दलहन दिवस : गरीब की थाली से दूर हुई दाल
अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस हम ऐसे समय मना रहे है जब आसमान छूती महंगाई के चलते दाल
भी आम लोगों की पहुंच से दूर हो गई है। गरीबों की थाली से दाल की कटोरी गायब हो रही है।
अब दालें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। अरहर, उड़द, मूंग और मसूर की दाले काफी महंगी
हैं। भोजन में सबसे पौष्टिक तत्व से लोगों की बढ़ रही दूरी स्वास्थ्य के प्रति चिंता बढ़ा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस हर साल 10 फरवरी को मनाया जाता है। यह दिवस पहली बार वर्ष
2016 में मनाया गया था। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी को विश्व दाल दिवस
के रूप में मनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि दालें न
केवल पोषक हैं बल्कि विश्व की भूख और गरीबी को मिटाने की दिशा में स्थायी खाद्य
प्रणालियों के विकास में भी योगदान दे सकती हैं। विश्व दलहन दिवस मनाने के पीछे का
मकसद मिट्टी की उत्पादकता में सुधार और दालों की उत्पादकता, कृषि प्रणालियों में
लचीलापन, किसानों के लिए बेहतर जीवन और खेती के सही तरीकों को बढ़ावा देना है। साथ ही
दालों की उपयोगिता से जन जन को अवगत करना है। विश्व दलहन दिवस की इस वर्ष की थीम
दालें : पौष्टिक मिटटी और लोग रखी गई है। इस थीम का उद्देश्य दालों को हमारे आहार और
कृषि पद्धतियों में एकीकृत करना है, जिससे मिट्टी और वैश्विक आबादी दोनों के पोषण में
उनकी भूमिका पर जोर दिया जा सके।
भारत दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत में सालाना दलहन की मांग करीब 250 लाख मीट्रिक
टन से अधिक है। भारत विश्व में पैदा होने वाली कुल दालों का लगभग 24 फीसदी उत्पादन करता है। दालों
की सबसे ज्यादा खपत भी भारत में होती है। दालें खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं। यह देश
और दुनिया की एक बड़ी आबादी का प्रमुख भोजन हैं। दालों की खेती करने वाले किसानों के लिए यह आय
का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। हमारी बदलती लाइफ स्टाइल और फास्ट फूड के बेहद प्रचलन के कारण आहार में
दालों का सेवन कम हो गया है। दाल की कमीं से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिलता है। दाल के सेवन से हमें
प्रोटीन मिलता है और हमारा शरीर मजबूत बनता है। दाल के सेवन से कई बीमारियों से छुटकारा पा सकते
हैं। दाल कई तरह की होती हैं जैसे चना दाल, अरहर दाल, मसूर दाल , सोया दाल आदि। विभिन्न किस्मों की
दालों का हमारे जीवन में बड़ा महत्त्व है। इसमें मूंग दाल को सबसे ज्यादा उपयोगी बताया जाता है। मूंग दाल
में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और कई विटामिन्स पाए जाते हैं जो कई
बीमारियों को रोकने में सहायक होते हैं। आहार विशेषज्ञों के अनुसार मूंग दाल में फाइबर भरपूर मात्रा में
पाया जाता है जो बदहजमी और जलन की समस्या को दूर करने में मदद करता है। इसके सेवन से पाचन
शक्ति मजबूत हो सकती है। इसके अलावा कुलथी की दाल को सेहत का खजाना कहा जाता है। यह दाल
दक्षिण भारत में अधिक पाई जाती है। इस दाल में पाए जाने वाले पौष्टिक तत्व बवासीर, कोलेस्ट्रॉल,
मोटापा समेत कई बीमारियों को दूर भगाने की क्षमता रखते हैं। अरहर की दाल में कैल्शियम, आयरन,
मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटैशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, सिलेनियम, मैंगनीज, प्रोटीन जैसे पोषक
तत्व पाए जाते हैं। अरहर की दाल का पानी डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। इसी भांति
मसूर दाल के सेवन से डायबिटीज़, मोटापा, कैंसर और हार्ट प्रॉब्लम्स जैसे समस्याएं दूर रहती
हैं। चना दाल में जिंक, प्रोटीन, कैल्शियम व फोलेट पाया जाता है। उड़द दाल में भरपूर मात्रा
में फाइबर होता है
हमारे जीवन में दालों का बहुत महत्त्व है। अमूमन प्रत्येक घर में रोजाना दाल बनती है। जिसे बच्चे से बुजुर्ग
तक बड़े चाव से सेवन करते है। लंच हो या फिर रात का डिनर। दाल के बिना खाना कुछ अधूरा सा लगता है
और दाल में भी मूंग, अरहर और मसूर की दाल को सबसे पौष्टिक माना जाता है। लेकिन अब आपको सतर्क
होने की जरूरत है क्योंकि जिस दाल को आप हेल्दी समझकर खा रहे हैं वह आपके शरीर के लिए जहरीली
साबित हो सकती है। दाल को स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। चिकित्सकों के अनुसार छोटे बच्चों, गर्भवती
महिलाओं और विभिन्न बीमारियों के दौरान मरीजों को दाल का पानी पीने की सलाह दी जाती है। हम
दलहन दिवस जरूर मना रहे है और एक कटोरी दाल के ढेर सारे फायदे भी बता रहे है। मगर दालों के भाव
आसमान को छू रहे है। यह गरीबों की थाली में तभी आएगी जब सस्ती होगी। हमें इस और भी ध्यान देना
होगा, तभी इस दिवस की सार्थकता प्रकट होंगी।
- बाल मुकुन्द ओझा