RCA बना अखाड़ा.....
पिछले दो दशक में राजस्थान में क्रिकेट ने ऊंचाइयां छुई थी, पहले रुंगटा बंधु और बाद में ललित मोदी ,डॉ सीपी जोशी और वैभव गहलोत ने क्रिकेट को नई ऊंचाइयां दी। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को साधन संपन्न बनाया, आर्थिक रूप से संपन्न बनाया और सरकार से क्रिकेट जगत के लिए पूरा सहयोग लिया इ सी के चलते यहां कई अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय आयोजन हुए।
पर भाजपा शासन आने के बाद अब जिस तरह से यहां पर राजनीति हो रही है उसको देखकर लग रहा है कि आर सी ए क्रिकेट का नहीं कुश्ती का अखाड़ा हो गया है। नेता तो पहले भी खुद या खुद के बच्चों को क्रिकेट में लाना चाहते थे पर अब तो सब ने पूरी ताकत लगा दी है बॉल और बल्ला पकड़ नहीं पाने वाले क्रिकेट एसोसिएशन में आ गए हैं।
जिस तरह से मंत्री पुत्र और राजनेताओं के पुत्रों ने क्रिकेट की और रुख किया है उसको देखकर लग रहा है कि आने वाले समय में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का और भट्टा बैठेगा अपने रुटीन के काम काज भी संगठन कर ले तो आश्चर्य की बात रहेगी। वर्तमान में मंत्री ओटाराम देवासी के पुत्र विक्रम देवासी घनश्याम तिवारी के पुत्र आशीष तिवारी ,अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत, चंद्रिका सिंह कटोच के पुत्र ऐश्वर्या कटोच ,गजेंद्र सिंह खींवसर के पुत्र धनंजय सिंह , जसवंत यादव के पुत्र मोहित यादव, मदन दिलावर के पुत्र पवन दिलावर और राजेंद्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम सिंह राठौड़ संगठन में बैटिंग करने लग गए हैं। वहीं मंत्री हेमंत मीना, विधायक जयदीप बियानी ,सीपी जोशी, अमीन पठान, रामपाल शर्मा, रोहित बोहरा ,गौरव वल्लभ, रतन देवासी ,अभिनव जैन और प्रमोद शर्मा भी अपने को बल्लेबाज साबित करने में लगे हैं। इनमें से अधिकांश को क्रिकेट की एबीसीडी नहीं आती लेकिन यह राजस्थान क्रिकेट के भाग्य विधाता बनना चाहते हैं।
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के नियम कायदों में परिवर्तन करके खेलने वाली को ही पदाधिकारी बनने की शर्त लगानी चाहिए तभी क्रिकेट के क्षेत्र में सकारात्मक विकास होगा और राजस्थान का क्रिकेट जगत ऊंचाइयों पर पहुंचेगी राजस्थान में बहुत टैलेंट है परंतु उसकी तलाशने और तराशने की जरूरत है।