राहुल गांधी कांग्रेस के लिए ‘रेड फ्लैग’, पीयूष गोयल का हमला
नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोयल ने राहुल गांधी को कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा ‘रेड फ्लैग’ करार दिया।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कई नेता चुनाव आयोग और SIR को लेकर राहुल गांधी के रुख से अलग राय रखते हैं। गोयल के मुताबिक, कांग्रेस एक तरफ चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, जबकि दूसरी तरफ अपने राजनीतिक रिकॉर्ड और पूर्व के बयानों को नजरअंदाज करती है।
पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का रवैया संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला है। उन्होंने कांग्रेस के भीतर नेताओं की ओर से दिए गए अलग-अलग बयानों का उल्लेख करते हुए पार्टी के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए।
SIR और चुनाव आयोग पर कांग्रेस को घेरा
पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर सकारात्मक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने शशि थरूर, रमेश चेन्नीथला और केरल के मुख्यमंत्री के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि SIR को लेकर कांग्रेस के भीतर एक जैसी राय नहीं है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने राज्य में चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की थी। गोयल के अनुसार, इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व अब चुनाव में वोट चोरी के आरोप लगा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का बचाव करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने की स्वायत्तता दी गई है। उन्होंने दावा किया कि आयोग के अधिकारियों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के बजाय उन्हें देशहित और जनहित में काम करने का अवसर दिया गया।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों पर उठाए सवाल
कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड पर निशाना साधते हुए पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव अधिकारियों की बाद की राजनीतिक या सरकारी नियुक्तियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयोग से जुड़े कुछ अधिकारियों को बाद में राजनीतिक पदों और सरकारी जिम्मेदारियों पर नियुक्त किया गया।
गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 1999 में उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसे शेषन को पुरस्कृत करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का भी उल्लेख किया। गोयल के मुताबिक, गिल 1996 से 2001 तक इस पद पर रहे। वर्ष 2000 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया और सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा। बाद में वे राज्यसभा पहुंचे और केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री ने इन घटनाओं को आधार बनाकर कांग्रेस पर चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों के साथ राजनीतिक हितों के अनुसार व्यवहार करने का आरोप लगाया। हालांकि, ये टिप्पणियां गोयल की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
केरल के चुनाव अधिकारियों का भी किया जिक्र
पीयूष गोयल ने केरल और राजस्थान से जुड़े कुछ अधिकारियों की नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए भी कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने टीकाराम मीणा का नाम लेते हुए दावा किया कि केरल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्हें कांग्रेस की राजस्थान विधानसभा चुनाव की घोषणा-पत्र समिति में शामिल किया गया था।
उन्होंने रतन यू. केलकर का भी जिक्र किया और केरल में चुनाव के बाद उनकी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए। गोयल ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में भूमिका निभाने वाले अधिकारियों को बाद में महत्वपूर्ण पद दिए जाने से निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा होते हैं।
इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव आयोग और प्रशासनिक नियुक्तियों को राजनीतिक नजरिए से देखने का आरोप लगाया। हालांकि, इन नियुक्तियों के संबंध में किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
2023 के कानून को बताया चुनाव सुधार का कदम
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में सरकार की प्रमुख भूमिका रहती थी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2023 में कानून बनाकर चयन प्रक्रिया में नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया।
गोयल के अनुसार, अब चयन समिति में प्रधानमंत्री के साथ नेता प्रतिपक्ष की भी भूमिका है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में विपक्ष की भागीदारी सुनिश्चित होती है। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चयन व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को चुनाव आयोग की आलोचना करने से पहले अपने पुराने रिकॉर्ड पर भी विचार करना चाहिए।
इस पूरे विवाद में भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। जहां भाजपा कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर रही है, वहीं चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर दोनों पक्षों के बीच बहस जारी है।