पोस्टर का किया विमोचन - सूर्यदेव को अघ्र्य देने से शुभ फलों की होती प्राप्ति
सीकर,मुहम्मद सादिक। श्री कृष्ण सत्संग बालिका महाविद्यालय में सूर्य सप्तमी में ब्रह्मोत्सव कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन किया गया प्राचार्य डॉ रामकृष्ण शर्मा ने बताया कि सूर्य मंदिर लोहागर्ल धाम के पीठाधीश्वर महंत स्वामी अवधेशाचार्य महाराज के कर कमल से 16 फरवरी सूर्य सप्तमी के अवसर पर होने वाले ब्रह्मोत्सव कार्यक्रम का पोस्टर विमोचन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार की और से महत जी का स्वागत किया गया। पीठाधीश्वर महंत स्वामी अवधेशाचार्य ने बताया हिंदू पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी कहा जाता है। भिन्न-भिन्न स्थानों पर इसे अचला सप्तमी, भानु सप्तमी, संतान सप्तमी अथवा आरोग्य सप्तमी आदि नामों से भी जाना और पूजा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव का जन्म इस दिन सूर्य देव की पूजा एवं व्रत रखने से जातक को हर पाप कर्मों, दरिद्रता, बीमारियों, अशांति आदि से मुक्ति मिलती है।अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष 16 फरवरी शुक्रवार को सूर्य सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सूर्य का जन्म हुआ था। माघ शुक्ल पक्ष सप्तमी को स्वर्ण रथ पर आसीन सूर्यदेव की पूजा की जाती है, जिसे सात श्वेत घोड़ों द्वारा खींचा जाता है. इसके साथ ही सूर्य भगवान के सभी मंदिरों में रथ सप्तमी के दिन विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस दिन सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति को हर रोग, दोष और भय आदि से मुक्ति मिलती है। इस दिन सूर्यदेव को अघ्र्य देने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है, और आरोग्य का वरदान मिलता है। सूर्य मंदिर लोहागर्ल धाम के पीठाधीश्वर महंत स्वामी अवधेशाचार्य महाराज महाराज श्री ने महाविद्यालय में अपने संबोधन में कहा है कि मनुष्य जीवन में अपने माता-पिता सेवा करके ही पुण्य कमाया जा सकता है माता-पिता की अपने परिवार की प्रति लगाव और उनका दर्द को देखते हुए उसका रिण कभी भी नही चुकाया ना जा सकता है इसलिए अपने माता-पिता को पूर्ण रूप से सेवा कर पुण्य कमायाए। इस धार्मिक आयोजन में सभी को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए उन्होंने कहा कि इस तीर्थ का काफी महत्व है। उनहाने बताया कि अपने धर्म व संस्कारों से जुड़कर मनुष्य जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है इस अवसर पर महाविद्यालय स्टाफ में छात्राएं उपस्थित रही।