RBI के फैसले से बढ़ा भरोसा, अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती!
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नीतिगत रेपो दर को यथावत रखने के फैसले को अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत ने सकारात्मक कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच यह निर्णय आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विकास की गति को संतुलित रखने में मददगार साबित होगा।
उद्योग संगठनों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है। ऐसे माहौल में ब्याज दरों को स्थिर रखना निवेशकों और कारोबार जगत के लिए भरोसे का संदेश माना जा रहा है।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला आर्थिक जोखिमों और विकास की जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित करता है। उनके अनुसार, मध्यम और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को बनाए रखने के लिए यह नीति अनुकूल वातावरण तैयार करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई फिलहाल केंद्रीय बैंक के लक्ष्य दायरे के आसपास बनी हुई है, लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां आगे चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। इसके बावजूद घरेलू मांग मजबूत रहने से भारतीय अर्थव्यवस्था में लचीलापन बना हुआ है।
अर्थशास्त्रियों ने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति संबंधी व्यवधान और सामान्य से कमजोर मानसून जैसी परिस्थितियां आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। यदि महंगाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है, तो वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बदलाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ाने के लिए आरबीआई द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की है। उनका मानना है कि इससे विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बनेगा। विदेशी मुद्रा बाजार ने भी इन घोषणाओं पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया दिखाई है।
इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिनोद कुमार ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। उनके अनुसार, ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय विकासोन्मुख दृष्टिकोण को दर्शाता है और इससे खुदरा, कृषि तथा एमएसएमई क्षेत्रों में मांग को समर्थन मिलेगा।
वहीं, आवास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा ब्याज दरें बरकरार रहने से होम लोन लेने वाले ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा। इससे ऋण वितरण में सुधार होगा और विभिन्न शहरों में आवासीय संपत्तियों की मांग को भी बल मिलेगा।
कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह फैसला तत्काल चुनौतियों और भविष्य की विकास आवश्यकताओं दोनों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती को और मजबूत करने में सहायक होगा।