TMC पर EC के फैसले से भड़के राहुल, बोले- अब पार्टी चोरी
नई दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में उन्हें एक जैसा पैटर्न नजर आ रहा है। उनके मुताबिक, पहले पार्टी में विभाजन होता है और इसके बाद चुनाव चिह्न पर विवाद खड़ा होता है।
राहुल ने अपनी पोस्ट में कहा कि जब पूरी पार्टी को ही ‘चोरी’ किया जा सकता है तो करोड़ों भारतीयों के वोट को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ बताते हुए लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया। यह राहुल गांधी का आरोप और राजनीतिक टिप्पणी है।
EC की संवैधानिक जिम्मेदारी का किया जिक्र
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनता के जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके आरोप के अनुसार आयोग ऐसे कदम उठा रहा है, जिससे जनता के फैसले को बदलने वाली ताकतों को मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ ममता बनर्जी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं से जुड़ा है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं।
EC ने क्यों फ्रीज किया TMC का नाम और चिह्न?
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई थी। यह फैसला पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच चल रहे विवाद के बीच लिया गया।
आयोग के आदेश के अनुसार, अंतिम फैसला होने तक दोनों गुट इस नाम और चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। आयोग ने दोनों पक्षों को नए पार्टी नाम के तीन-तीन विकल्प और फ्री चुनाव चिह्नों के तीन-तीन विकल्प देने को कहा था। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
नंदीग्राम और रेजीनगर में होगा असर
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों सीटों के लिए मतदान से पहले आयोग को दोनों गुटों के लिए अलग पहचान तय करनी है। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला अंतिम रूप से यह तय नहीं करता कि मूल पार्टी के नाम और चिह्न पर किस गुट का दावा स्वीकार किया जाएगा। फिलहाल दोनों पक्षों को अलग नाम और चिह्न के साथ उपचुनाव में उतरने की व्यवस्था की गई है।
TMC के दोनों गुट आमने-सामने
तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक विवाद के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट और दूसरे पक्ष के बीच पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर दावा सामने आया। दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग के समक्ष अपने दस्तावेज और दावे रखे हैं।
आयोग की अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य आगामी उपचुनाव में दोनों गुटों को अलग चुनावी पहचान देना है। अब दोनों पक्षों की ओर से दिए गए नाम और चिह्न के विकल्पों के आधार पर आयोग उन्हें अस्थायी पहचान देगा।