नवरात्रि पर PM मोदी ने की स्कंदमाता की स्तुति, साझा किया मंत्र
नई दिल्ली: नवरात्रि के पांचवें दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मां स्कंदमाता को नमन करते हुए संस्कृत का एक विशेष श्लोक साझा किया। गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए इस श्लोक के जरिए उन्होंने देवी के शक्ति स्वरूप की स्तुति की। नवरात्रि के इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं।
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया श्लोक है, ‘या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।’ इसका भावार्थ है कि जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, उन्हें बार-बार प्रणाम है।
दुर्गा सप्तशती से जुड़ा है मंत्र
यह संस्कृत श्लोक दुर्गा सप्तशती, जिसे देवी महात्म्य भी कहा जाता है, के देवी स्तुति प्रसंग से जुड़ा है। इसमें देवी को सृष्टि के प्रत्येक प्राणी में ऊर्जा, सामर्थ्य और शक्ति के रूप में विद्यमान बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवताओं ने देवी के विभिन्न स्वरूपों और उनकी दिव्य शक्तियों का स्मरण करते हुए उनकी वंदना की थी।
इस स्तुति का संदेश देवी की शक्ति को केवल एक स्वरूप तक सीमित न मानकर समस्त सृष्टि में विद्यमान ऊर्जा के रूप में देखने से जुड़ा है। नवरात्रि के दौरान इस तरह के मंत्रों का पाठ भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
कौन हैं मां स्कंदमाता?
नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की आराधना की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है। उनकी माता होने के कारण देवी को स्कंदमाता कहा जाता है।
मां स्कंदमाता को सामान्यतः सिंह पर विराजमान दिखाया जाता है। उनकी चार भुजाएं मानी जाती हैं और गोद में बालरूप भगवान स्कंद विराजमान रहते हैं। देवी के दो हाथों में कमल के फूल होते हैं, जबकि अन्य हाथ वरमुद्रा या अभयमुद्रा में दर्शाए जाते हैं। कमल पर विराजमान होने के कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
पूजा में पीले रंग और केले के भोग का महत्व
धार्मिक परंपराओं में मां स्कंदमाता को पीला रंग प्रिय माना जाता है। इस दिन भक्त पूजा के दौरान पीले फूल अर्पित करते हैं और केले का भोग लगाते हैं। श्रद्धालु मां की आराधना कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता की उपासना से भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में उनकी आराधना को विशुद्ध चक्र से भी जोड़ा जाता है।
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का संदेश मातृत्व, करुणा और शक्ति के प्रति श्रद्धा से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से साझा किए गए संस्कृत श्लोक में भी देवी के इसी व्यापक शक्ति स्वरूप को नमन किया गया है।