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आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा राजीव गॉंधी

आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा राजीव गॉंधी

देष की स्वतंत्रता के साथ ही प्रथम प्रधान मंत्री पं0जवाहर लाल नेहरू की योजनाबद्ध विकास की सोच व आर्थिक नीतियों से देष में बहुउद्देषीय बृहत सिंचाई योजनाऐं प्रारम्भ हुई। लोहा एवं स्पात के कारखाने लगे, विज्ञान व तकनीकी केन्द्रों की स्थापना हुई। परमाणु कार्यक्रम की योजनाऐं बनाई गई। टैंक, जल पोत, पण्डुब्बियों का निर्माण होने लगा। भारत में विज्ञान और प्राविधिकषोध एवं उच्च षैक्षनिक कार्यकमों का युग प्रारम्भ हुआ। राजीव गॉधी जब 1984 में तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा जी की निर्मम हत्या के बाद देष के प्रधान मंत्री बने तो उन्होंने भारत को 21वी शताब्दी में ले जाने के लिए पृष्ठभूमि तैयार की। उन्होंने वैज्ञानिक सोच तैयार की एवं नवीन तकनिकी व शोध को अपनाया व इनकी प्रगति/उपयोगिता पर जोर दिया। राजीव गांधी सूचना तकनिकी के प्रणेता बन गये। आज भारत ने विज्ञान व तकनिकी क्षेत्र में जो उपलब्धियॉ प्राप्त की हैं उससे अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत भी चकित हैं।
देष में सूचना, संचार, उन्नत प्राद्योगिकी को ऊॅंचाईयों तक ले जाने वाले, देष को टी.वी., कम्प्यूटर, मोबाईल, इन्टरनेट, औद्योगिक उत्पादन, प्रबन्ध कौषल, परिवहन एवं नगरीय विकास की आधुनिक प्राविधि प्रदान कर बहुत कम समय में भारत को विकासषील देष से विकसित देष की ओर ले जाने वाले राजीव गॉंधी ही हैं। पहले विज्ञान शब्द का प्रयोग मात्र प्राकृतिक विज्ञान से था। परन्तु राजीव गांॅधी ने सामाजिक विकास में प्राकृतिक विज्ञान और प्राविधि की बहुमुखी भूमिका को प्रोत्साहन दिया।
शोधों पर जो कार्य एवं व्यय हुआ उसका विकास के कार्यक्रमों और प्राथमिकताओं से तालमेल नहीं था, वैज्ञानिकों को षिकायत रही कि उनकी प्रतिभा और विषिष्ठ ज्ञान का उपयोग नहीं किया गया। आयातित प्राविधियों पर निर्भर रहने की प्रवृति रही, राष्ट्रीय हित का व्यापक दृष्टिकोण नहीं रहा। यह नहीं समझा गया कि षोध और आर्थिक आयोजन में घनिष्ठ सम्बन्ध है व निजी विधाओं के विकास के आधार पर देष को उन्नति के षिक्षर पर ले जाना है। राजीव गॉंधी ने इस महत्वपूर्ण दृष्टिकोण को अपनाया और उनके प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में इस दिषा में हमारे देष में वैज्ञानिक व प्राविधिक संस्थानों द्वारा काफी काम हुआ। विज्ञान अकादमियॉं बनी जो अपने अपने स्तर पर महत्वपूर्ण कार्यकर रही हैं। राजीव गॉंधी ने महसूस करा दिया कि देष की समस्याओं के समाधान में वैज्ञानिकों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने शोध और विकास का बजट बढ़ाया जिससे कृषि, भारी उद्योग, उर्जा, सुरक्षा आदि राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था के प्रमुख घटकों में आत्म निर्भरता में सहायक हुई, वैज्ञानिक एवं तकनीषियन राष्ट्र निर्माण के कार्याें में ज्यादा उत्साह व उमंग से भाग लेने लगे। उन्होंने इस संस्थाओं के प्रषासनिक ढांॅचे में भी बदलाव किया और स्पष्ट किया कि ’’विज्ञान विकास के लिए हैं’’। ’’सेटेलाइट संचार उपग्रह’’ सामान्य जनता की प्राथमिकता एवं आवष्यकताओं को पूरा करने के लिए ही है।उन्होंने वैज्ञानिकों को उर्जा के नये स्त्रोत खोजने के लिए प्रोत्साहित किया गया (विष्व व्याप्त उर्जा संकट ने हमारी प्रगति की रफ्तार को रोका) परन्तु राजीव गांधी ने निराषा को आषा में बदला गया।
राजीव गॉंधी ने संविधान में संषोधन कर नगरीय स्वायत्तषासी संस्थाओं, पंचायत राज संस्थाओं को एक नया रूप दिया और सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर उनकों स्वायत्ता व मान्यता प्रदान की।
