PM मोदी का संदेश : मातृभूमि की सेवा सबसे बड़ा धर्म
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर संस्कृत का एक सुभाषित साझा करते हुए देशवासियों को मातृभूमि की सेवा का संदेश दिया। उन्होंने श्लोक के माध्यम से पृथ्वी की समृद्धि, स्थिरता और उसके प्रति जिम्मेदारी की भावना को सामने रखा।
प्रधानमंत्री ने लिखा, "विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥"
इसका भावार्थ बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पृथ्वी माता श्रेष्ठ वनस्पतियों और औषधियों से समृद्ध हो तथा सदैव स्थिर और विस्तृत बनी रहे। विद्या, शौर्य, सत्य और स्नेह जैसे सद्गुणों से पोषित, कल्याणकारी और सुख-साधन उपलब्ध कराने वाली मातृभूमि की मनुष्य को निरंतर सेवा करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री के इस संदेश में राष्ट्र के प्रति कर्तव्य और सेवा भावना पर जोर दिखाई दिया। उन्होंने इससे पहले भी अपने सोशल मीडिया संदेशों के जरिए आत्मविकास, निरंतर प्रयास, ज्ञान और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को प्रमुखता दी है।
बुधवार को पीएम मोदी ने आत्मिक विकास को सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ते हुए संस्कृत का एक अन्य श्लोक साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर ऐसी भावना पैदा करता है, जिससे युवा देश को विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।
बुधवार को साझा किए गए श्लोक "आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती। तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते।" का भावार्थ था कि स्वयं का उत्थान करते हुए निरंतर आगे बढ़ना जीवन की महत्वपूर्ण नीति है। इसी लक्ष्य के आधार पर गुणी और विद्वान लोग अपने ज्ञान, कौशल और प्रभाव को बढ़ाते हैं तथा समाज के लिए सकारात्मक योगदान देते हैं।
इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी प्रधानमंत्री ने निरंतर प्रयास और साधना के जरिए प्रतिभा को निखारने का संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि देश के युवा इन गुणों को अपनाकर दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
इसके साथ पीएम ने "न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति॥" श्लोक साझा किया था। इसका अर्थ है कि संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ नहीं है। कर्मयोग और साधना के जरिए जिसका अंतःकरण शुद्ध हो जाता है, वह समय आने पर उस परम ज्ञान का अनुभव स्वयं अपने भीतर करता है।
लगातार साझा किए जा रहे इन सुभाषितों के जरिए प्रधानमंत्री मोदी सेवा, आत्मविकास, ज्ञान, साधना और राष्ट्र निर्माण जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दे रहे हैं। गुरुवार के संदेश में उन्होंने विशेष रूप से मातृभूमि के प्रति सेवा और जिम्मेदारी की भावना को केंद्र में रखा।