प्रशंसा मीठा जहर, मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी– मुनि सद्भाव सागर महाराज
मदनगंज-किशनगढ़। श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन पंचायत के तत्वावधान में जैन भवन में आयोजित सम्यक ज्ञान बाल शिक्षण शिविर के दौरान मुनि सद्भाव सागर महाराज ने कहा कि प्रशंसा मीठा जहर है, प्रशंसा को पाने के लिए व्यक्ति कुछ भी कर सकता है। मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी प्रशंसा ही है। यदि इंसान को नीचे गिराना हो तो उसकी प्रशंसा कर दो। जैसे गुब्बारे में ज्यादा हवा भर दो तो गुब्बारा फूट जाता है वैसे ही अतिप्रशंसा से व्यक्ति फूल जाता है। मुनिश्री ने कहा कि सोना-चांदी धन- सम्पत्ति व ईर्ष्या छोड़ना बहुत कठिन है। किसी लेखक ने लिखा है कि हे परमात्मा मैं कांटों के पथ पर स्वयं बढ़ जाऊंगा। आप मुझे फूलों के पथ में चलने की शक्ति देना। ध्यान रखना जब व्यक्ति दुखी व परेशान होता है तो अपने आप सतर्क रहता है। जैसे ही सुखी होता है तो भगवान का नाम भी भूल जाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की प्रशंसा, संपन्नता, अनुकूलता कभी-कभी उसके पतन का कारण हो जाती है। इसीलिए हे भव्य जीव निंदा और प्रशंसा दोनों में साम्य भाव, सहज भाव होना चाहिए। इससे पूर्व महावीर जिनालय में मुनि संघ के सान्निध्य में बच्चों को अभिषेक, पूजन कराई गई। प्रवचन के बाद में बच्चों ने मुनिश्री के आहार क्रिया में विशेष उत्साह दिखाते हुए नवदा भक्ति पूर्वक बच्चों ने नववर्ष के उपलक्ष में पडगाहन किया। शाम को 24 दीपको से आरती, णमोकार चालीसा पाठ एवं प्रश्न मंच किया। पंचायत अध्यक्ष विनोद पाटनी ने बताया कि शीतकालीन अवकाश होने पर आयोजित समय ज्ञान बाल शिक्षण शिविर में बच्चे काफी उत्साहित है। व बच्चे कड़ाके की ठंड में भी बिना ऊनी वस्त्र के, नंगे पैर मुनिश्री की आहार चर्या में साथ रहे। मुनिश्री ने कहा कि शिविर के दौरान बच्चों ने सब थ्योरिकल ही नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल में भी सब कुछ सीखा। बच्चों ने अभिषेक, पूजन करना, आहारचर्या, केशलोचन आदि प्रैक्टिकल में भी देखा।
मुनि संकल्प सागर महाराज ने किया केशलोचन
सिटी रोड स्थित जैन भवन में विराजित मुनि संकल्प सागर महाराज ने सोमवार को प्रातः केशलोचन किया। नव वर्ष की पूर्व संध्या पर जैन भवन में एक शाम वीर प्रभु के नाम भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमे श्री वीर संगीत मंडल के सुरेंद्र दगड़ा, विमल पापल्या, कमल वेद, व कमल रावका एवं स्थानीय कलाकार बिंदिया छाबड़ा, अमित बगड़ा, नेहा जैन एवं आर्यन छाबड़ा द्वारा एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए गए।