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प्रभु श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा, सृष्टि का सबसे बड़ा उत्सव - इंद्रेश कुमार

प्रभु श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा, सृष्टि का सबसे बड़ा उत्सव - इंद्रेश कुमार

 
 
कैलाश मानसरोवर के बिना भारत अधूरा है - इन्द्रेश कुमार
 
कोटा 6 फरवरी। भारत तिब्बत सहयोग मंच की तृतीय अखिल भारतीय आनलाईन बैठक सोमवार की रात्री में सम्पन्न हुईं। बैठक के मुख्यवक्ता संघ के प्रचारक एवं मंच के संरक्षक इन्द्रेश कुमारजी रहे , बैठक का संचालन मंच के अखिल भारतीय महामंत्री पंकज गोयल नें किया और इस बैठक में मंच के अखिल भारतीय अधिकारीगण, क्षेत्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी , विभाग एवं प्रकोष्ठ के दायित्ववान कार्यकर्ता जुड़े। इसमें  राजस्थान के चित्तौड़ प्रान्त प्रचार प्रमुख अरविन्द सिसोदिया नें भाग लिया।
 
सिसोदिया नें बताया कि मुख्यवक्ता और मंच के संरक्षक इन्द्रेश कुमार नें अपने संबोधन में "  प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर रामलला की प्राणप्रतिष्ठा उत्सव को वर्तमान सृष्टि का सबसे बड़ा एवं भव्य उत्सव बताया, कैलाश मानसरोवर के बिना भारत अधूरा है, इसे चीन से मुक्त करवाना है, संघ के सौ वर्ष पूर्ण होनें के कार्यक्रमों में और मंच के 25 वे वर्ष पर आयोजित कार्यक्रमों को सम्पन्न करने में समर्पण भाव से जुट जानें तथा लोकसभा चुनाव में राष्ट्रहित चिंतन हेतु लोकातांत्रिक जिम्मेवारी और संवेधानिक कर्तव्य पूर्ण करने का आव्हान किया।" वहीं अखिल भारतीय महामंत्री पंकज गोयल नें मंच के संरक्षक एवं प्रचारक इन्द्रेश कुमार जी के जन्मदिवस 18 फ़रवरी को सेवा कार्यों के द्वारा मानने का आव्हान किया एवं मंच की गतिविधियों की समीक्षा की । 
 
मुख्यवक्ता इन्द्रेश कुमार नें कहा  " अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हेतु 22 जनवरी को सम्पन्न हुआ उत्सव वर्तमान सृष्टि का सबसे बड़ा उत्सव था , इसमें पृथ्वी के 200 देशों में वहाँ के हिन्दुओं और स्थानीय निवासियों नें विभिन्न आयोजन किए, वहीं भारत के 6 लाख से अधिकगांव राम मय थे किसी गांव में एक तो किसी गांव में अनेक आयोजन हुए, भारत में 12 हजार से अधिक कस्बे,शहर, नगर और महानगर हैँ, जिनमें प्रत्येक गली - मोहल्ले में कई - कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। उन्होने कहा श्रीराममय पृथ्वीलोक, पाताल लोक, गौ लोक और देव लोक सभी आनंदित हुए, यह आयोजन इन हजारों वर्षों में सबसे विशाल और सबसे बड़ा उत्सव रहा है। विश्व की विविधताओं में ,एकात्म का अद्वितीय उत्सव बना। यह अवसर अद्भुत था, सुंदर था, अनेकों सुंदर सुंदर अनुभव होंगे इनकी चर्चा होनी चाहिए ।
 
इन्द्रेश कुमार नें कहा  कैलाश मानसरोवर के बिना भारत अधूरा है। इसे चीन के कब्जे से मुक्त करवाना ही है। उन्होंने कहा दुनिया में घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैँ। चीन क़ी विश्वनीयता और अंतर्राष्ट्रीय स्थिति कमजोर हुईं है, वह अंदर और बाहर से कमजोर हुआ है और आगे ओर भी दुर्बल होगा। चीन में आंतरिक अंतरद्वन्द भी है, जो एकदम बाहर नहीं दिखता ।  कोरोना के बाद उसकी पाश्विकता भी उजागर हुई है । उन्होंने कहा अभी असंभव को  संभव करने वाला समय चल रहा है, बहुत सी असंभव चीजें संभव हुईं हैँ। विश्व में घटनाक्रम क्रम तेजी से बदल रहे हैँ, आज लगता है कि कैलाश मानसरोवर को मुक्त होते देख सकें, तिब्बत को आजाद होते देख सकें , आने वाले समय में अवश्य ही एक दिन हमारे देश का तिरंगा लहरायेगा।
 
इन्द्रेश कुमार नें कहा कुछ समय पश्चात देश में लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व आम चुनाव आरहे हैँ, इसमें राष्ट्रहित चिंतन के लिए हमें सक्रिय भागेदारी निभाना हमारा संवेधानिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व का एकमात्र नित्य चलने वाला संगठन है जो राष्ट्रप्रेम और मानवता से ओतप्रोत है , संघ के 100 वर्ष पूर्ण होनें वाले हैँ। इस हेतु अनेकानेक आयोजन, कार्यक्रम होंगे, हममें से जिनको जो जिम्मेवारी मिले उसे पूरी निष्ठा प्रतिष्ठा से पूर्ण करना है।
 
मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने कहा भारत की सुरक्षा के लिए सुरक्षित हिमालय होना आवश्यक है ,मानवता के लिए तिब्बत को चीन के कब्जे से आजाद होना भी आवश्यक है, कैलाश मानसरोवर भारत का है और उसे चीन से मुक्त करना हमारा कर्तव्य है । इन्ही लक्ष्यों के लिए  के लिए भारत तिब्बत सहयोग मंच का  गठन 25 वर्ष पूर्व हुआ था , वर्तमान में 25 वां विशेष वर्ष चल रहा है, रजत जयंती वर्ष में इस हेतु जो भी कार्यक्रम मंच के चल रहे हैँ, उन्हें समयबद्ध पूर्ण कर लेना चाहिए है। उन्होंने कहा कार्यक्रमों में नवाचार करते रहें इससे नई ऊर्जा का संचार होता है , मंच के कार्यक्रमों में रन फॉर कैलास , तिरंगा फॉर कैलास कार्यक्रमों में सम्मिलित करना चाहिए । 
 
मंच के अखिल भारतीय महामंत्री पंकज गोयल नें विस्तारपूर्वक कार्यक्रमों की समीक्षा की व निर्देश दिए तथा मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार जी के जन्म दिवस 18 फरवरी को सेवा कार्यों के द्वारा मनाये जाने का आह्वान किया। 

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