पीएम विश्वकर्मा योजना से कारीगरों को नई राह, राजस्थान चौथे स्थान पर
-
पीएम विश्वकर्मा योजना : राजस्थान में 2.30 लाख से अधिक कारीगर पंजीकृत, प्रदेश देश में चौथे स्थान पर।
-
कारीगरों को टूलकिट सहायता : 2.17 लाख से अधिक ई-वाउचर जारी, आधुनिक औजार खरीदने में मिलेगी मदद।
-
पीएम विश्वकर्मा योजना ऋण : राजस्थान में 62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत, कारोबार बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान।
जयपुर। पारंपरिक हुनर को आज के बाजार की जरूरतों से जोड़ने के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। बढ़ई, राजमिस्त्री, लोहार, दर्जी, कुम्हार और सुनार जैसे पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों के लिए यह योजना अपने काम को बेहतर बनाने और स्वरोजगार को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।
राजस्थान में इस योजना के तहत 2.30 लाख से अधिक कारीगर पंजीकृत हो चुके हैं। पंजीकरण के मामले में प्रदेश देशभर में चौथे स्थान पर है। योजना से जुड़ी जानकारी के अनुसार, राजस्थान में 2,22,473 लाभार्थियों का बुनियादी प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। इसके अलावा, 2,17,084 टूलकिट ई-वाउचर जारी किए गए हैं और 62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। ये आंकड़े योजना के तहत प्रदेश में पंजीकरण, कौशल विकास और वित्तीय सहायता की स्थिति को दर्शाते हैं।
हुनर को मिलेगा आधुनिक तकनीक का साथ
पारंपरिक कारीगरों के पास काम का अनुभव और व्यावहारिक कौशल होता है, लेकिन सीमित पूंजी और पुराने उपकरण कई बार उनके कारोबार की प्रगति में बाधा बनते हैं। बदलती तकनीक और ग्राहकों की जरूरतों के बीच अपने काम को बेहतर बनाने के लिए नए औजारों और प्रशिक्षण की जरूरत भी बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित पीएम विश्वकर्मा योजना इसी जरूरत को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में भी पात्र कारीगरों को योजना से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों को मजबूत करना और कारीगरों को अपने कौशल के आधार पर आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
बढ़ई और राजमिस्त्री श्रेणी में भी बड़ी भागीदारी
राजस्थान में योजना के तहत विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगर पंजीकृत हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बढ़ई श्रेणी में 45,958 और राजमिस्त्री श्रेणी में 38,450 कारीगरों का पंजीकरण हुआ है।
इन व्यवसायों में आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल काम की गुणवत्ता तथा उत्पादकता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। योजना के माध्यम से पात्र कारीगरों को प्रशिक्षण और सहायता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे अपने काम को बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित कर सकें।
प्रशिक्षण से काम की गुणवत्ता सुधारने का अवसर
पीएम विश्वकर्मा योजना में बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। राजस्थान में 2,22,473 लाभार्थियों का बुनियादी प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को अपने पेशे से जुड़ी तकनीकों, उपकरणों के बेहतर इस्तेमाल और काम की गुणवत्ता सुधारने संबंधी जानकारी दी जाती है।
आज ग्राहकों की पसंद और बाजार की मांग लगातार बदल रही है। ऐसे में पारंपरिक अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक की समझ भी जरूरी हो गई है। प्रशिक्षण से कारीगर अपने काम को अधिक व्यवस्थित बनाने और समय की जरूरत के अनुसार नई कार्य पद्धतियां अपनाने में सक्षम हो सकते हैं।
आईआईएम मुंबई के समवर्ती मूल्यांकन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 93 प्रतिशत लाभार्थियों ने प्रशिक्षण के बाद अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की बात कही। यह आंकड़ा सर्वेक्षण में शामिल लोगों से संबंधित है, इसलिए इसे योजना के सभी लाभार्थियों पर समान रूप से लागू नहीं माना जाना चाहिए।
15 हजार रुपये तक की टूलकिट सहायता
