यज्ञमंडपो की तैयारीयो को दिया अंतिम रूप हवन कुंड का निर्माणकार्य शुरू
सीकर। रामलीला मैदान में शुरू होने जा रहे 20 सितंबर से श्री लक्ष्मी गोपुस्टि महायज्ञ की यज्ञशाला व चार अन्य मंडपों की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है 61&61 फुट की पांच मंजिल की यज्ञशाला का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है जिसमें 56&56 फीट पर हवन कुंड बनेंगे बाकी परिक्रमा मार्ग रहेगा यह यज्ञशाला पांच मंजिल की तैयार होगी ऐसे ही साथ में चार यज्ञ मंडप 21&21 फीट के तैयार हो रहे हैं जो दो मंजिलें होंगे जिसमे प्रथम में अखंड रामायण का पाठ चलेगा,द्वितीय में 11000 हजार रुद्राक्ष की नित्य पूजा एवम सवालक्ष्य महामृत्युंजय के जाप विद्वान पंडितो द्वारा किए जाएंगे, तृतीय में अखंड हरी कीर्तन चलता रहेगा एवं चतुर्थ मंडप में जीवंत गौ माता को रखा जाएगा जिसकी प्रति दिवस पूजा अर्चना व आरती होगी।। यज्ञ मंडपों का निर्माण नागौर व डीडवाना से आए दर्जन भर कारीगरों द्वारा कीया रहा है निर्माण कार्य में बली, बॉसपट्टी,पोर बॉस, चटाई (सरकी), सरकंडे, सुतली, पानी का मुंजा(कूंचा), आदि सामान काम में लिए जा रहे हैं अधिकतर कच्चे कार्य को यह कारीगर पहले ही तैयार करके यहां आते हैं इस निर्माण कार्य में इन्हें लगभग 15 दिवस का समय लगता है यज्ञशाला व मंडपो का निर्माण 1 सितंबर से प्रारंभ किया गया था जो लगभग अब अंतिम चरण में है। महंत चंद्रमादास महाराज ने बताया कि 22 अगस्त को हनुमत ध्वजयात्रा के साथ ही रामलीला मैदान में भूमिपूजन, हनुमत ध्वज स्थापना व नित्ययज्ञशाला प्रारम्भ हो गई थी जिसमे प्रतिदिवस प्रात: हवन,रुद्राभिषेक, पूजाअर्चना,सायं 7,15 बजे सामुहिक महाआरती होती है पूरे दिवस हरिकीर्तन चलते रहते हैं। यज्ञशाला का निर्माणकार्य पूर्ण होने पर प्रत्येक मंडप को में देसी गाय के गोबर में चिकनी मिट्टी मिलाकर फर्स डाला जाएगा व चारो ओर लेप किया जायेगा तथा शुद्धिकरण कर यज्ञशाला में हवन कुंड का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। महायज्ञ जनकल्याण, प्रकृति संरक्षण एवं गोसेवार्थ किया जा रहा है इसमें बाजार से प्राप्त घृत का प्रयोग ना कर केवल गौशालाओं से प्राप्त शुद्ध गाय के घृत का ही प्रयोग किया जाएगा । गोमाता अपना दूध देने में किसी के साथ भेदभाव नहीं करती ,उससे प्राप्त होने वाली प्रत्येक वस्तु प्राणी मात्र के कल्याण में काम आती है वह जीवनपर्यंत निस्वार्थभाव से प्राणी मात्र का कल्याण करती है इसीलिए वह जगत माता कहलाती है वैसे ही इस यज्ञ का उद्देश्य भी प्राणी मात्र के कल्याण के लिए किया जा रहा है।