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है बल्कि हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। नियमित फिजिकल एक्टिविटी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, तनाव को कम करने और जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होती है।
तेज चलना, बागवानी या भारोत्तोलन आपका वजन कम करने के अलावा आपको खुश भी रख सकते हैं। शोध में इसका खुलासा हुआ है कि आपकी शारीरिक गतिविधियों की निरंतरता और उन्हें करने की क्षमता आपकी खुशी के स्तर को बढ़ाती है।
जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है तो हमारे शरीर के काम करने की क्षमता धीमी हो जाती है। हमारे शरीर की हड्डियां के दोबारा बनने और रिपेयर होने की क्षमता कम होने लगती है। हमारे घुटनों के जोड़ में मुलायम टिश्यू मौजूद होते है, जिसे कार्टिलेज कहते है। यह मांसपेशियों को सहारा देते हैं और इससे गतिविधियां करने में आसानी होती है। यह एक तरह से शॉक आब्जॉर्बर का काम करते हैं। समय के साथ यह मुलायम टिश्यू घिसने लगते हैं, जिससे जोड़ों में जगह बनने लगती है और इससे जांघ और शिनबोन में घिसाव होने लगता है।
बदलती जीवनशैली के चलते दफ्तर में घंटों बैठे रहकर काम करने और फिर घर में निष्क्रिय जीवन जीने से हमारे शरीर में जंग लगने लगा है और हम बीमारियों का आसान शिकार बनते जा रहे हैं। यह स्थिति तब और भी ज्यादा बिगड़ जाती है जब उम्र 25 पार करती है। 40 की उम्र में आते-आते ज्यादातर लोग आजकल बेहद अनफिट हो जाते हैं। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल लेवल के बढ़ने, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल के नॉर्मल न रह पाने, हड्डियों के भुरभुरा होने, मसल्स में तकलीफ होने, तनाव, डिप्रेशन, मोटापा आदि जैसी समस्याएं घर करने लगती हैं। डिप्रेशन तनाव, चिंता और उदासी का बहुत बड़ा कारण बनता है, जो जल्द ही आपके जीवन पर असर करना शुरू कर देता है। इससे पहले की यह गंभीर रूप धारण कर लें डिप्रेशन निपटने के उपाय करने चाहिए। अवसाद से निपटने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक तरीका शारीरिक गतिविधि है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर 5 में से 1 वयस्क और 5 में से 4 किशोर शारीरिक गतिविधियां नहीं करते, जिससे हेल्थ केयर पर 54 अरब डॉलर का सीधा असर पड़ रहा है।

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