कारीगरों को बेहतर औजार उपलब्ध कराने के लिए योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को टूलकिट खरीदने के लिए 15 हजार रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। राजस्थान में 2,17,084 टूलकिट ई-वाउचर जारी किए जा चुके हैं।
आधुनिक औजार मिलने से कारीगरों को अपने काम में सटीकता बढ़ाने, समय बचाने और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने में मदद मिल सकती है। लकड़ी का काम करने वाले बढ़ई से लेकर निर्माण कार्य में जुटे राजमिस्त्री और अन्य पारंपरिक पेशेवरों तक, उपकरणों की उपलब्धता उनके रोजमर्रा के काम में उपयोगी साबित हो सकती है।
हालांकि, इस सहायता का पूरा लाभ तभी मिल पाएगा, जब कारीगर अपने व्यवसाय की जरूरत के अनुसार उपकरणों का इस्तेमाल कर सकें और तैयार उत्पादों या सेवाओं के लिए उन्हें पर्याप्त ग्राहक मिलें।
62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत, कारोबार बढ़ाने में मदद
छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत होती है। कच्चा माल खरीदने, औजार जुटाने और काम का दायरा बढ़ाने के लिए आर्थिक संसाधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पीएम विश्वकर्मा योजना में पात्र लाभार्थियों को रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
योजना के तहत पात्र कारीगर अधिकतम 3 लाख रुपये तक का ऋण प्राप्त कर सकते हैं। राजस्थान में अब तक 62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं। ऋण की उपलब्धता संबंधित पात्रता और निर्धारित शर्तों पर निर्भर करती है।
प्रशिक्षण, टूलकिट और ऋण जैसी सुविधाओं को एक साथ उपलब्ध कराने का उद्देश्य कारीगरों को अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायता देना है। इससे उन्हें स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने और अपने काम को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने का मौका मिल सकता है।
देश में 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य समय से पहले पूरा
पीएम विश्वकर्मा योजना का विस्तार राष्ट्रीय स्तर पर भी हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने वर्ष 2028 तक 30 लाख कारीगरों और शिल्पकारों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा था, जिसे निर्धारित समय से पहले पूरा कर लिया गया।
30 सितंबर 2026 तक देशभर में 30,03,925 कारीगर और शिल्पकार पंजीकृत हो चुके थे। इसी अवधि से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर 24.39 लाख से अधिक लाभार्थियों का बुनियादी प्रशिक्षण पूरा हुआ। वहीं, 6.23 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए, जिनकी कुल राशि लगभग 5,350 करोड़ रुपये बताई गई। देशभर में 26.17 लाख से अधिक टूलकिट ई-वाउचर भी जारी किए गए।
राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण के मामले में राजस्थान का चौथे स्थान पर होना इस कार्यक्रम में प्रदेश की भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि, योजना की सफलता का आकलन केवल पंजीकरण से नहीं, बल्कि कारीगरों को मिलने वाले वास्तविक लाभ और उनके कारोबार में होने वाले बदलावों से भी किया जाना जरूरी है।
बाजार तक पहुंच और नियमित सहायता भी जरूरी
कारीगरों के सामने चुनौती केवल प्रशिक्षण या औजारों तक सीमित नहीं है। अपने उत्पादों के लिए नए ग्राहक तलाशना, उचित कीमत प्राप्त करना और कारोबार को लगातार चलाए रखना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में कौशल विकास के साथ बाजार तक पहुंच और वित्तीय सहायता का प्रभावी उपयोग उनकी आजीविका को मजबूत बनाने में अहम हो सकता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय संसाधनों से जोड़ने का प्रयास करती है। राजस्थान में बड़ी संख्या में कारीगरों का पंजीकरण और प्रशिक्षण पूरा होना इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है। आने वाले समय में योजना का लाभ कितना व्यापक होगा, यह प्रशिक्षण की गुणवत्ता, ऋण की उपलब्धता, औजारों के उपयोग और बाजार में मिलने वाले अवसरों पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की पहल है। यदि इन सुविधाओं का प्रभावी उपयोग हो और कारीगरों को बाजार से बेहतर जुड़ाव मिले, तो उनके कारोबार और आजीविका को मजबूती मिल सकती है।