बीकानेर तहसील के दो गांवों का राजस्व नक्शा ही गायब,
तत्कालीन पांच पटवारियों पर केस दर्ज
बीकानेर । बीकानेर तहसील में दो गांवों रिडमलसर पुरोहितान और नैणा का बास के राजस्व नक्शे पिछले दो दशक से गायब है । नगर विकास न्यास में मर्ज किये गये इन दोनों गांवों में विकास कार्यो की रूपरेखा बनाने के बाद राजस्व रिकॉर्ड खंगालने पर इनके राजस्व नक्शे गायब होने का मामला उजागर हुआ । अब इस मामले को लेकर हल्का पटवारी प्रेमसिंह की ओर से साल 1997 से लेकर 2008 तक हल्का पटवारी रहे छह तत्कालीन पटवारियों के खिलाफ व्यास कॉलोनी थाने में मामला दर्ज कराया गया है,मजे कि बात तो यह है कि इनमें पांच पटवारी सेवानिवृत हो चुके और एक का देहावासन भी हो गया है । मामले की जांच कर रहे एएसआई राधेश्याम के मुताबिक हल्का पटवारी प्रेम सिंह ने अपनी लिखित रिपोर्ट में बताया कि तहसील बीकानेर के पटवार मण्डल रिडमलसर पुरोहीतान के ग्राम रिडमलसर पुरोहितान एवं ग्राम नेणो का बास के राजस्व नक्शे साल 2008 के बाद पटवार मण्डल पर कार्यरत रहे पटवारियों के पास उपलब्ध नही रहे है माह अगस्त 2008 मे पटवार मण्डल रिडमलसर का कार्यभार तत्कालीन हल्का पटवारी राजेन्द्र स्वामी के पास रहा,राजेन्द्र स्वामी द्वारा नक्शों के सबंधं में दिये गये कार्यालय के नोटिस के जवाब मे जो चार्ज फैहरिस्त की कॉपी पेश की उसमें दोनो ग्रामों के नक्शों का अंकन नही है । इन दोनो ग्रामों के नक्शे कार्यालय रिकॉर्ड अनुसार वर्ष 1997 के पश्चात तक पटवारी हल्का के पास उपलब्ध होना जाहीर होता है इस अवधी के पश्चात लगभग वर्ष 2008 से पूर्व तक की अवधि मे पटवार मण्डल के रिकॉर्ड से गायब हो जाने की संभावना है ।
-पांच तत्कालीन पटवारियों पर केस दर्ज
हल्का पटवारी ने इस मामले में साल 1997 से लेकर 2008 तक के दरम्यान पटवार मण्डल रिडमलसर पुरोहितान में हल्का पटवारी रहे मोहम्मद उस्मान, हनुमान सेन,गणेश भादाणी,देवेन्द्र शर्मा, जस्सुराम और मोहम्मद सलीम को नामजद कराया है,आरोप है कि इनके कार्यकाल में राजस्व नक्शे गायब हो गये,जो अब रिटायर्ड हो चुके है। इनमें हनुमान सेन का तो देहावान हो चुका है। थाना पुलिस ने यह मामला भादस की धारा 381 के तहत दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
-जमीनों की हेराफेरी के लिये हुआ सारा खेल !
जानकारों की मानें तो यह सारा खेल शहर से नजदीक लगते इन दोनों गांवों की जमीन में हेराफेरी के लिये हुआ । बीकानेर जिला प्रशासन की नाक के नीचे चले इस खेल में तत्कालीन पटवरियों से मिलीभगत के चलते भू-माफिया करोड़ो रूपये की सरकारी और खातेदारों की जमीनों पर कब्जा कर बैठे और कई जमीनों की महंगे दामों में सौदेबाजी भी कर दी। बीकानेर तहसील कार्यालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस मामले की पड़ताल करने पर भू-माफिया जगत के कई सफेदपोश लोगों के नाम उजागर हो सकते है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि करीब दो दशक से गायब इन गांवों के राजस्व नक्शों को लेकर अब तक क्यों दबाएं रखा और यह मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी का होने के बावजूद अब तक अपराधिक मामला दर्ज क्यों नहीं कराया गया।