लालकिले से उभरी विकसित भारत की तस्वीर
आजादी के शुभदिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन में विकसित भारत की तस्वीर प्रस्तुत की। प्रधानमंत्री के उद्बोधन का विरोधी दल भले ही कटु आलोचना करें। लेकिन एक आम भारतीय की नजर से देखें तो उसे प्रधानमंत्री के भाषण में एक विकसित भारत साफ तौर पर दिखाई देता है। और इसकी ठोस वजह है प्रधानमंत्री मोदी के पिछले नौ साल की उपलब्धियां और उनकी कार्यप्रणाली। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नये, विकसित और सशक्त भारत के निर्माण में दिन-रात जुटे हुए हैं। ऐसे में आम भारतवासी उनके शब्दों और वायदों पर पूरा भरोसा करता है।
77वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने दो महत्त्वपूर्ण लक्ष्य तय किए और उनकी घोषणा की। एक, आजादी के 100 साल बाद 2047 में भारत ‘विकसित राष्ट्र’ होगा। दूसरा, आगामी 5 साल में जो फैसले लिए जाएंगे और काम किए जाएंगे, उनका असर 1000 साल तक रहेगा। लक्ष्यों के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने देश की जनता से मदद मांगी और आशीर्वाद चाहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से विकास का रोडमैप भी बताया और ये भी कि अर्थव्यवस्था का तेज विकास किस तरह होगा। उन्होंने ने किसान से लेकर गरीब तक, महिलाओं से लेकर मणिपुर हिंसा तक, समय से पहले नए संसद भवन के निर्माण का भी उल्लेख किया और कहा कि ये नया भारत है। ये संकल्पों से भरा भारत है। पीएम मोदी ने कहा कि आर्थिक शक्ति बढ़ी है तो हमारी सामरिक शक्ति को भी नई ताकत मिली है।
उन्होंने सेना को युद्ध योग्य बनाने के लिए निरंतर रिफॉर्म का उल्लेख किया और बम धमाके की घटनाओं का जिक्र भी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सीरियल बम धमाके का जमाना बीती बात हो गई है। आतंकी घटनाओं में कमी आई है, परिवर्तन का वातावरण बना है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत बनाने का सपना लेकर चलने की बात कही और ये भी कहा कि हमें राष्ट्रीय चरित्र के लिए और बल देते हुए आगे बढ़ना होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत एक निर्णायक मोड़ पर है और इसमें कोविड महामारी के बाद उभर रही नयी विश्व व्यवस्था को आकार देने की ताकत है। उन्होंने देशवासियों को अगले पांच वर्षों में उज्ज्वल भविष्य के साथ ‘नए भारत’ का आश्वासन भी दिया। उन्होंने बताया कि कोविड के बाद देश और दुनिया में काफी बदलाव देखने को मिले हैं।
प्रधानमंत्री के संबोधनों में राजनीतिक संदेश भी छिपे रहते हैं। हो सकता है कि इस बार के संबोधन में आगामी लोकसभा चुनाव की दिशा में कोई संकेत छिपा हो। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पंच प्रण’ की घोषणा की थी। उन्होंने देशवासयिों से 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने, आपसी मानसिकता के किसी भी संकेत को समाप्त करने, भारत की धरोहर पर गर्व करने, एकता की शक्ति को मजबूत करने और ईमानदारी के साथ नागरिक कर्तव्यों को पूरा करने की अपील की थी।
2014 में लाल किले की प्राचीर से पहले स्वतंत्रता दिवस के भाषण में उन्होंने स्वच्छ भारत और जन धन खातों जैसे कई नए कार्यक्रमों की घोषणा की। 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले, 2018 में मोदी ने गरीबों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत शुरू की थी। स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधनों में, उन्होंने 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद की स्थापना, 2021 में आजादी का अमृत महोत्सव मनाने जैसे महत्वपूर्ण ऐलान किए। गति शक्ति योजना और 75 वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत की घोषणा भी लाल किले से हुई।
