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दालों ने फिर बिगाड़ा रसोई का बजट

दालों ने फिर बिगाड़ा रसोई का बजट

हमारे नेता और राजनीतिक पार्टियां इस समय चुनावी जंग में व्यस्त है वहीं महंगाई की मार
आम लोगों पर भारी पड़ रही है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले सभी खाद्य पदार्थों के रेट में
दिन-ब-दिन बढ़ोतरी हो रही है। एक माह में दाल की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत की तेजी
आई है। पेट्रोल डीज़ल के भाव कम होने का नाम नहीं ले रहे है। दालों ने रसोई का बजट
बिगाड़कर रख दिया है। पिछले दिनों टमाटर के दाम आसमान छू रहे थे जिससे सब्जियों से
टमाटर गायब हो गया था। अब उसके दाम कम हुए तो दालों के दाम में आग लग रही है। एक
माह में 15 से 20 प्रतिशत की तेजी आई है। हाल के दिनों में दाल के भाव में 20 से 25 रुपये
प्रति किलो आई है। इसका प्रमुख कारण मांग के सापेक्ष आपूर्ति कम होना है। भाव में तेजी
सिर्फ अरहर दाल में ही नहीं बल्कि अन्य दालों में भी देखी जा रही है। मूंग की दाल में भी
उछाल है। वर्तमान में अरहर दाल- 155 -180 रूपये, चना दाल - 90- 100, मूंग दाल - 150 -
190, मसूर दाल - 100 - 110, उड़द दाल - 130- 150, बेसन- 90 - 110, राजमा - 150 -
180, मटर- 80 - 100 और काबली चना - 150- 180 रुपए प्रतिकिलो बेचा जा रहा है। महंगाई
की हालत ऐसी हो गई है कि पहले सब्जियों से टमाटर गायब हो गया तो अब बिना छौंके वाली
दाल खाने की आदत डालनी पड़ेगी। महंगी दालों और मसालों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया
है। लाल मिर्च, जीरा और लोंग आदि ने लोगों को दिन में तारे दिखा दिए है। खाद्य वस्तुओं के
दामों में तेजी का रूख बना हुआ है। इससे कई वस्तुओं के दाम तो रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए
हैं। ऐसे में महंगाई ने आम आदमी की परेशानी और बढा दी है।दाल कभी आम लोगों का सहारा थी।
गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार दाल-रोटी खाकर अपना गुजारा कर लेता था, मगर अब ऐसा नहीं है।
महंगाई की मार दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। अरहर, मूंग, मसूर
और उड़द की दालों के दाम एक सौ से डेढ़ सौ रूपये किलो पहुँच गए है। अरहर दाल की कीमत एक माह में
25 प्रतिशत तक बढ़ गयी। दैनिक जीवन में हम तरह की दालों का सेवन करते हैं। दाल प्रोटीन का एक
अच्छा स्रोत माना जाता है। महंगाई के पंख लगने के बाद दालें लोगों की पहुंच से दूर हो गई हैं। हालत यह है
कि दालों को खाना अब लोगों के बस की बात नहीं रही। हर दाल के दाम आसमान छू रहे हैं। दालें रसोई से
छिटक चुकी है और गरीब की थाली से भी दूर हो गयी है। दाल न सिर्फ हमारे शरीर में जरूरी विटामिन और
मिनरल की आपूर्ति करती है बल्कि हमें तंदरुस्त बनाए रखने में भी मदद कर सकती हैं। खुदरा विक्रेता
रोजमर्रा की चीजें काफी महंगे भावों में बेच रहे है तो दालें भी हमारे से दूर होती जा रही है। लगता है सरकार

का इन पर कोई अंकुश नहीं है। दालें महँगी होने के साथ मिलावटी भी देखी जा रही है। हमारे जीवन में
मसालों और दालों का बहुत महत्त्व है। अमूमन प्रत्येक घर में रोजाना दाल बनती है। जिसे बच्चे से बुजुर्ग
तक बड़े चाव से सेवन करते है। लंच हो या फिर रात का डिनर। दाल के बिना खाना कुछ अधूरा सा लगता है
और दाल में भी मूंग, उड़द, अरहर और मसूर की दाल को सबसे पौष्टिक माना जाता है। दाल के अनेक
फायदे हैं। दालों के भाव निरंतर बढ़ते ही जा रहे है। महंगाई सरकार के काबू में नहीं है। सब्जियों के साथ दालें
भी थाली से दूर होती जा रही है।
दाल को स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। चिकित्सकों के अनुसार छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और विभिन्न
बीमारियों के दौरान मरीजों को दाल का पानी पीने की सलाह दी जाती है। दाल महँगी तो हो ही रही है मगर
मिलावट का तड़का भी देखा जा सकता है। अगर आप दालों की चमक दमक देखकर खरीद करते हैं तो
सावधान हो जाइए। ये दाल आपकी सेहत को खराब नहीं बहुत खराब कर सकती हैं। इसमें चमक के लिए
मिनरल ऑयल की मिलावट की जाती है। खाद्य विभाग की जांच में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। दाल को
पौष्टिक आहार माना जाता है, लेकिन जब ये पौष्टिक आहार ही आपकी सेहत बिगाड़ने लगे तो सोचिए क्या
होगा।

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