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राम गोपाल वर्मा ने आदित्य की तारीफ में कही बड़ी बात, ‘धुरंधर’ को बताया गेम चेंजर

राम गोपाल वर्मा ने आदित्य की तारीफ में कही बड़ी बात, ‘धुरंधर’ को बताया गेम चेंजर

मुंबई। आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर' और इसका अगला भाग रिलीज के बाद से ही चर्चाओं में छाए हुए हैं और हर तरफ निर्देशक की तारीफ हो रही है। अब इस लिस्ट में मशहूर निर्देशक रामगोपाल वर्मा का नाम शामिल हो गया है। दरअसल, वर्मा ने निर्देशक आदित्य धर के शानदार काम को लेकर उनकी पीठ थपथपाई है। राम गोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा नोट शेयर किया। इस पोस्ट में निर्देशक ने 'धुरंधर' को हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने लिखा कि यह फिल्म एक तरह का 'हॉरर' है, लेकिन डराने के लिए नहीं, बल्कि उन फिल्ममेकर्स के लिए जो सस्ता, दिखावटी और मसाला सिनेमा बनाकर नाम और पैसा कमाते हैं। रामगोपाल ने लिखा, "पहले का सिनेमा सिर्फ जोर-शोर वाली आवाजें और एक्शन दिखाता था, लेकिन अब ऐसा सिनेमा खत्म होने की कगार पर है। 'धुरंधर' उन फिल्ममेकर्स को डराएगी जो अभी भी 'सुपरहीरो' स्टाइल की पूजा करते हैं।"
निर्देशक ने रणवीर सिंह के काम की तारीफ की। उन्होंने लिखा, "रणवीर सिंह के किरदार ने असली, जटिल और कमजोरियों वाले हीरो को जन्म दिया है, जो दर्द महसूस करता है और जिसके कामों से हीरोइज्म आता है न कि बैकग्राउंड म्यूजिक या दिखावे से। इस नए तरह के हीरो के सामने, पुराने 'देवता जैसे हीरो' अचानक हास्यास्पद लगेंगे, जैसे सर्कस में जोकर। उनके फैंस भी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सुनकर बेबस महसूस करेंगे।"
रामगोपाल ने लिखा कि यह फिल्म उन एक्शन सीन बनाने वालों के लिए भी डरावनी है, जहां फिजिक्स का मजाक उड़ाया जाता है और लोग 50 फुट ऊपर फेंके जाते हैं, उछलते हैं, विस्फोटों से बच जाते हैं और फिर भी डायलॉगबाजी करते हैं। अब दर्शक असली दर्द, खून और सच्चा एक्शन देखना चाहते हैं, पुराने 'उड़ते गुंडे' सीन नकली लगेंगे।
रामगोपाल ने निर्देशक को चेतावनी देते हुए लिखा, "यह पैन इंडिया के निर्देशकों के लिए चेतावनी है, जो अब भी सोचते हैं कि किरदार सिर्फ हेयरस्टाइल, कपड़े, फोटोशॉप किए हुए सिक्स पैक और डिजाइनर कपड़ों से बनते हैं, ना कि उनकी मनोवैज्ञानिक गहराई से। धुरंधर में हीरो की ताकत दिमाग से आती है, न कि बाइसेप्स से। पुराने 'हेयर और कॉस्ट्यूम' वाले हीरो अब बच्चों जैसे लगेंगे।"
रामगोपाल ने लिखा, "धुरंधर सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक फैसला है। आदित्य धर ने उस सिनेमा की कटाई कर दी जो दर्शकों की समझदारी का अपमान करता था, जिसमें कहानी की जगह चमक-दमक, हीरो को भगवान, और दर्शकों को भेड़ बनाया जाता था। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पुरानी सोच को दफन कर रहे हैं।
आरजीवी ने चेताया कि अगर फिल्ममेकर्स अपनी फिल्मों के तरीके नहीं बदलते और धुरंधर को कई बार नहीं देखते, तो उनकी फिल्में और सोच बचना मुश्किल होगा। समस्या यह है कि उनके पास आदित्य धर जैसी समझ और दिमाग नहीं है।"

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