प्रधानमंत्री के उद्बोधन के संबंध में उद्योग जगत के अहम लोगों को मानना है कि, भारत को तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने का प्रधानमंत्री का संकल्प अगले पांच वर्षों में आसानी से साकार हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जिन उपलब्धियों और लक्ष्यों का उल्लेख किया, उसने वास्तव में अमृत काल में अग्रणी वैश्विक महाशक्ति के रूप में भारत के उदय के लिए सही पृष्ठभूमि तैयार की है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारत ने निश्चित रूप से समानता के साथ स्वच्छ ऊर्जा, वैश्विक शांति और समृद्धि जैसे कई परिवर्तनकारी क्षेत्रों में दुनिया का नेतृत्व करने की पहल की है।
पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार, परिवार-आधारित पार्टियों और तुष्टीकरण को भारत की राजनीतिक व्यवस्था, शासन और विकास को प्रभावित करने वाली तीन बुराइयां बताईं। उन्होंने भ्रष्टाचार जैसा मजबूत और वैध मुद्दा उठाया। यह असल में ऐसा कैंसर है जिसने हमारे राजनीतिक प्रतिष्ठान को खोखला किया है और शासन व्यवस्था को कमजोर किया है। हमारी तरक्की को भी प्रभावित किया है। यह भी सच है कि केंद्र सरकार में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार कम हुआ है। इसका श्रेय मोदी को जाता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि भ्रष्टाचार व्यवस्था की जड़ों में मट्ठे का काम करता है और मजबूत से मजबूत इमारत को भी हिलाकर रख देता है। ऐसे में जब भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी तो देश के विकास को पंख लगना तय है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पिछले नौ सालों में कई उपलब्धियां भी हासिल की हैं। सभी भारतीयों को इन उपलब्धियों पर गर्व महसूस करना चाहिए चंद्रयान, भारत में डिजिटल क्रांति, भारत की एनर्जी बास्केट में अक्षय ऊर्जा का तेजी से विस्तार, भारत के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, बैंकिंग क्षेत्र को समावेशी बनाना, जमीनी स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व में विकास, महामारी के दौरान टीकाकरण अभियान, वगैरह. इसमें कोई शक नहीं है कि इसका श्रेय मोदी सरकार को ही जाता है। तस्वीर साफ है कि जीवन के हर क्षेत्र में देष तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने लालकिले से घोषणा की है कि वह 2 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति’ बनाएंगे और ग्रामीण स्व सहायता समूहों को ताकतवर बनाएंगे। यह तो किसी भी विकसित राष्ट्र की बुनियाद है, जिसे अभी बनाने की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री ने ‘विश्वकर्मा योजना’ की भी घोषणा की है। जो शिल्पकार, मिस्त्री, स्वर्णकार आदि हाथ और औजार से काम करते हैं, उनकी मदद इस योजना के तहत की जाएगी।
बेशक 2047 का लक्ष्य भी ‘सपनीला’ लगता है, क्योंकि विश्व बैंक ने भारत को फिलहाल ‘निम्न मध्यम आय’ वाली श्रेणी में रखा है, क्योंकि हमारी प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय वैश्विक स्तर पर बहुत कम है। ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के मायने ये हैं कि प्रत्येक व्यक्ति, नागरिक को ‘आर्थिक अवसर’ जरूर मिलने चाहिए। यकीनन हमारी 30 साल की उम्र से कम वाली आबादी विश्व में सर्वाधिक है। वह हमारी ताकत भी है। वह ताकत ‘विकसित अर्थव्यवस्था’ तब पैदा कर सकती है, जब बेरोजगारी के मुद्दे को गंभीरता से संबोधित किया जाए। भारत में बेरोजगारी एक चिंतित सरोकार है और इसकी राष्ट्रीय दर करीब 8 फीसदी है। रोजगार के मोर्चे पर और गंभीरता से काम करने की जरूरत लंबे समय से महसूस होती है।
विपक्ष की आलोचना और निंदा के बावजूद प्रधानमंत्री का लाल किले से बोला गया एक-एक शब्द करोड़ों देशवासियों के भीतर एक नयी ऊर्जा, उमंग और तरंग का संचार करता है। और अगर देशवासी विकास की दिशा में सरकार का सहयोग दें और सही दिशा में कदम बढ़ा दें तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना संभव है। और देश के वर्तमान वातावरण से ऐसा आभास होता है कि देश ने आगे बढ़ने का संकल्प मन ही मन ले लिया है और देशवासी उस दिशा में पूरी मजबूती से आगे बढ़ चुके हैं।