झालरिया पीठ डीडवाना का तिरुपति में पुरुषोत्तम मास महोत्सव 3 अगस्त से
कोटा. रामनुज सम्प्रदाय की उत्तर भारत की सबसे पुरानी पीठ झालरिया पीठ का पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) महोत्सव इस वर्ष तिरुपति धाम में आयोजित किया जा रहा है। इस संबंध में सोमवार को आयोजन स्थल पर प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया।
आयोजन समिति श्री श्रीधर महोत्सव समिति के संयोजक डॉ.नवीन माहेश्वरी ने बताया कि भगवान वैंकटेश, भगवान श्री जानकी वल्लभ महाराज व श्री दास हनुमान जी महाराज और सभी पूर्वोचार्यों के कृपा आशीर्वाद से तिरुपति धाम इस बार बड़े धार्मिक आयोजन में सहभागी बनेगा। यहां झालरिया पीठ डीडवाना का पुरुषोत्तम मास महोत्सव का आयोजन 3 से 9 अगस्त तक किया जाएगा। आयोजन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कार्यक्रमों की शुरुआत 3 अगस्त को शोभायात्रा से होगी। शोभायात्रा 8.30 बजे श्री पद्मावति मंदिर से शुरू होगी। इसी दिन दोपहर 11 बजे श्री महालक्ष्मी महायज्ञ शुभारंभ एवं अग्नि स्थापना, श्रीमद् भागवत पारायण 11.30 बजे तथा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ 3.30 बजे शुरू होगा।
माहेश्वरी ने बताया कि जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री झालरिया पीठाधिपति 1008 स्वामी जी श्री घनश्यामाचार्य महाराज के पावन सानिध्य में विश्व शांति एवं जनकल्याणार्थ आयोजित हो रहा यह आयोजन श्री कन्वेंशन सेंटर डॉ.बीआर मल्टी स्पेशलिटी रोड कोरलागुंठा में होगा। इसके तहत 3 से 9 अगस्त तक विभिन्न आयोजन होंगे। 225 कुण्डीय यज्ञ के साथ प्रतिदिन भागवत् कथा दोपहर 3.30 से 6.30 बजे तक होगा। कथा विश्राम 9 अगस्त को 10 से 12.30 बजे तक होगा। 3 अगस्त गुरुवार को श्रीमद् भागवत महात्म्य, गोकर्णोपाख्यान व शुकदेव चरित्र पर प्रवचन होंगे। 4 अगस्त को गुलाब पुष्प से श्री लक्षार्चना और भागवत् कथा में कपिलोदेश, धु्रव चरित्र, सती चरित्र, अनुसूइया चरित्र तथा 5 अगस्त को बिल्व पत्र से श्री लक्षार्चना एवं श्री रामार्चा महायज्ञ तथा भागवत कथा के तहत पुरंजनोपाख्यान, अजामिलोपाख्यान, वृत्रासुर चरित्र, प्रहलाद चरित्र एवं नृसिंह अवतार पर प्रवचन होंगे।
इस महोत्सव में सहभागी बनने के लिए देशभर से रामानुज सम्प्रदाय के भक्तों का तिरूपति पहुंचना शुरू हो गया है। झालरिया पीठ के देश-विदेश से भक्त इस आयोजन में सहभागी बनेंगे। आयोजन के लिए भागवान लक्ष्मी वैंकटेश पंडरपुर महाराष्ट्र से विग्रह के साथ तिरूपति पहुंचे हैं। इस दौरान 9 अगस्त को कल्याणोत्सव होगा। इसके लिए तिरूमला से भगवान वैंकटेश भी आएंगे। तिरूपति तिरूमाला ट्रस्ट की ओर से इसकी स्वीकृति दे दी गई है। इस अनुठे आयोजन के लिए बड़ी संख्या में भक्तजन पहुंचेंगे।
झालरिया पीठ : एक परिचय
त्रेतायुग में भगवान श्री जानकीवल्लभ जी ने भूमण्डल पर एक हजार यज्ञ किए थे, उनमें से एक महायज्ञ पावन मरुभूमि में सम्पन्न किया, जहाँ पर वर्तमान में श्री झालरिया मठ स्थित है तभी से वीतरागी, तपस्वी, सन्तमण्डली इस पावन तपोभूमि, यज्ञ भूमि में आश्रम बनाकर रहने लगी। इन्हीं तपोनिष्ठों में आय श्री हरिरामाचार्य जी इस सन्त मण्डली के प्रमुख हुए। उन्होंने अधिकमास व विशेष पर्वों पर यज्ञानुष्ठान प्रारम्भ किए। उन यज्ञों में भावनात्मक रूप से भगवान् श्री जानकी वल्लभ जी को यज्ञ का यजमान बनाते रहे। यज्ञानुष्ठान का यह क्रम चलता रहा, यही क्रम आगे आने वाले आचार्य भी करते रहे। आचार्य परम्परा में संवत् 1600 में श्री हरियमाचार्य जी महाराज द्वितीय इस आचार्य परम्परा में सन्तप्रमुख हुए। उन्होंने संवत् 1612 में एक देवस्थान का निर्माण कर उसमें भगवान श्री जानकी वल्लभ जी को विराजमान कर उनकी सेवा-पूजा, आराधना तन्मयता से करने लगे। भगवान की सेवा, पूजा आराधना इतनी तन्मयता से करते थे कि मन्दिर के घण्टा झालर स्वयमेव बजने लगते। इसी से इस स्थान का नाम बाद में “श्री झालरिया मत““श्री झालरिया पीठ“ “श्री झालरिया मन्दिर“ के नाम से सुविख्यात हुआ। श्री हरिरामाचार्य जी द्वितीय ने संवत् 1612 में श्री विष्णुमहायज्ञ का आयोजन किया इस यज्ञ में यजमान रूप में भगवान श्री जानकी वल्लभ जी का आवाहन किया इस यज्ञ में उनको व समुपस्थित जनसमूह को ऐसा - आभास हुआ कि भगवान श्री जानकी वल्लभ जी के दाहिनी ओर जानकी जी को व बायीं ओर श्री लक्ष्मण जी को लेकर यज्ञ में यजमान रूप में समुपस्थित हो गए हैं, बाद में आचार्य श्री ने इसी स्वरूप में भगवान श्री जानकी वल्लभ जी का श्रीविग्रह यहां प्रतिष्ठित कर दिया। भारत वर्ष में यह एकमात्र स्थान है जहाँ श्री जानकी वल्लभ जी अवतार में यज्ञस्वरूप में विराजमान है जिनके दाहिनी ओर श्री जानकीजी व बायीं ओर श्री लक्ष्मण जी विराजमान है। वर्तमान में परम पूज्य जगदगुरू रामानुजाचार्य स्वामी जी श्री श्री 1008 श्री घनश्यामाचार्य जी महाराज पीठाधिपति हैं। करीब 2 हजार वर्ष पुराने इस पीठ के देश-विदेश में 100 से अधिक प्रकल्प संचालित हैं, जिनमें मंदिर, गौशालाएं, पाठशालाएं व धर्मशालाएं शामिल हैं।