राहुल गाँधी की सांसदी रद्द: मीठा मीठा गप गप कड़वा कड़वा थू थू
यह कहावत तो पुरानी है मगर इसका अर्थ अब भी वही है। जो चीज हमें सही लगेगी वह ठीक
है और जो हमारे अनुकूल नहीं है वह गलत है। यहाँ बात हो रही है राहुल गाँधी की। कांग्रेस के
पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गाँधी अपने विवादस्पद बयानों और भाषणों के लिए लगातार चर्चा
में बने हुए है। अब सूरत की एक अदालत ने आपराधिक मानहानि के एक मामले में राहुल
को दो साल की सजा से दण्डित किया है। इसी के साथ राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता
खत्म हो गई है। शुक्रवार को लोकसभा सचिवालय ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया और
उनकी संसद सदस्यता खत्म करने का नोटिस जारी कर दिया। राहुल इससे पूर्व रफाल के एक
मामले में न्यायपालिका से माफ़ी मांग चुके है। इस सजा के साथ लोकसभा की सदस्यता से
अयोग्य घोषित करने के खिलाफ कांग्रेस ने देशभर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिए है। कांग्रेसी
नेताओं की प्रतिक्रियाओं को देखकर लगता है यह सजा उनको हजम नहीं हुई है और उन्होंने
अदालती निर्णय पर सवालिया निशान लगा दिए है। भाजपा ने आरोप लगाया है जब अदालत
उनके पक्ष में अपना निर्णय देती है तो न्यायपालिका स्वतंत्र होती है और जब खिलाफ देती है तो
बोलते है मोदी ने न्यायपालिका को दबा रखा है। भाजपा ने इसे ओबीसी समाज की मानहानि से
जोड़ दिया है। देखने की बात ये है जिन सियासी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप है वे
एकजुट होकर मोदी की खिलाफत कर रहे है। हालाँकि यह अदालती निर्णय है मगर कांग्रेस पार्टी
इसे मानने को तैयार नहीं है। कांग्रेस और उनके समर्थक दल खुलेआम न्यायपालिका के निर्णय
पर अंगुली उठा रहे है। विशेषकर वे पार्टियां जिनके नेता विभिन्न आपराधिक और भष्टाचरण में
या तो सजायाप्ता है या जेलों में बंद है। राहुल की सांसदी समाप्त करने के विरोध में सभी
विपक्षी दलों ने कांग्रेस के साथ एकजुटता व्यक्त की है। इससे पूर्व लालू यादव को सजा मिलने
पर उनकी सांसदी भी ख़त्म कर दी गई थी।
राहुल ने 2019 के चुनाव प्रचार के दौरान कर्नाटक के कोलार में एक रैली को संबोधित हुए
'मोदी सरनेम' को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, 'सभी चोरों का सरनेम मोदी
क्यों होता है...। राहुल को कोर्ट ने जमानत भी दे दी। राहुल गाँधी पर विदेशी धरती दिए
विवादास्पद बयान का मामला अभी थमा भी नहीं था की सूरत की अदालत द्वारा सजा सुनाये
जाने से सियासत गरमा उठी है। हाल ही में लंदन में राहुल गांधी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र
खतरे में है। यहां मीडिया और न्यायपालिका पर सरकारी कब्जा हो गया है। विपक्षी नेताओं पर
केस किए जा रहे हैं। लोकतंत्र के बारे में राहुल गांधी के बयान को लेकर संसद में हंगामा मचा
हुआ है। केंद्र सरकार ने माफी की मांग की है। कुछ लोगों ने कांग्रेस को इमरजेंसी में लोकतंत्र
को कुचलने की और ध्यान दिलाया। भाजपा ने भी पलटवार करते हुए साफ किया कि देश की
जनता से ठुकराए जाने के बाद राहुल गाँधी विदेशों में जाकर भारत की प्रतिष्ठा समाप्त करने
का असफल प्रयास कर रहे है। मोदी विरोधियों का आरोप है मोदी और उनकी पार्टी भाजपा और
आरएसएस देश में लोकतंत्र और सहिष्णुता को मिटाने पर तुली है। वहीँ भाजपा का कहना है कि
सत्ताच्युत होने के बाद कांग्रेस अपनी हार को पचा नहीं पा रही है और आये दिन किसी न किसी
बहाने लोकतंत्र और सहिष्णुता को लेकर देश का माहौल बिगाड़ने में लगी है। जनता कांग्रेस के
साथ नहीं है। लोकतंत्र के सबसे बड़े ठेकेदार राहुल गाँधी और उनकी पार्टी कांग्रेस आज़ादी के बाद
सबसे बुरे दिनों से गुजर रही है। मोदी के बहाने उन्होंने देश को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।
मगर वे यह भूल गए देश की जनता ने नेहरू, इंदिरा और राजीव की भांति मोदी को भी प्रचंड
बहुमत के साथ देश का ताज पहनाया है। जब से कांग्रेस देश की सत्ता से बाहर हुई है तब से
उनकी हालत बिन पानी मछली सी हो रही है। धीरे धीरे कांग्रेस लगातार अपना वजूद खोती जा
रही है मगर सुधरने का नाम नहीं ले रही है। उसके नेता पार्टी छोड़ते जा रहे है मगर नीरो
बांसुरी की धुन में खोया हुआ है। गौरतलब है राहुल ने देश की सवैंधानिक संस्थाओं यथा चुनाव
आयोग, न्यायालय और प्रेस पर भी समय समय पर हमला बोला। मोदी और भाजपा की
आलोचना खूब कीजिये जनाब, मगर देश को बक्श दीजिये। यह बात देश के बारे में अंट - शंट
बोलने वालों की समझ में क्यों नहीं आ रही भगवान जाने। ऐसा लगता है जैसे स्वस्थ और
रचनात्मक बहस का स्थान घृणात्मक और नफरत से ओतप्रोत वाद विवाद ने ले लिया है।