भजनों से रिझाया भोले को
गुप्तेश्वर गुफा मैदान में आयोजित हुई भजन संध्या।
भजनों पर झूमे श्रोता। सजावट से अमावस की काली रात भी हुई दूधिया।
बौंली . उपखंड मुख्यालय की अरावली पर्वत श्रृंखला के मध्य स्थित गुप्तेश्वर गुफा मंदिर पर आयोजित दो दिवसीय वार्षिक शिवरात्रि महोत्सव का रविवार रात आयोजित भजन संध्या के साथ समापन हो गया। गुप्तेश्वर सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित भजन संध्या में बाहर से आए ख्याति प्राप्त गायकों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दे सोमवार अलसुबह तक श्रद्धालु श्रोताओं को बांधे रखा। प्राप्त जानकारी के अनुसार रात 9:00 बजे के बाद शुरू हुई भजन संध्या का दौर सोमवार अल सुबह आरती के साथ हुआ। इस बीच आगंतुक भजन गायक कोमल शर्मा, गौत्तम शर्मा, नवीन शर्मा सहित कई गायकों ने विविध तर्जों पर सभी देवी-देवताओं को समर्पित भजनों की प्रस्तुति दे भोले को रिझा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई भजनों की प्रस्तुति पर श्रोता भी पांडाल में झूम उठे जिनका श्रद्धालु व समिति सदस्यों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस मौके पर पहली बार क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए समिति के द्वारा सांस्कृतिक प्रतियोगिता का आयोजन भी भजन संध्या में रखा गया जिसमें कई प्रतिभाओं ने अपनी गायकी व नृत्य की प्रस्तुति से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतिभाओं की हौंसला अफजाई के लिए समिति द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। भजन संध्या कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों के द्वारा मंच पर सजे दरबार में दीप प्रज्वलन के साथ हुई। समारोह में बतौर अतिथि बामनवास विधायक इंदिरा मीणा, नगरपालिका अध्यक्ष कमलेश जोशी, सेवानिवृत्त आर ए एस अधिकारी केदारलाल मीना सहित कई जन प्रतिनिधि, भामाशाह व समाजसेवी मंचस्थ थे। इस मौके पर समिति की हौंसला अफजाई के लिए कई भामाशाहों ने आर्थिक सहयोग देने की घोषणाएं की । समिति सदस्यों ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत सत्कार किया। भजन संध्या समारोह का संचालन समिति संरक्षक दशरथ राज शर्मा द्वारा किया गया। समिति अध्यक्ष पंकज जोशी ने सभी का आभार जताया। गौरतलब है कि क्षेत्र में मिनी अमरनाथ के नाम से प्रसिद्ध गुप्तेश्वर महादेव मंदिर पर समिति के द्वारा प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर दो दिवसीय वार्षिक महोत्सव आयोजित किया जाता है जिसमें झंडारोहण से भजन संध्या तक कई कार्यक्रम संपन्न होते है। इस मौके पर समिति द्वारा नीचे मैदान से लेकर पहाड़ी मध्य गुफा मंदिर तक की गई आकर्षक साज सज्जा से अमावस की काली रात में भी पूरा परिसर दूधिया रोशनी से जगमगा उठा।