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पराली पर सियासत हावी मगर जलाने पर लगाम नहीं

पराली पर सियासत हावी मगर जलाने पर लगाम नहीं

पराली जल रही है, लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा है लेकिन सियासत अपने उफान पर है।
नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। गलती का ठीकरा दूसरी सरकार पर फोड़ा जा
रहा है। लगता है लोगों की खराब होती सेहत से किसी का लेना देना नहीं है। देश की राजधानी
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण में पराली जलाने का बड़ा योगदान है। सर्दियों के मौसम के
दौरान इसका प्रकोप देखने को मिलता है। पंजाब, हरियाणा और यूपी आदि राज्यों में लगातार
पराली जलाई जा रही है। पराली को लेकर सियासत भी होने लगी है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री
गोपाल राय इसके लिए हरियाणा और यूपी को दोषी ठहराते है, चूँकि पंजाब में उनकी ही पार्टी
का राज है इसलिए वे पंजाब का नाम नहीं लेते। जबकि पंजाब में रोजाना हजारों मांमले सामने
आ रहे है। देश की राजधानी दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है जो पराली
प्रदूषण को रोकने में नाकाम हो रही है। इसके चलते राजधानी दिल्ली में हवा का स्तर खराब
होता जा रहा है। पंजाब में दशहरे से दिवाली के बीच का वक्त वो समय होता है जब पराली
जलाने के मामले पीक पर पहुंच जाते हैं। इस साल भी पराली जलाने के मामलों में 28 अक्टूबर
के बाद बेहताशा बढ़ोतरी हुई है। पंजाब के मुख्यमंत्री की किसानों से पराली नहीं जलाने की
अपील भी बे असर हुई है। दूसरी तरफ हरियाणा सरकार कह रही है पराली जलाने पर किसानों
पर कार्रवाई की जा रही है। रोकथाम के प्रयास भी किये जा रहे है।
इसी के साथ सियासत भी बेकाबू हो गयी है। नेता एक दूसरे को दोषी ठहराने पर लगे है।
बताया जाता है पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की हज़ारों घटनाएं सामने आ चुकी है।
पंजाब ,हरियाणा सहित कुछ राज्यों में किसान जमकर पराली को जला रहे हैं। राज्य सरकारें इस
तरह की घटनाओं को रोकने के लिए तमाम तरह की कोशिशें करने का दावा करती हैं, लेकिन ये
दावे हवा हवाई नजर आ रहे हैं। पराली प्रदूषण की वजह से जहां बच्चे परेशान होते है। वहीं
बुजुर्गों को भी कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच ठंड की आहट के
साथ दिल्ली-एनसीआर समेत उसके आसपास के राज्यों में प्रदूषण के स्तर में भी इजाफा देखने
को मिल रहा है। पंजाब और हरियाणा में किसानों द्वारा पराली जलाए जाने का सिलसिला जारी
है। सरकार द्वारा तमाम प्रयासों के बावजूद किसान पराली जला रहे हैं।

पराली धान की फसल के कटने बाद बचा बाकी हिस्सा होता है जिसकी जड़ें धरती में होती हैं। किसान पकने
के बाद फसल का ऊपरी हिस्सा काट लेते हैं क्योंकि वही काम का होता है बाकी अवशेष होते हैं जो किसान के
लिए बेकार होते हैं। उन्हें अगली फसल बोने के लिए खेत खाली करने होते हैं तो सूखी पराली को आग लगा
दी जाती है। बड़े पैमाने में खेतों में पराली को जलाने से धुएं से निकलने वाली कार्बन मोनो ऑक्साइड और
कार्बन डाइऑक्साइड गैसों से ओजोन परत फट रही है इससे अल्ट्रावायलेट किरणें, जो स्किन के लिए
घातक सिद्ध हो सकती है सीधे जमीन पर पहुंच जाती है। इसके धुएं से आंखों में जलन होती है। सांस लेने में
दिक्कत हो रही है और फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं।
पराली के प्रदूषण के चलते देश की राजधानी की आबोहवा फिर से बिगड़ने लगी है। देश की राजधानी दिल्ली
और एनसीआर को वायु प्रदूषण से फिलहाल कोई राहत नहीं मिल रही। राष्ट्रीय राजधानी में दो प्रकार का
प्रदूषण है। एक अंदरूनी प्रदूषण है जो वाहनों, धूल आदि से पैदा होता है और दूसरा पंजाब, हरियाणा और
उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण होता है। दिल्ली में दम घोंटू जहरीली हवा हर साल
तबाही मचाती है। प्रदूषण सिर्फ जान नहीं ले रहा है। सिर्फ सांसे नहीं छीन रहा है.बल्कि देश को खोखला भी
कर रहा है. दावा है प्रदूषण की वजह से हर साल कई लाख करोड़ों का नुकसान होता है। एक शोध के अनुसार
बिगड़ती हवा की गुणवत्ता और हवा में प्रदूषकों के बढ़ते स्तर से सांस की बीमारी और विकारों की संख्या और
गंभीरता बढ़ जाती है। इसका सबसे अधिक बुरा असर बुजुर्ग और कमजोर या पहले से किसी बीमारी से जूझ
रही युवा आबादी पर भी पड़ता है।

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