राजस्थान में बागी बिगाड़ेंगे सत्ता के समीकरण
राजस्थान में चुनावी रणभेरी बज गयी है। राज्य के 200 विधानसभा सीटों के लिए 25 नवंबर को होने वाले
चुनाव में 2658 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किये है। राजस्थान में भी दागी और बागी दोनों ही
चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे है। करीब 50 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस के विधायक, पूर्व विधायक और वरिष्ठ
नेता बागी होकर चुनाव मैदान में उतर गए हैं। राजस्थान विधान सभा के चुनाव में बड़ी संख्या में उतरे बागी
प्रत्याशी कांग्रेस और भाजपा के सत्ता के समीकरण बिगाड़ रहे है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा
दोनों को ही बागियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। अब भाजपा और कांग्रेस को बागियों से दो-दो हाथ करने
होंगे। प्रदेश की 50 से अधिक सीटों पर दोनों पार्टियों में बड़े बागी मैदान में हैं। दोनों पार्टियां अपने वरिष्ठ
नेताओं के हस्तक्षेप के बावजूद बागी हुए नेताओं को मनाने में विफल रहीं। दोनों ही पार्टिया नाम वापस लेने
की तिथि तक अपने अपने बागियों को मनाने के प्रयास में जुट गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खासमखास रहे कई बड़े कद वाले नेता इस समय बागी उम्मीदवार के रूप में
चुनावी मैदान में है। भाजपा के बागियों में पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, यूनुस खान और निवर्तमान
विधायक चन्द्रभान सिंह आक्या [ चितौड़ गढ़ ] ,कोटा से भवानी सिंह राजावत जैसे बड़े नामों के अलावा
हाल ही भाजपा का दामन थमने वाले रविंद्र भाटी [ शिव ], खंडेला से बंशीधर बाजिया, बाड़मेर से प्रियंका
चौधरी, कोटपूतली से मुकेश गोयल , सुमेरपुर से मदन राठौड़, डग से रामचंद्र सुनेरीवाल , लूणकरणसर से
प्रभुदयाल सारस्वत, फतेहपुर -से भाजपा से पूर्व पालिका अध्यक्ष मधूसूदन भिण्डा, थानागाजी से रोहिताश
घांघल,संगरिया से गुलाब सिंवर, झुंझुनू से राजेन्द्र भाम्बू, बस्सी से जितेन्द्र मीणा, मारवाड जंक्शन से इन्द्र
सिह,सुजानगढ से राजेन्द्र नायक, भीलवाड़ा से अशोक कोठारी, लक्ष्मणगढ़ से अल्का शर्मा, पिलानी से
पिछला चुनाव लड़ने वाले कैलाश मेघवाल, झोटवाड़ा विधानसभा सीट सेआशुसिंह सूरपुरा, सवाई माधोपुर
से आशा मीणा, आदि ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर पार्टी के अधिकृत
उम्मीदवारों को चुनौती दी है। ये वो नाम हैं, जो भले ही अपना चुनाव जीत न सके, लेकिन बीजेपी के
अधिकृत उम्मीदवार का खेल बिगाड़ सकते हैं।
वहीं कांग्रेस में भी बागियों की कमी नहीं है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खासमखास पूर्व महापौर रामेश्वर
दाधीच ने सूरसागर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। नामांकन दाखिल
करने के बाद रामेश्वर दाधीच ने कहा कि मैंने कांग्रेस पार्टी के लिए घर तक जला दिया। लेकिन पार्टी ने मुझे
कुछ नहीं दिया। कांग्रेस ने मेरा टिकट काटकर मुझे मेरी वफादारी का इनाम दिया है। लेकिन, मेरे साथ 36
कौम के लोग हैं और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मेरी इस बार जीत होगी। टिकट से वंचित कांग्रेस
विधायक जौहरी लाल मीणा और बाबूलाल बैरवा ने टिकट बेचने का आरोप लगाया। सत्ताधारी पार्टी के
राजगढ से विधायक जोहरीलाल मीणा, शाहपुरा से विधायक आलोक बेनीवाल, संगरिया से पूर्व विधायक डॉ.
परमनवदीप, गंगानगर से नगर परिषद में कांग्रेस की सभापति करूणा चांडक ,मालपुरा से गोपाल गुर्जर,
बांसवाड़ा से हकरु मईडा, नागौर से हबीब उर रहमान ,छबड़ा से नरेश मीणा की पत्नी सुनीता, सादुलशहर से
ओम बिश्नोई, सवाईमाधोपुर से अजीजुद्दीन आजाद, सिवाना से सुनील परिहार,महवा से रामनिवास
गोयल, मोहसिन रसीद ने टोंक, कांग्रेस के बागी शिव प्रसाद मीणा, गौरव शर्मा, रूपेश शर्मा, राकेश बोयत ने
कोटा और बूंदी की अलग-अलग सीटों से नामांकन दाखिल कर निर्दलीय के रूप में ताल ठोंकी है।
पिछले चुनाव में बड़ी संख्या में बागी जीते जो अधिकांश कांग्रेसी थे। गहलोत सरकार के संकट के दौरान
बागी जीते विधायकों ने सरकार को अपना समर्थन दिया था। इस बार भी बागी निर्दलीय के रूप में अपना
भाग्य आज़मा रहे है। यहाँ एक दल में टिकट नहीं मिलता है तो दूसरे दल से टिकट लेकर चुनावी मैदान में
उतरते हैं। कार्यकर्ता भले ही विरोध करते हैं, लेकिन बागी चुनाव जीत भी जाते हैं। इस बार भी कांग्रेस व
बीजेपी के साथ ही अन्य दलों में भी बागियों की लम्बी फेहरिस्त देखने को मिल रही है।
दूसरी तरफ प्रदेश में दल बदल का खेल भी भाजपा और कांग्रेस ने खुलकर खेला है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों
ने अनेक दलबदलुओं को टिकट दी है। अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थामने वाले नेता पार्टी का
अधिकृत उम्मीदवार बनने में कामयाब हुए। बसेड़ी से कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को भाजपा ने
और भाजपा के पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम सरीखे नेता कांग्रेस का टिकट पाने में सफल हुई। इसके अलावा
भी अनेक दल बदलू नेता कांग्रेस और भाजपा में शामिल होकर टिकट प्राप्त करने में सफल हुए है जिससे
दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्त्ता नाराज़ हुए है।