.राजस्थानी बगैर राजस्थान दिवस आधा अधूरा - कविया
नागौर . अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति एवं भाषा प्रसार संस्थान के संस्थापक राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मणदान कविया ने राजस्थानी भाषा की मान्यता के बगैर राजस्थान दिवस का महत्व एवं उपयोगिता आधी अधूरी व फीकी बताई है । राजस्थान दिवस एवं रामनवमी के शुभ अवसर पर कविया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा राजस्थान प्रदेश की प्रतीक एवं पहचान है । 16 करोड़ नागरिकों की मातृभाषा जिसका शब्दकोश विश्व के श्रेष्ठ शब्दकोशो में सुमार है । इसकी व्याकरण लोककथाएं लोकगाथाएं लोकगीत विश्व पटल पर अपनी पहचान अलग से बनाये हुए हैं । इसे अमेरिका नेपाल पाकिस्तान सहित कई देशों में सम्मान मिला हुआ है । राजस्थानी भाषा राजस्थानी संस्कृति कला एवं साहित्य की जननी है। सरकारे राजस्थानी की कला एवं संस्कृति की तो खूब तारीफ करती है एवं इसके विकास व उन्नयन के लिए प्रयत्नशील भी है लेकिन मातृभाषा राजस्थानी की मान्यता की बात पूरी नहीं करती । प्रदेश सरकार को अपने चुनावी वायदों के अनुसार राजस्थानी भाषा को प्रदेश में द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए । कविया ने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि नई शिक्षा नीति में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में दी जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है लेकिन राजस्थान सरकार ने इस ओर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाये है । नये पाठ्यक्रम में कई विवादित मुद्दों को शामिल कर अपनी वोट तुष्टिकरण नीति का ही परिचय दिया है ।