राजीव गॉंधी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने देष की एकता, अखण्डता, राजनीतिक स्थिरता, साम्प्रदायिक सद्भाव व उन्नत आर्थिक स्थिति के लिए दृढ़तापूर्वक कार्य किया। उन्होंने राजनैतिक उथल पुथल देखी परन्तु उसकी परवाह नहीं की। आवाजे उठीं प्रजातंत्र खतरे में है, उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे परन्तु उन्होंने मजबूती और बहादुरी से उनका सामना किया। राजीव गांॅधी ने भारत के भविष्य को मजबूत करने के लिए युवा शक्ति का सम्मान किया। मतदान की निर्धारित आयु 21 वर्ष को घटा कर 18 वर्ष किया। आदिवासियों, महिलाओं,पिछडे व दलित वर्गों के त्सरित विकास में उनकी दिलचस्पी थी। वे जनतंत्र को मजबूत करना चाहते थे। उन्होने मतदान हेतु आयु सीमा को कम किया, स्थानीय निकाय, स्वायत्तषासी संस्थाओं में महिलाओं व पिछडे वर्गों को 33 प्रतिषत आरक्षण दिया। सहकारी आंदोलन व पंचायत राज संस्थाओं को सषक्त करने का पूरा प्रयास किया। अनुसूचित जाति, जनजाति, महिलाओं एवं पिछड़े वर्गों के सषक्तिकरण हेतु इन संस्थाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण दिया।
राजीव गॉंधी सदैव शुद्ध राजनीति के पोषक थे। उन्होंने इतिहास से सबक लिया। समाज की रचनात्मक व कियात्मक जानकारी व समझ हांसिल की । जमीनी हकीकत को समझा। वे कॉगेंस पार्टी को सषक्त, जीवंत व सक्रिय बनाना चाहते थे। वे आम आदमी के नेता थे व उसके निकट पहुॅंच कर अपनत्व प्रदर्षित करते थे। उन्होंने अपनी प्रषासकीय प्राथमिकताओं और सरोवारों को साफ ढ़ंग से प्रकट किया। कमियों को स्वीकार किया। किसी राजनेता की हिम्मत सच्चाई को कुकूल करने की नहीं हो सकती थी। वे सच्चाई जानने को आदिवासियों व गरीब के झोंपड़ों में गये उनके साथ खाना खाय, उनके साथा समय व्यतीत कर उनकी समस्याओं व वास्तविकताओं की जानकारी प्राप्त की। वे लगातार गांवों में आमजन के नजदीक जाते रहे।
राजीव गांॅधी सभी व्यक्तियों को सम्मान दिलाने व समकक्ष लाने के पक्षधर थे। सभी को समानता पर लाने के लिए उन्होंने महिलाओ व अन्य पिछड़ा वर्ग को सामाजिक सुरक्षा योजनाऐं बनाई। प्रारम्भिक षिक्षा व साक्षरता लाने का अथक प्रयास किया। जनसंख्या नियंत्रण के लिए नयी सोच व जल प्रबन्धन और पर्यटन विकास के सम्बंध में भी अपूर्व पहल की। वे जातिवाद, सामप्रदायिकता व आतंकवाद के विरोधी थे। उन्होंने देष की एकता व अखण्डता के लिए अपनी शहादत दी।
प्रसिद्ध स्तम्भकार स्व. खुषवंत सिंह ने उनके प्रधानमंत्री बनने पर लिखा था ’’राजीव गांॅधी की ताजपोषी इस देष के लिए सर्वोत्कृष्ट घटना है’’ उन्होंने अल्लाहमा इकबाल द्वारा एक नेता की खुबीयों को बताने वाले शब्दों में लिखा ’’निगाह बुलन्द सुकून दिल, जवान जान पर सोज, यही है रखते सफर मेरे कारवांॅ के लिए’’।सन् 1989 में उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं मिला, यद्यपि उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में संसद में आई, परन्तु उन्होंने जोड तोड के आधार पर सरकार नहीं बनाई। वे सुरक्षा की चिन्ता किये बगैर जनता के बीच में चले जाते थे।
राजीव देष को 21वी सदी में ले जाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अथक प्रयास किये। राजीव गॉंधी एक ऐसे नेता रहे हैं जिनको आज भी यह देष यह कह कर याद करता है कि ’’यदि आज राजीव गांॅधी होते तो देष कहॉं से कहॉ होता।’’ उनकी वैज्ञानिक सोच, दूरदर्षिता, सौम्यता, सरल व्यक्तित्व को लोग आज भी याद करते हैं। बढ़ते आतंकवाद को रोकने में उन्होंने अपने प्राणों की आहूती दी। मुझे उनसे मिलने, वार्तालाप करने, बहस करने का मौका मिला। मैंने पाया वे पूरे परिदृश्य को समझने और तदुपरान्त निर्णय करने का प्रयास करते थे। मैंने उनका गुस्सा भी देखा है। उनका गुस्सा भी सोडावाटर की बोतल में भरे गैस जैसा होता था, वास्तविकता व वस्तु स्थिति को समझ कर तुरन्त शांत हो जाते थे। यहॉं माननीय केदारनाथ जी की पंक्तियॉं को लिखना मुनासिब होगा-’’मैंने उनको जब जब देखा, लोहा देखा, लोहा जैसा तपते देखा, गलते देखा, ढ़लते देखा, गोली जैसा चलते देखा’’।
राजनैतिक, आर्थिक व अन्तर्राष्ट्रीय तीनों मोर्चे व स्तर पर उन्होंने असाधारण योग्यता प्रदर्षित की। यदि देष का भार संभालने का उन्हें और अधिक मौका मिलता तो आज की भारत की तस्वीर और अधिक साफ व विषाल दिखााई पड़ती।

-डा. सत्यनारायण सिंह

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