RBI के फैसले से बढ़ सकता है विदेशी निवेश, रुपया हो सकता है मजबूत: रिपोर्ट
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया मौद्रिक नीति के बाद अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। SBI Research की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि केंद्रीय बैंक के फैसलों से भारत में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित हो सकता है, जिससे रुपये को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में देश में करीब 40 अरब डॉलर तक का कैपिटल इनफ्लो देखने को मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले बेहतर स्थिति में पहुंच सकती है और विनिमय दर 92-93 के स्तर तक जा सकती है।
एसबीआई रिसर्च का मानना है कि फिलहाल आरबीआई महंगाई और आर्थिक विकास से जुड़े संकेतकों पर करीबी नजर बनाए रखेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में कोई सख्त मौद्रिक कदम उठाने के बजाय आंकड़ों का विश्लेषण जारी रख सकता है। इसी वजह से अगस्त में होने वाली अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रखने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया है। साथ ही आर्थिक विकास दर के अनुमान में सुधार करते हुए इसे 6.6 प्रतिशत तक पहुंचने का आकलन किया गया है। वहीं खुदरा महंगाई (सीपीआई) के अनुमान को संशोधित कर 5.1 प्रतिशत किया गया है।
विश्लेषण में कहा गया कि केंद्रीय बैंक का रुख फिलहाल संतुलित और सतर्क दिखाई देता है। आरबीआई का मुख्य फोकस महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने पर है। रिपोर्ट के अनुसार, यह रणनीति बाजार में भरोसा बनाए रखने में मदद कर सकती है।
एसबीआई रिसर्च ने यह भी कहा कि आरबीआई ने अपने नीति वक्तव्य में रुपये की चाल को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मुद्रा विनिमय दर हमेशा केवल बाजार की अटकलों से नहीं बल्कि आर्थिक बुनियादी कारकों से तय होनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इससे रुपये को लेकर अनावश्यक अटकलों और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।