पिड़ावा : जैन धर्म में पयुर्षण पर्व का तीसरा धर्म उत्तम आर्जव मनाया
पिड़ावा। सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वाधान में पर्वाधिराज पयुर्षण पर्व 28 अगस्त से 6 सितम्बर तक चलने वाले दशलक्षण महापर्व में तिसरे दिन पिड़ावा के सभी जिनालयों में व श्री भक्तामर विश्व धाम ड़ोला कोटड़ी ग्राम में श्रावक श्राविकाये द्वारा भक्ति भाव, संयम के साथ मनाया जा रहा है। समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि इस अवसर पर सभी मन्दिरों में भक्तो की भीड़ लगी हुई है। प्रातः काल से ही भक्त गण मन्दिर के दर्शन अभिषेक, शान्ति धारा,पूजन कर रहे हैं। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन जुना मन्दिर में आर्यिका चिन्मय मति माताजी ससंघ के सानिध्य में धार्मिक गतिविधियां चल रही है। तथा श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर में परम पूज्य उपाध्याय 108 श्री विकसंत सागर महाराज जी ससंघ के सानिध्य में अभिषेक,शान्ति धारा, देशना दीदी के कूशल नेतृत्व में संगीत मय नित्य नियम पूजन, सोलाह कारण पूजन, पंचमेरूजी की पूजन, दश लक्षण धर्म की पूजन, सौधर्म इन्द्र द्वारा विधान की पूजन संगीत मय संगीत कार अभिनन्दन प्रेमी के द्वारा भक्ति भाव के साथ प्रतिदिन करवाई जा रही है। महाराज जी ने भी दशलक्षण धर्म का तीसरा उपवास करते हुवे प्रवचन, तीनों समय स्वाध्याय करा रहे हैं। मुनि राज ने अपने प्रवचन में उत्तम आर्जव धर्म के बारे में बताया कि आत्मा का स्वभाव ही सरल स्वभाव है इसलिए प्रत्येक प्राणी को सरल स्वभाव रखना चाहिए। यह आत्मा अपने सरल स्वभाव से च्युत होकर पर स्वभाव में रमते हुवे कुटिलता से युक्त ऐसे नरक,तिर्यच, मनुष्य और देव इन चारों गतियों में भ्रमण करते हुवे टेढेंपन को प्राप्त हुआ है। बालिकाओं का शिविर भी देशना दींदी के मार्ग दर्शन में चल रहा है। शिविर में चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष बबलू चौधरी की टीम के द्वारा सभी को प्रतिदिन भोजन भी करवाया जा रहा है। शाम को महाराज जी के सानिध्य में गुरू भक्ति प्रशन मंच कार्यक्रम आयोजित किया गया।रात्रि में भगवान की आरती, प्रवचन के बाद देशना दींदी द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम ब्रम्हानंद सागर पाठशाला के बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया गया।