कुरआन मुकम्मल हिफ़्ज़ बच्चों को दस्तारबंदी के एजाज से नवाजा गया
बीदासर। मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन दारुल उलूम में गुरुवार को बाद नमाज जोहर के फलौदी के मुफ़्ती हबीबुल्लाह की अध्यक्षता में जलसा-ए-दस्तारबंदी के उन्वान पर रखा गया। जलसे का आगाज पोकरण से आए कारी नूर मोहम्मद ने कुरआन की तिलावत से किया। कार्यक्रम में पोकरण से कारी वली मोहम्मद, सरदारशहर से मुफ़्ती शकील, मौलाना उस्मान, राजलदेसर से मौलाना खलील ने शिरकत की। इस दौरान मदरसे निदेशक मौलाना जियाउल हक ने बताया कि मदरसे में तालीम हासिल कर रहे बिहार के तमजिद, मुदस्सिर हामिद व बीदासर की 12 वर्षिय महक सोलंकी (सिलावट) ने कुरआन मुकम्मल हिफ़्ज़ करने पर दस्तारबंदी के एजाज से नवाजा गया। सदर मौलाना आरिफ ने कहा कि हमारा यकीन एक अल्लाह पर है और उसके रसूल को सबसे ज्यादा मोहब्बत करते हैं, क्योंकि नबी-ए-करीम ने हमें इंसानियत का पैगाम दिया है और अल्लाह ने अपने रसूल को पूरी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह और उसके रसूल के बताए हुए रास्ते पर चलकर अपनी जिंदगी बसर करें। वही शहर काजी हाफिज शरीफ ने कहा कि दुनियावी तालीम के साथ-साथ दीनी तालीम को भी हासिल करना चाहिए। जलसे में मुल्क में अमन शांति व भाईचारे के लिए दुआएं खेर की गई। इस मौके पर मुफ़्ती मूसा, कारी अमीरुदीन, मौलाना शोहेब, अब्दुल गफ्फार, फजलुदीन, मुफ़्ती मोहम्मद मेवाती, हाफिज आमीन, मोहम्मद रमजान चाचवी, मुस्लिम शाह, पार्षद यूनुस शेख, फारूक छींपा, सदीक, अता हुसैन सोलंकी, अकबर टेलर, जुल्फिकार अली छींपा आदि उपस्थित थे। जानकारी के अनुसार बीदासर में मुस्लिम समुदाय से महक सोलंकी पहली बालिका है जिसने बगैर देखे कुरआन (हिफ़्ज़) पढ़ने का खिताब हासिल किया है। इसको लेकर प्रदेश भर से समाज के लोगों ने महक को उज्जवल भविष्य के लिए मुबारकबाद दी।