पायलट 11 जून को नई पार्टी लॉन्च करेंगे, नाम तय
JAIPUR . कांग्रेस के बागी नेता सचिन पायलट पार्टी में पूरी तरह से दरकिनार हो गए हैं आलाकमान उनकी किसी बात पर सुनवाई के मूड में नहीं है इसीलिए वह नई पार्टी का ऐलान करने वाले हैं राजस्थान प्रगतिशील कांग्रेस के नाम से बनने वाली इस पार्टी का ऐलान राजेश पायलट की 11 जून को बरसी पर एक भव्य रैली में होगा। पायलट की नई पार्टी चार पार्टियों के गठबंधन के साथ दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में ताल ठोकेगी।
2018 में विधानसभा चुनाव होने के साथ ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच ठन गई थी संख्या बल के कारण आलाकमान को गहलोत को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा लेकिन पायलट इसको बर्दाश्त नहीं कर पाए डिप्टी सीएम सहित महत्वपूर्ण विभाग होने के बावजूद भी पायलट हमेशा सरकार पर हमलावर रहे। बाद में वे 19 विधायकों के साथ बगावत करके मानेसर चले गए 1 माह से अधिक समय तक नाटक बाजी के बाद वे लौटे। गत वर्ष सितंबर में आलाकमान ने उनको मुख्यमंत्री बनाने की चेष्टा की थी इससे पहले गहलोत का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय हो गया था पर आलाकमान की योजना का खुलासा होते ही 92 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे पेश कर दिए। तब से अब तक गहलोत और पायलट खेमे में तनातनी का खेल जारी है पायलट और उनके समर्थक विधायक सरकार के मौके बे मौके हमला बोलते रहते हैं। दोनों खेमों के बीच पिछले 2 माह से प्रदेश में आर पार की लड़ाई चल रही थी। अपनी ही सरकार के खिलाफ पायलट ने अनशन किया और विभिन्न जगह सरकार विरोधी बातें कही।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा, आम आदमी पार्टी में जाने के लिए उन्होंने वहां कई दौर की बातचीत की। तीसरा गठबंधन खड़ा करने के लिए जयंत चौधरी, चंद्रशेखर ओबीसी और हनुमान बेनीवाल से भी मिले । 5 दिन पूर्व भाजपा नेता किरोड़ी लाल मीणा से भी उन्होंने बातचीत करके उन्हें अपने साथ आने का न्योता दिया कहा की बेनीवाल पायलट और मीणा में मीणा सीनियर रहेंगे तथा मिलकर 60 सीटें आसानी से हासिल कर ली जाएगी और समर्थन लेकर सरकार बना ली जाएगी , इन तमाम घटनाक्रम के बाद उनके मंसूबे साफ हो गए थे कि वह नई पार्टी बनाएंगे। माना जा रहा है कि अब पायलट नई पार्टी की घोषणा के साथ ही उसकी कार्यकारिणी जिलाध्यक्ष जिला कार्यकारिणी का भी ऐलान कर देंगे जिसका पूरा होमवर्क उन्होंने और उनकी टीम ने कर रखा है। दूसरी और पायलट का यह प्रयास है कि नई पार्टी के गठन से पहले कांग्रेस में इतना हमला सरकार और आलाकमान पर बोला जाए कि विवश होकर वह पार्टी से निकाल दें तब शहीद की मुद्रा में नई पार्टी का ऐलान कर सहानुभूति और समर्थन हासिल किया जा सके।