मशहूरो मारूफ़ शाइर सरफ़राज़ शाकिर के निधन पर ताज़ियती नशिस्त आयोजित
जोधपुर । सरफ़राज़ शाकिर एक बेहतरीन शायर के साथ साथ मुख़लिस दोस्त और सादा शख़्सियत के मालिक थे इन ख़यालात का इज़हार मशहूरो मारूफ़ शाइर सरफ़राज़ शाकिर के निधन पर बज़्मे उर्दू, बज़्मे तामीर ए उर्दू , इम्काने अदब, तहज़ीब, सरोकार, बाज़गश्त और तहरीर की जानिब से राज़दान मेन्शन आयोजित एक ताज़ियती नशिस्त (श्रद्धांजली सभा) में बुज़ुर्ग शाइर और मरहूम के क़रीबी दोस्त इक़बाल कैफ़ ने सदारत करते हुए किया, लखनऊ से अपने मैसेज में ख्यातनाम शाइर और आलोचक शीन काफ़ निज़ाम ने कहा कि साढ़े चार दशक में शाकिर ने राजस्थान के अदबी मैयार को अलग पहचान दी।
मुहतमिम शाइर शीन मीम हनीफ ने कहा कि शाकिर अपनी शायरी में हमेशा तजरिबे करते हुए नज़र आते हैं और इन्होने अपनी शाइरी में मुहावरों का भी बख़ूबी इस्तेमाल करते किया है, शाइर अफ़ज़ल जोधपुरी मरहूम की ताज़ियत करते हुए उनकी कई ग़ज़लें पढ़ीं और मग़फिरत की दुआ की। बृजेश अम्बर ने उनको एक बुजुर्ग, हमउम्र और दोस्त की हैसियत से उनकी यादें समेटते हुए याद किया, शाइर इश्राक़ुल इस्लाम माहिर ने पुणे से और एम. एस. ज़ई ने भोपाल से ऑनलाइन ऑडिओ मैसेज के ज़रिए खि़राजे अक़ीदत पेश की वसीम बैलिम ने उन्हीं की ग़ज़ल “सूख जाएगा समन्दर देखना - फिर मेरी आँखों का मंज़र देखना“ सुनाकर उनको खि़राजे अक़ीदत पेश की, नशिस्त में उनके शागिर्द यासीन खां ने उनसे अपने रिश्ते का ज़िक्र करते हुए याद किया और अपने तास्सुरात भी बयान किये। नशिस्त में तहज़ीब के सचिव नफ़ासत अहमद, सरवर शाकिर, दिलबर शाकिर, उनकी बेटी शाइरा उल्फ़त शाकिर और मोइनुद्दीन ने सरफ़राज़ शाकिर को याद कर उनको खि़राजे अक़ीदत पेश की, नशिस्त की निज़ामत अफज़ल जोधपुरी ने की।